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कन्नौज में आलू खुदाई के बाद जायद सीजन में मक्का खेती किसानों के लिए लाभकारी विकल्प बन रही है. कृषि विशेषज्ञ 60–70 सेमी कतार दूरी और 20–25 सेमी पौधा दूरी रखने की सलाह दे रहे हैं. मेड पर बुवाई से जल निकासी बेहतर होती है और उत्पादन बढ़ता है. डिप्टी डायरेक्टर कृषि संतोष कुमार के अनुसार वैज्ञानिक तरीके, संतुलित उर्वरक और समय पर निंदाई से किसान अधिक पैदावार और मुनाफा कमा सकते हैं.
कन्नौज. कन्नौज में आलू की फसल की खुदाई के बाद जायद सीजन में मक्का की खेती किसानों के लिए लाभ का बेहतर विकल्प बन रही है. कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि खेत की सही तैयारी, बीज की उचित दूरी और मेड पर बुवाई की जाए तो कम समय में अधिक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है. कई बार किसान जल्दबाजी में बुवाई कर देते हैं, जिससे पैदावार प्रभावित होती है.
कैसे करें बुवाई
विशेषज्ञों के अनुसार आलू की खुदाई के बाद सबसे पहले खेत में बचे अवशेष और खरपतवार को पूरी तरह साफ करना जरूरी है. इसके बाद एक गहरी जुताई कर मिट्टी को पलट दें, ताकि कीट और रोगजनक नष्ट हो सकें. फिर दो बार हल्की जुताई और पाटा लगाकर खेत को भुरभुरा व समतल बनाएं, यदि संभव हो तो 8–10 टन प्रति हेक्टेयर की दर से सड़ी हुई गोबर की खाद मिलाने से मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है. मक्का की बुवाई के लिए कतार से कतार की दूरी सामान्य किस्मों में 60 से 70 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 20 से 25 सेंटीमीटर रखना उपयुक्त माना जाता है. हाइब्रिड किस्मों के लिए कतार दूरी 70 से 75 सेंटीमीटर तक रखी जा सकती है. बीज को 4 से 5 सेंटीमीटर गहराई पर बोना चाहिए, ताकि अंकुरण अच्छा हो.
क्या बोले डिप्टी डायरेक्टर कृषि
कन्नौज की डिप्टी डायरेक्टर कृषि संतोष कुमार बताते हैं कि कन्नौज में किसान अब 60,000 हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्र में मक्का की फसल करते है, ऐसे में किसानों को मेड पर खेत को अधिक लाभकारी साबित हो सकती हैं. इसमें 60–70 सेंटीमीटर की दूरी पर मेड बनाकर बीज को मेड के ऊपरी भाग पर बोया जाता है. इससे जल निकासी बेहतर होती है और पानी भराव की समस्या नहीं रहती, साथ ही जड़ों का विकास अच्छा होता है और पौधे तेज बढ़ते हैं. सिंचाई भी नालियों के माध्यम से आसान हो जाती है, जिससे पानी की बचत होती है. समय पर निंदाई-गुड़ाई और संतुलित उर्वरक प्रबंधन से किसान मक्का की फसल से बेहतर उत्पादन और मुनाफा कमा सकते हैं. कृषि विभाग ने किसानों को वैज्ञानिक तरीके अपनाने की सलाह दी है, ताकि आलू के बाद मक्का की खेती से अधिकतम लाभ लिया जा सके.
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पिछले एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं. 2010 में प्रिंट मीडिया से अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत की, जिसके बाद यह सफर निरंतर आगे बढ़ता गया. प्रिंट, टीवी और डिजिटल-तीनों ही माध्यमों म…और पढ़ें


