इस खेती से किसान बन गया मालामाल, छप्परफाड़ हो रही कमाई, नौकरी भी इसके आगे फेल!

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इस खेती से किसान बन गया मालामाल, छप्परफाड़ हो रही कमाई, नौकरी भी इसके आगे फेल!

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सहारनपुर के बेहट क्षेत्र के गांव खुर्र्मपुर के युवा किसान नितिन कुमार सैनी ने पारंपरिक खेती छोड़ औषधीय फसल ‘खुरसवेनिय अजवाइन’ (Ammi visnaga) की खेती शुरू की है. इस पौधे के फूल 80–100 रुपये किलो और बीज 120 रुपये किलो से अधिक में बिकते हैं. एक बीघा में 2–2.5 क्विंटल उत्पादन से दोहरी आय होती है. नितिन का कहना है कि यह खेती नौकरी से अधिक लाभदायक साबित हो रही है.

सहारनपुर: सहारनपुर के युवा कुछ अलग प्रकार की खेती करना काफी पसंद कर रहे हैं. पढ़ाई करने के साथ-साथ युवा अपनी खेती से जुड़े हुए हैं. यही कारण है कि नौकरी के पीछे नहीं बल्कि अपनी जमीन में फसलों को उगाकर नौकरी से ज्यादा पैसा कमा रहे हैं. उसी कड़ी में सहारनपुर की बेहट विधानसभा के छोटे गांव खुर्र्मपुर के रहने वाले नितिन कुमार सैनी एग्रीकल्चर की पढ़ाई करने के बाद अपने पिताजी के साथ औषधीय पौधों की खेती करना काफी पसंद कर रहे हैं, लेकिन इस बार उन्होंने औषधीय पौधों में कुछ अलग प्रकार के पौधे लगाए हैं, जिसका नाम खुरसवेनिय अजवाइन है.

जिसका पूरे तरीके से इस्तेमाल होम्योपैथिक और आयुर्वेदिक दवाई बनाने में किया जाता है. इस पौधे की खास बात यह है कि इस पौधे पर आने वाला फूल भी 80 से ₹100 किलो बिकता है, जबकि फूल से बनने वाला फल भी ₹120 किलो से अधिक दाम पर जाता है. यानी कि एक ही पौधे से दो तरह की इनकम नितिन सैनी ले रहे हैं. नितिन कुमार परंपरागत खेती से हटकर अपने पिता के साथ इस तरह की खेती कर अन्य युवा किसानों को भी प्रेरणा दे रहे हैं. साथ ही नितिन सैनी के साथ अन्य गांव के किसान भी इस तरह की खेती की ओर लगातार अग्रसर हो रहे हैं, जो कि किसानों की आय को तेजी से बढ़ने का काम कर रही है.

यह फसल किसानों की आय को कर देती है तीन गुना

युवा किसान नितिन सैनी ने लोकल 18 से बात करते हुए बताया कि वह सहारनपुर के छोटे से गांव खुर्र्मपुर के रहने वाले हैं. उन्होंने इस बार अपने खेत में एक अलग तरह की फसल लगाई है, जिसका नाम है खुरसवेनिय अजवाइन (आइसोमर्स निगरा) और इससे जो सीड्स निकलते हैं उसको बोलते हैं अम्युसनागा. इसका पूरे तरीके से मेडिसिन में इस्तेमाल किया जाता है. जिसको अक्टूबर महीने में लगाया जाता है, जबकि मार्च महीने के अंतिम सप्ताह में इसको काट दिया जाता है. प्रत्येक वर्ष हम इसको लगभग एक बीघा खेत में लगाते हैं, जिससे यह दो से ढाई क्विंटल निकल जाती है. जबकि इस पौधे पर आने वाले पंचांग का रेट 70 से 80 रुपए किलो रहता है. जबकि इस पर आने वाले सीड्स का दाम ₹120 किलो से ऊपर रहता है. यानी कि एक ही पौधे से दो तरह की फैसले निकल जाती है. इसकी खेती हम पिछले 4 साल से करते आ रहे हैं. इसका भी हिमाचल से हम लोगों ने मंगवाया था. जहां पर मैं जॉब करता हूं वहां पर मुझे 15 से 20 हजार रुपये मिलते हैं, लेकिन उस जॉब से मैं बिल्कुल भी खुश नहीं हूं. लेकिन अब मैं अपने पिताजी के साथ इस औषधीय पौधों की खेती कर रहा हूं जहां पर मैं खुद का मालिक हूं और नौकरी से ज्यादा इनकम ले रहा हूं. इस पौधे का इस्तेमाल आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक दवाई बनाने में किया जाता है.

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Lalit Bhatt

पिछले एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं. 2010 में प्रिंट मीडिया से अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत की, जिसके बाद यह सफर निरंतर आगे बढ़ता गया. प्रिंट, टीवी और डिजिटल-तीनों ही माध्यमों म…और पढ़ें



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