गोरखपुर की धरोहर: 300 साल पुराना मानसरोवर शिव मंदिर, जहां नाथ परंपरा और शिव भक्ति आज भी लेती है सांस

Date:


Last Updated:

मंदिर की देखरेख से जुड़े पवन कुमार त्रिपाठी बताते हैं कि, मानसरोवर शिव मंदिर सिर्फ पूजा का स्थान नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक धरोहर है. मंदिर का स्ट्रक्चर इस तरह से तैयार किया गया है कि, श्रद्धालु दर्शन के बाद परिसर में घूम सकते हैं और शांत वातावरण का अनुभव कर सकते हैं. आसपास के लोग भी यहां सुबह-शाम टहलने और मानसिक शांति के लिए आते हैं. 

गोरखपुर को मंदिरों और संत परंपरा की भूमि कहा जाता है. यहां मौजूद कई मंदिरों की कहानियां न सिर्फ धार्मिक आस्था से जुड़ी हैं, बल्कि वे शहर की सांस्कृतिक धरोहर भी मानी जाती हैं. इन्हीं में से एक है मानसरोवर शिव मंदिर, जो गोरखनाथ मंदिर के निकट स्थित है और करीब 300 साल पुराने इतिहास को अपने भीतर समेटे हुए है.

शिव भक्ति का प्रमुख केंद्र

मानसरोवर शिव मंदिर में भगवान शिव मुख्य रूप से विराजमान हैं. हर सोमवार को यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है. भक्त जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और पूजा-अर्चना के लिए दूर-दूर से पहुंचते हैं. विशेष रूप से महाशिवरात्रि के अवसर पर मंदिर की अलग ही मान्यता है. इस दिन मंदिर के कपाट ‘ब्रह्म मुहूर्त में ही खोल दिए जाते हैं और तड़के सुबह से ही भक्तों की लंबी कतार लग जाती है.

300 साल पुराना इतिहास

मंदिर के पुजारी कमलनाथ बताते हैं कि इस मंदिर का निर्माण करीब 300 वर्ष पहले उनवल नरेश राजा मानसिंह ने कराया था. मंदिर के साथ जुड़ा सरोवर भी उतना ही प्राचीन है, जो इसकी पहचान का अहम हिस्सा है. यही सरोवर मंदिर को ‘मानसरोवर’ नाम देता है और इसे एक विशिष्ट धार्मिक धरोहर बनाता है.

मानसरोवर शिव मंदिर का संबंध ‘नाथ संप्रदाय और गोरख पीठ से बेहद गहरा है. मंदिर की व्यवस्था और संचालन सालों से गोरखनाथ मंदिर के संरक्षण में होता आ रहा है. परंपरा के अनुसार, गोरख पीठ के महंत विजयदशमी के दिन मानसरोवर मंदिर परिसर में स्थित शिव मंदिर के साथ-साथ राम-जानकी, राधा-कृष्ण और दुर्गा मंदिर में विधिवत पूजा करते हैं, यह परंपरा आज भी जीवित है. गोरखनाथ मंदिर से निकलने वाली गोरक्ष पीठाधीश्वर की शोभायात्रा भी यहीं आकर संपन्न होती है, जहां विधि-विधान से पूजा-पाठ किया जाता है.

धरोहर के रूप में पहचान

मंदिर की देखरेख से जुड़े पवन कुमार त्रिपाठी बताते हैं कि, मानसरोवर शिव मंदिर सिर्फ पूजा का स्थान नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक धरोहर है. मंदिर का स्ट्रक्चर इस तरह से तैयार किया गया है कि, श्रद्धालु दर्शन के बाद परिसर में घूम सकते हैं और शांत वातावरण का अनुभव कर सकते हैं. आसपास के लोग भी यहां सुबह-शाम टहलने और मानसिक शांति के लिए आते हैं. मानसरोवर शिव मंदिर आज गोरखपुर की उस विरासत का प्रतीक है, जहां इतिहास, आस्था और नाथ परंपरा एक साथ जीवंत रूप में दिखाई देती है.

About the Author

Vivek Kumar

विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…और पढ़ें



Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

spot_imgspot_img

Popular

More like this
Related