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गाज़ीपुर के पीजी कॉलेज की कैंटीन में देसी कटलेट आज भी छात्रों और प्रोफेसरों का फेवरेट है. आलू और मसालों से भरकर, सेवइयों में लपेटा और ताज़ा तला गया यह कटलेट सिर्फ स्वाद ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और हाइजीन का भरोसा भी देता है. आधुनिक स्नैक्स के बीच, यह देसी फास्ट फूड अपनी खास पहचान बनाए हुए है.
गाजीपुर. फास्ट फूड के इस दौर में, जहां बाज़ार चाइनीज़ और मोमोज़ से भरे हुए हैं, वहीं गाज़ीपुर के पीजी कॉलेज की कैंटीन में आज भी देसी कटलेट अपनी पहचान बनाए हुए है. यह वही कटलेट है, जो कभी शादी-विवाह और पारंपरिक आयोजनों में खास तौर पर परोसा जाता था. कॉलेज की कैंटीन में प्रोफेसर और छात्र इसे आज भी चाव से खाते नजर आते हैं. कैंटीन में पिछले 20 वर्षों से कटलेट बना रहे रसोइया अमित कुमार बताते हैं कि वे रोज़ ताज़ा कटलेट तैयार करते हैं, जिसकी कीमत ₹10 प्रति पीस है. उनके अनुसार, मेरा कटलेट शादी-विवाह वाले कटलेट से थोड़ा अलग होता है, क्योंकि इसमें सेवइयों का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे स्वाद और टेक्सचर दोनों बेहतर हो जाते हैं.
कैसे बनता है यह खास कटलेट
अमित कुमार बताते हैं कि सबसे पहले आलू उबालकर उसे कद्दूकस किया जाता है, इसमें ब्रेड क्रम्ब्स, अरारोट, नमक और हल्के मसाले मिलाए जाते हैं. इसके बाद लहसुन, हरी मिर्च और मूंगफली का तड़का तैयार किया जाता है, ठीक वैसे ही जैसे डोसे के मसाले के लिए किया जाता है. इस मसाले को आलू की लोई के अंदर भरकर कटलेट का आकार दिया जाता है. बाहर से सेवइयों में लपेटकर हल्के रिफाइंड तेल में तला जाता है, जिससे कटलेट कुरकुरा बनता है.
तुरंत बना तुरंत खाओ यही इसका असली स्वाद
कॉलेज की छात्रा सृष्टि पांडे, जो संगीत विषय की छात्रा हैं, बताती हैं कि कैंटीन का कटलेट इसलिए खास है क्योंकि यह पूरी तरह हाइजीनिक होता है और तुरंत बनाकर परोसा जाता है. आजकल कई जगह कटलेट या स्नैक्स पहले से बने होते हैं, जिन्हें फ्रिज में रखा जाता है. लेकिन यहां कटलेट ताज़ा बनता है और तुरंत खाया जाता है, यही इसकी सबसे बड़ी खासियत है. छात्रों का मानना है कि जहां बर्गर और चाउमिन कई दिनों तक रेफ्रिजरेट किए जाते हैं, वहीं कटलेट ताज़ा होने के कारण स्वाद और सेहत दोनों के लिहाज़ से बेहतर विकल्प है. छात्रा पायल वर्मा का कहना है कि कटलेट में सब्जियां और आलू शामिल होते हैं, इसलिए यह सेहत के लिए भी नुकसानदेह नहीं है, उन्होंने यह भी बताया कि शहरों में अब कटलेट कम ही देखने को मिलता है, जबकि ग्रामीण इलाकों में यह आज भी लोकप्रिय है. पीजी कॉलेज की कैंटीन का यह कटलेट न सिर्फ स्वाद की याद दिलाता है, बल्कि यह दिखाता है कि देसी फास्ट फूड आज भी आधुनिक स्नैक्स को टक्कर दे सकता है.
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नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें


