आजमगढ़ रोडवेज का नाम अब नायब सूबेदार सौदागर सिंह बस स्टेशन, चीन युद्ध से जुड़ा है इनका नाम

Date:


Last Updated:

आजमगढ़ बस स्टेशन अब नायब सूबेदार सौदागर सिंह बस स्टेशन के नाम से जाना जाएगा. उत्तर प्रदेश परिवहन क्षेत्रीय प्रबंधक आजमगढ़ मनोज कुमार बाजपेई ने बताया कि आजमगढ़ बस स्टेशन का नाम बदलने के लिए शासन की तरफ से आदेश पत्र प्राप्त हो चुका है इसके बाद से बस स्टेशन के नाम बदलने की प्रक्रिया चल रही है जल्द ही स्टेशन पर नए नाम के साथ बोर्ड भी लगाया जाएगा.

ख़बरें फटाफट

आजमगढ़:  योगी सरकार ने आजमगढ़ जनपद के बस स्टेशन का नाम बदलने का फैसला लिया है. आजमगढ़ बस स्टेशन अब नायब सूबेदार सौदागर सिंह बस स्टेशन के नाम से जाना जाएगा. उत्तर प्रदेश परिवहन क्षेत्रीय प्रबंधक आजमगढ़ मनोज कुमार बाजपेई ने बताया कि आजमगढ़ बस स्टेशन का नाम बदलने के लिए शासन की तरफ से आदेश पत्र प्राप्त हो चुका है इसके बाद से बस स्टेशन के नाम बदलने की प्रक्रिया चल रही है जल्द ही स्टेशन पर नए नाम के साथ बोर्ड भी लगाया जाएगा.

चीन से युद्ध में 12 सैनिकों को मारने वाले के नाम पर होगा नाम

प्रदेश शासन की तरफ से आजमगढ़ बस स्टेशन का नाम बदलने से जहां एक तरफ जिले के स्वतंत्रता सेनानी को एक नई पहचान मिलेगी वहीं उनकी अमर वीरगाथा से भी लोग परिचित हो सकेंगे. शाहिद नायब सूबेदार सिंह जनपद के सगड़ी तहसील क्षेत्र के अंतर्गत पूनापार बड़ागांव के रहने वाले थे, जिन्होंने अपने पराक्रम और साहस के बल पर 1962 में हुए भारत और चीन के युद्ध में 12 चीनी सैनिकों को मौत के घाट उतारा दिया था और उनसे उनकी एसएलआर छीन कर अपने कैंप तक ले आए थे.

कौन थे नायब वीर सौदागर सिंह

भारत और चीन के बीच 1962 की लड़ाई लड़ने वाले प्रथम वीर चक्र विजेता शहिद सौदागर सिंह जनपद के सगड़ी तहसील क्षेत्र के निवासी थे, 1948 में वह फतेहपुर से राजपूत रेजीमेंट में भर्ती हुए थे इसके बाद चित्तौड़गढ़ में सैन्य शिक्षा ग्रहण करने के बाद 1958 में लांस नायक के पद पर उनकी तैनाती हुई और महज 2 सालों के भीतर ही 1960 में उन्हें हवलदार बनाया गया. इसी दौरान 1962 में भारत चीन युद्ध शुरू हुआ जिसमें नायब सौदागर सिंह और उनकी फौज की टुकड़ी की तैनाती लद्दाख सीमा पर हुई, चीनियों से युद्ध लड़ने के दौरान अचानक उनकी राइफल जाम हो गई जिसके बाद चीनी सैनिकों ने उन्हें घेर लिया लेकिन सौदागर सिंह ने हार नहीं मानी और पहाड़ी की ओट में छिपकर खुद को सुरक्षित किया.

जैसे ही चीनी सैनिक वहां से गुजरने लगे इसी दौरान सौदागर सिंह ने अपनी राइफल पर लगी हुई चाकू से चीनी सैनिकों पर हमला कर दिया और एक-एक करके उन सभी 12 चीनी सैनिकों को मौत के घाट उतार दिया. इसके बाद उन्होंने चीनी सैनिकों के तत्कालीन समय के आधुनिक एसएलआर राइफल को छीनकर उसे अपने कंधे पर लादकर 10 दिन का सफर तय करते हुए वह अपने कैंप तक पहुंचे थे तत्कालीन समय में भारतीय सेना के पास अत्याधुनिक एसएलआर राइफल नहीं हुआ करती थी. उस दौरान खून से लथपथ सौदागर सिंह को एकाएक देखकर उनकी टुकड़ी के अन्य कमांडर आश्चर्यचकित रह गए थे.

भारत-पाकिस्तान युद्ध में हुए थे शहीद

शाहिद नायब वीर सौदागर सिंह कि इस वीरता के लिए उन्हें तत्कालीन राष्ट्रपति डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन के द्वारा वीर चक्र से सम्मानित किया गया था वह भारत चीन युद्ध के प्रथम वीर चक्र विजेताओं में से एक थे. इसके बाद नायाब सौदागर सिंह का सफर यहीं नहीं थमा, 1948 में राजपूत रेजीमेंट से शुरू हुआ उनका सफर 1965 के भारत पाकिस्तान युद्ध तक जारी रहा इसी दौरान इस युद्ध में मातृभूमि की रक्षा करते हुए वह वीरगति को प्राप्त हुए थे.

About the Author

Rajneesh Kumar Yadav

मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें



Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

spot_imgspot_img

Popular

More like this
Related