क्या होता है 9 to 5 का मतलब? 99% लोगों को पता है गलत जवाब, क्या आप जानते हैं सही आंसर

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आपने अक्सर लोगों के मुंह से 9 टू 5 सुना होगा. ये अक्सर लोग जॉब की टाइमिंग को लेकर बोलते है. लेकिन क्या आपको इसका मतलब पता है? ज्यादातर लोग हां कहेंगे लेकिन उनमें से ज्यादातर का जवाब गलत होगा.

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9 टू 5 सुबह नौ से शाम के 5 बजे तक की शिफ्ट नहीं होती (इमेज- फाइल फोटो)

आज के दौर में “9 to 5” सुनते ही ज्यादातर लोगों के दिमाग में यही आता है– सुबह 9 बजे ऑफिस पहुंचना और शाम 5 बजे घर लौटना. यानी ठीक 8 घंटे की जॉब. लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये समझदारी 99% लोगों में गलत है? हां, ये एक आम मिथक है जो सालों से चला आ रहा है.

असल में “9 to 5” का मतलब है रोजाना 9 घंटे काम और हफ्ते में 5 दिन. इसमें लंच ब्रेक, चाय-कॉफी के छोटे ब्रेक और अन्य ब्रेक्स शामिल हैं, जबकि असली प्रोडक्टिव वर्क टाइम करीब 8 घंटे रहता है. ये फुल-टाइम जॉब का स्टैंडर्ड सिंबल है, जो अमेरिका से शुरू होकर पूरी दुनिया में फैल गया.

इसकी शुरुआत कैसे हुई?
इतिहास में वापस चलें तो 19वीं सदी में मजदूर 10-16 घंटे रोजाना, कभी-कभी 6-7 दिन काम करते थे. फैक्टरियां, खदानें सब जगह यही हाल था. फिर लेबर यूनियंस ने “8 घंटे काम, 8 घंटे आराम, 8 घंटे अपनी मर्जी” का नारा दिया. 1886 में हेमार्केट रायट जैसे आंदोलनों के बाद धीरे-धीरे बदलाव आया. 1926 में हेनरी फोर्ड ने अपनी कंपनी में 40 घंटे वीक (5 दिन x 8 घंटे) लागू किया, जो क्रांतिकारी था. फिर 1938 में अमेरिकी राष्ट्रपति फ्रैंकलिन डी. रूजवेल्ट ने Fair Labor Standards Act (FLSA) पास किया. इसमें वीकली 44 घंटे कैप था, ओवरटाइम पेमेंट और मिनिमम वेज सेट किया गया. 1940 में इसे 40 घंटे वीक पर फिक्स कर दिया गया. यानी स्टैंडर्ड 8 घंटे रोजाना x 5 दिन = 40 घंटे.

“9 to 5” नाम कैसे पड़ा?
लोग ऑफिस में सुबह 9 बजे आते थे, 1 घंटे लंच ब्रेक लेते थे और 5 बजे निकलते थे. कुल समय 9 घंटे ऑफिस में बिताते थे, लेकिन पेड वर्क 8 घंटे होता था. ये प्रैक्टिस अमेरिकी ऑफिस कल्चर में आम हो गई. 1980 में डॉली पार्टन का फेमस गाना “9 to 5” आया, जो फिल्म “9 to 5” का थीम सॉन्ग था. फिल्म में जेन फोंडा, लिली टॉमलिन और डॉली पार्टन तीन कामकाजी महिलाओं की कहानी थीं, जो बॉस के शोषण से तंग आकर बदला लेती हैं. गाना बिलबोर्ड पर नंबर 1 हिट हुआ, ऑस्कर नॉमिनेटेड हुआ और आज भी वर्कर्स का एंथम है. भारत में भी “9 to 5” बहुत पॉपुलर है. आईटी, कॉर्पोरेट, बैंकिंग, गवर्नमेंट जॉब्स में लोग यही कहते हैं – “मैं 9 to 5 करता हूं”. लेकिन यहां भी ज्यादातर लोग इसे मात्र काम के घंटे से जोड़ देते हैं जबकि असलियत में इसमें वीक के दिन भी शामिल हैं.

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Sandhya Kumari

न्यूज 18 में बतौर सीनियर सब एडिटर काम कर रही हूं. रीजनल सेक्शन के तहत राज्यों में हो रही उन घटनाओं से आपको रूबरू करवाना मकसद है, जिसे सोशल मीडिया पर पसंद किया जा रहा है. ताकि कोई वायरल कंटेंट आपसे छूट ना जाए.



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