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रोहिणी साइबर पुलिस ने सिम पोर्टिंग से ठगी करने वाले सचिन कुमार गुप्ता और नितिन कुमार गुप्ता को गिरफ्तार किया, महिला के बैंक खातों से लाखों की धोखाधड़ी उजागर हुई.
क्राइम न्यूज. दिल्ली के रोहिणी जिले में साइबर पुलिस ने ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी के एक मामले का खुलासा करते हुए सिम पोर्टिंग के जरिए ठगी करने वाले दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है. पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से अपराध में इस्तेमाल किया गया एक मोबाइल फोन और एक एटीएम कार्ड भी बरामद किया है. यह कार्रवाई रोहिणी साइबर थाना पुलिस ने तकनीकी जांच और गुप्त सूचना के आधार पर की.
पुलिस के अनुसार, सेक्टर-6 रोहिणी निवासी एक महिला ने साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई थी कि जनवरी 2026 में उनके साथ ऑनलाइन ठगी हुई है. शिकायत में बताया गया कि वह 21 जनवरी को अपने बेटे के साथ कानपुर एक धार्मिक कार्यक्रम में गई थीं. 22 जनवरी को दिल्ली लौटते समय ट्रेन यात्रा के दौरान उनकी मुलाकात एक युवक से हुई, जिसने खुद को सचिन गुप्ता निवासी बुराड़ी बताया. उसके साथ एक युवती भी थी जिसे उसने अपनी भाभी बताया.
यात्रा के दौरान आरोपियों ने महिला और उसके बेटे का भरोसा जीत लिया और कॉल करने के बहाने उनके मोबाइल फोन कुछ समय के लिए ले लिए. बाद में फोन वापस कर दिए गए, लेकिन अगले ही दिन दोनों मोबाइल नंबर अचानक बंद हो गए. कुछ दिनों बाद महिला के क्रेडिट कार्ड से 20,550 रुपये, 2,627 रुपये और 25,687 रुपये के तीन अनधिकृत ट्रांजैक्शन हो गए.
मामले की गंभीरता को देखते हुए इंस्पेक्टर प्रवीण चौहान के नेतृत्व में एक विशेष टीम बनाई गई. जांच में पता चला कि पीड़ितों के मोबाइल नंबर धोखाधड़ी से जियो नेटवर्क में पोर्ट कराए गए थे और नए सिम नितिन कुमार गुप्ता के नाम पर जारी हुए थे. पुलिस ने मनी ट्रेल खंगालते हुए पाया कि 20 हजार रुपये आरोपी के कोटक महिंद्रा बैंक खाते में ट्रांसफर हुए, जिन्हें उसी दिन एटीएम से निकाल लिया गया. वहीं 25 हजार रुपये एक महिला के एनएसडीएल पेमेंट बैंक खाते में भेजे गए.
तकनीकी विश्लेषण के आधार पर पुलिस टीम बुराड़ी के नाथूपुरा इलाके पहुंची और छापेमारी कर दो सगे भाइयों सचिन कुमार गुप्ता (26 वर्ष) और नितिन कुमार गुप्ता (23 वर्ष) को गिरफ्तार कर लिया. पूछताछ में दोनों ने अपराध कबूल कर लिया. उनकी निशानदेही पर एक मोटोरोला G34 मोबाइल फोन और एटीएम कार्ड बरामद किया गया.
जांच में सामने आया कि मुख्य आरोपी सचिन पहले जियो स्टोर में काम कर चुका था और उसे सिम जारी करने की प्रक्रिया की जानकारी थी. उसने इसी जानकारी का गलत इस्तेमाल किया. उसने पीड़ितों के फोन से पोर्टिंग रिक्वेस्ट जनरेट कर यूपीसी कोड नोट कर लिए और मैसेज डिलीट कर दिए ताकि किसी को शक न हो. बाद में नए सिम लेकर बैंकिंग ऐप्स तक पहुंच बनाई और ओटीपी के जरिए ट्रांजैक्शन कर डाले.
पुलिस के अनुसार, सचिन बीएससी का ड्रॉपआउट है और उबर के साथ काम कर रहा था, जबकि उसका भाई नितिन बीकॉम ग्रेजुएट है और मोटरसाइकिल शोरूम में नौकरी करता था. फिलहाल पुलिस ठगी की बाकी रकम की रिकवरी और मामले की आगे की जांच कर रही है. अधिकारियों ने लोगों से यात्रा के दौरान अनजान लोगों को मोबाइल फोन देने से बचने और संदिग्ध गतिविधि होने पर तुरंत शिकायत दर्ज कराने की अपील की है.
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Anoop Kumar Mishra is associated with News18 Digital for the last 6 years and is working on the post of Assistant Editor. He writes on Health, aviation and Defence sector. He also covers development related to …और पढ़ें

