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अमेठी के युवा कलाकार सौरभ मौर्य ने अपनी प्रतिभा और कड़ी मेहनत से कला के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई है. इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी करने के बाद सौरभ ने लखनऊ के मावा इंस्टीट्यूट से बीएफए कर अपनी कला को नया आयाम दिया है. उनकी पेंटिंग्स अब देश के सात राज्यों में ऑनलाइन बिक रही हैं और वे अपने अनुभव से आने वाली पीढ़ी को कला सिखाने का सपना देख रहे हैं.
अमेठी. प्रतिभा किसी पहचान की मोहताज नहीं होती, बस उसे सही मार्गदर्शन और कड़ी मेहनत की दरकार होती है. यही सिद्धांत अपनाकर अमेठी जिले के गौरीगंज तहसील के युवा कलाकार सौरभ मौर्य ने अपनी कला के दम पर अपनी पहचान बनाई है. इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी करने के बाद सौरभ ने न केवल अपना नाम रोशन किया, बल्कि अपनी पेंटिंग्स को देश के कोने-कोने तक पहुंचाया है.
लखनऊ के मावा इंस्टीट्यूट में निखर रही कला
सौरभ ने अपनी शुरुआती कला की रुचि कक्षा 9 में विकसित की. शुरुआत में उन्हें पेंटिंग बनाना मुश्किल लगता था, लेकिन उन्होंने मेहनत और लगन के साथ अपनी प्रतिभा को तराशा. वर्तमान में सौरभ लखनऊ स्थित (मावा) इंस्टीट्यूट से BFA (बैचलर ऑफ फाइन आर्ट्स) कर रहे हैं. यह संस्थान बच्चों और युवा कलाकारों को पेशेवर कला की ट्रेनिंग देने और उनकी कलात्मक प्रतिभा को निखारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है. सौरभ यहां नई तकनीकें सीखकर अपनी कला को नया आयाम दे रहे हैं.
अमेठी से सात राज्यों तक फैली सौरभ की कला
सौरभ की पेंटिंग्स अब केवल अमेठी या उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं हैं. उनकी कलाकृतियों की मांग ऑनलाइन माध्यम से देश के विभिन्न राज्यों में बढ़ रही है. वर्तमान में उनकी पेंटिंग्स उत्तर प्रदेश के सभी जिलों के साथ-साथ मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब, दिल्ली, बिहार और झारखंड में भी बड़े पैमाने पर खरीदी जा रही हैं.
1) उनकी विशेष पेंटिंग्स हफ्ते भर में ही हजारों रुपए में बिक जाती हैं.
2) सामान्य पेंटिंग्स की कीमत 1,000 से 20-30,000 रुपये तक होती है.
3) साल भर में यह उन्हें लाखों रुपए का लाभ देती हैं.
सफलता के पीछे परिवार का सहयोग
सौरभ अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और परिवार को देते हैं. लोकल 18 से बातचीत में उन्होंने बताया कि उनके परिवार ने हर कदम पर उनका समर्थन किया. परिवार की मदद और प्रोत्साहन ने उन्हें आर्टिस्ट बनने के रास्ते में मजबूती दी.
भविष्य के सपने और समाज सेवा
सौरभ का सपना है कि वह अपने अनुभव और कला के जरिए उन बच्चों को प्रशिक्षित करें, जो इस क्षेत्र में रुचि रखते हैं लेकिन सही मंच नहीं पा पाते. उनका मानना है कि कला सिर्फ शौक नहीं, बल्कि जीविका का सुंदर साधन भी बन सकती है. उन्होंने कहा: “कला मन की शांति है और जब इसे अपनों का साथ मिलता है, तो यह जीवन में सफलता और संतुष्टि दोनों दे सकती है.”
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पिछले 4 साल से मीडिया इंडस्ट्री में काम कर रही हूं और फिलहाल News18 में कार्यरत हूं. इससे पहले एक MNC में भी काम कर चुकी हूं. यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश की बीट कवर करती हूं. खबरों के साथ-साथ मुझे…और पढ़ें


