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Telangana Maoists: तेलंगाना डीजीपी ने भरोसा दिया कि जो लोग मुख्यधारा में शामिल होना चाहते हैं, उन्हें राज्य सरकार द्वारा तय नियमों के अनुसार, सरकार की सरेंडर और पुनर्वास योजना के तहत तुरंत मदद और फायदे दिए जाएंगे. सरकार उनके फिर से जुड़ने के लिए पूरी मदद पक्का करने के लिए कमिटेड है, ताकि वे अपने परिवारों के साथ अपने गांवों या कस्बों में आजादी, सम्मान और गरिमा के साथ रह सकें.
तेलंगाना के डीजीपी ने माओवादियों से मुख्यधारा में लौटने की अपील की है.
हैदराबाद. तेलंगाना पुलिस ने जंगलों में छिपे टॉप माओवादी नेताओं और कैडर को समाज की मुख्यधारा (Mainstream) में लौटने का एक और मौका दिया है. रविवार को डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (DGP) बी. शिवधर रेड्डी (B. Shivadhar Reddy) ने एक भावुक और सख्त अपील जारी करते हुए कहा कि हिंसा का रास्ता छोड़ें और अपने परिवारों के पास लौट आएं. उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरेंडर करने वालों को सरकार की पुनर्वास नीति के तहत सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन दिया जाएगा.
पुलिस चीफ ने आंकड़ों के जरिए अपनी बात को साबित किया. उन्होंने बताया कि पिछले दो सालों में तेलंगाना सरकार की नीतियों से प्रभावित होकर 588 माओवादी नेताओं और कैडर ने हथियार डाले हैं और अब वे नॉर्मल जिंदगी जी रहे हैं. ये 588 लोग अब जंगलों की खाक छानने के बजाय अपने गांवों में परिवारों के साथ खुशी से रह रहे हैं. तेलंगाना की पॉलिसी इतनी असरदार है कि पड़ोसी राज्यों के माओवादी भी यहां आकर सरेंडर कर रहे हैं. यह सरकार की विश्वसनीयता और सहानुभूति की जीत है.
बचे हुए ’15’ की तलाश: DGP का सीधा संदेश
डीजीपी ने विशेष रूप से तेलंगाना के उन 15 बचे हुए अंडरग्राउंड कैडरों को संबोधित किया जो अभी भी फरार हैं. उन्होंने अपील करते हुए कहा, “हम एक सच्ची और नई अपील करते हैं कि आप आगे आएं. बदलता वक्त हिंसा का नहीं, बल्कि विकास का है.” जो लोग सरेंडर करेंगे, उन्हें तुरंत सरकारी मदद, पैसा और कानूनी सुरक्षा दी जाएगी. सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए कमिटेड है कि वे अपने कस्बों में आजादी और गरिमा के साथ रहें.
CM रेवंत रेड्डी का विजन: बंदूक नहीं, विकास चाहिए
यह अपील मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी (A. Revanth Reddy) के उस विजन का हिस्सा है, जिसमें उन्होंने माओवादियों से राज्य के विकास में भागीदार बनने को कहा था. पुलिस का मानना है कि लंबे समय से चली आ रही चुनौतियों का समाधान गोली से नहीं, बल्कि शांतिपूर्ण तरीकों से ही हो सकता है.
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राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें


