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Sultanpur latest news : मौसम बदलते ही पशुओं में खुरपका और मुंहपका बीमारी का खतरा बढ़ गया है. संक्रमण तेजी से फैलने के कारण किसानों की चिंता बढ़ी है. सुल्तानपुर में टीकाकरण अभियान चल रहा है और सरकार ने 2030 तक इस बीमारी को पूरी तरह समाप्त करने का लक्ष्य तय किया है.मौसम बदलते ही पशुओं में खुरपका और मुंहपका बीमारी का खतरा बढ़ गया है. संक्रमण तेजी से फैलने के कारण किसानों की चिंता बढ़ी है. सुल्तानपुर में टीकाकरण अभियान चल रहा है और सरकार ने 2030 तक इस बीमारी को पूरी तरह समाप्त करने का लक्ष्य तय किया है.
सुल्तानपुर : फरवरी में सर्दी के समापन और गर्मी की आहट के साथ पशुओं में खुरपका और मुंहपका बीमारी का खतरा बढ़ गया है. संक्रमण फैलने से किसानों की चिंता बढ़ रही है. सुल्तानपुर में टीकाकरण अभियान चल रहा है. सरकार ने 2030 तक इस बीमारी को पूरी तरह समाप्त करने का लक्ष्य तय किया है.
संक्रमणीय बीमारी है खुरपका और मुंहपका
कृषि विज्ञान केंद्र सुलतानपुर में कार्यरत पशु वैज्ञानिक डॉ दिवाकर कुमार ने बताया कि खुरपका और मुंहपका एक अत्यंत संक्रामक बीमारी है. यदि एक पशु संक्रमित हो जाए तो आसपास के अन्य पशुओं में तेजी से फैल सकती है. कई बार पूरे गांव के मवेशी इसकी चपेट में आ जाते हैं. उन्होंने बताया कि समय पर उपचार न मिलने पर यह बीमारी गंभीर रूप ले सकती है. पशुओं के मुंह में छाले, लार टपकना और खुरों में घाव इसके प्रमुख लक्षण हैं. इससे दूध उत्पादन भी प्रभावित होता है और पशु कमजोर हो जाते हैं.
बदलते मौसम में क्यों बढ़ता है खतरा
मौसम में बदलाव के दौरान पशुओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है. सर्दी से गर्मी की ओर संक्रमण के समय वातावरण में वायरस और बैक्टीरिया तेजी से सक्रिय हो जाते हैं. यही कारण है कि इस अवधि में संक्रमण फैलने की संभावना अधिक रहती है. नमी और गंदगी भी बीमारी को बढ़ावा देती है. यदि पशुओं का आवास साफ न हो तो संक्रमण तेजी से फैल सकता है. इसलिए इस समय विशेष सावधानी जरूरी है.
बीमारी से बचाव के उपाय
पशु वैज्ञानिक के अनुसार सबसे पहला कदम है स्वच्छता. पशुओं के तबेले की रोज सुबह और शाम सफाई करें. गंदगी, सड़ी हुई घास या पानी जमा न होने दें. इससे बैक्टीरिया और वायरस पनपने का खतरा कम होता है. बीमार पशु को स्वस्थ पशुओं से अलग रखें. नियमित टीकाकरण कराना बेहद जरूरी है. सुल्तानपुर में इस समय सरकारी टीकाकरण कार्यक्रम चल रहा है. सरकार का लक्ष्य है कि वर्ष 2030 तक खुरपका और मुंहपका बीमारी को पूरी तरह समाप्त किया जाए.
चिकित्सीय उपचार क्या है
यदि पशु में मुंहपका के लक्षण दिखें तो ग्लिसरीन में बोरिक एसिड पाउडर मिलाकर दिन में तीन से चार बार जीभ पर लगाएं. इससे मुंह के छाले ठीक होने में मदद मिलती है. खुरों में घाव या संक्रमण होने पर बीटाडीन क्रीम का प्रयोग किया जा सकता है. हालांकि गंभीर स्थिति में तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए.
किसानों के लिए सावधानी जरूरी
खुरपका और मुंहपका बीमारी न केवल पशुओं के स्वास्थ्य बल्कि किसानों की आर्थिक स्थिति को भी प्रभावित करती है. समय पर टीकाकरण, स्वच्छता और शुरुआती उपचार से इस बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है. बदलते मौसम में सतर्क रहना ही सबसे बड़ा बचाव है.

