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SDM Chaiwala Kota Success Story: कोटा में 12 सरकारी परीक्षाओं में असफल होने के बाद झालावाड़ के गोपाल सिंह ने ‘एसडीएम चायवाला’ स्टॉल खोला. आज वह चाय और वडा पाव बेचकर महीने के 1 लाख रुपये कमा रहे हैं और कोचिंग छात्रों को जीवन में हार न मानने के लिए प्रेरित कर रहे हैं.
SDM Chaiwala Kota Success Story: शिक्षा नगरी कोटा के जवाहर नगर इलाके में एलेन समुन्नत बिल्डिंग के सामने इन दिनों “एसडीएम चायवाला” के नाम से मशहूर गोपाल सिंह चर्चा का विषय बने हुए हैं. कभी प्रशासनिक अधिकारी बनने का सपना देखने वाले गोपाल आज अपनी चाय और वडा पाव की स्टॉल से करीब ₹1,00,000 प्रतिमाह की कमाई कर रहे हैं. उनका मानना है कि यदि वे एसडीएम बन भी जाते तो शुरुआती वेतन करीब ₹56,000 के आसपास होता लेकिन ईश्वर ने उनके लिए उद्यमिता का एक बेहतर और स्वतंत्र रास्ता चुना था. झालावाड़ निवासी गोपाल सिंह ने एलडीसी, पटवारी, ग्राम सेवक, कांस्टेबल, वनपाल और आरएएस (RAS) सहित करीब 10 से 12 प्रतियोगी परीक्षाएं दीं लेकिन अंतिम चयन नहीं हो सका.
लगातार असफलताओं और कोरोना काल में बिगड़ी आर्थिक स्थिति ने गोपाल को हताश जरूर किया पर उन्होंने हार नहीं मानी. वर्ष 2022 में उन्होंने जवाहर नगर में “एसडीएम चायवाला” नाम से अपनी स्थायी स्टॉल की शुरुआत की. गोपाल का कहना है कि अगर वह अधिकारी बन जाते तो सरकारी नियमों और रेगुलेशन के दायरे में रहकर नौकरी करनी पड़ती लेकिन आज वह स्वयं के व्यवसाय के मालिक हैं. उनका सपना एक सम्मानजनक जीवन, घर और गाड़ी का था जिसे उन्होंने अपने छोटे से स्टार्टअप के जरिए सच कर दिखाया है. वह मानते हैं कि हर असफलता असल में एक नए और बड़े रास्ते की शुरुआत होती है.
स्वाद के साथ परोस रहे हैं मोटिवेशन
आज उनकी चाय और वडा पाव कोटा के कोचिंग छात्रों के बीच बेहद लोकप्रिय हो चुके हैं. गोपाल सिर्फ स्वाद ही नहीं बल्कि संघर्ष कर रहे छात्रों को मोटिवेशन भी परोसते हैं. वह दिनभर छात्रों के बीच रहकर उन्हें हताश न होने और बार-बार प्रयास करने की प्रेरणा देते हैं. कोटा में बढ़ते दबाव के बीच वह छात्रों को सलाह देते हैं कि कोई भी गलत कदम उठाने से पहले अपने माता-पिता का चेहरा जरूर याद करें. उनका सुझाव है कि पढ़ाई के साथ-साथ खाली समय में कोई न कोई छोटा काम जरूर करना चाहिए ताकि छात्र आर्थिक रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बन सकें.
आत्मनिर्भरता की नई मिसाल
गोपाल सिंह का मानना है कि एक परीक्षा में असफलता जिंदगी का अंत नहीं होती है. आज जवाहर नगर में उनकी दुकान सिर्फ एक चाय का ठेला नहीं बल्कि युवाओं के लिए हौसले और आत्मनिर्भरता की एक जीती-जागतिक मिसाल बन चुकी है. वह उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा हैं जो सरकारी नौकरी न मिलने पर खुद को हारा हुआ महसूस करते हैं. गोपाल की कहानी यह संदेश देती है कि यदि इंसान में मेहनत करने का जज्बा हो तो वह चाय के स्टॉल से भी उस सम्मान और आय को प्राप्त कर सकता है जिसकी वह कल्पना करता था.
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Vicky Rathore is a multimedia journalist and digital content specialist with 8 years of experience in digital media, social media management, video production, editing, content writing, and graphic, A MAJMC gra…और पढ़ें


