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गोरखपुर जिले के किसान अब बिना मिट्टी के पानी में सब्जियां उगा सकते हैं. इसे हाइड्रोपोनिक तकनीक कहते हैं, जिसमें पौधों की जड़ें पोषक तत्वों से भरपूर पानी या कोकोपीट, पर्लाइट जैसे माध्यम में रखी जाती हैं. पोषक घोल में नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटाश, कैल्शियम आदि मिलाए जाते हैं और पानी का पीएच (5.5–6.5) और पोषक घनत्व नियंत्रित किया जाता है. यह प्रणाली री-सर्कुलेशन के जरिए पानी की बचत भी करती है.
गोरखपुर. जिले में किसान विदेशी सब्जियों की खेती आसानी से कर सकेंगे, बिना मिट्टी के पानी पर करने वाली यह खेती बेहद खास होगी. गोरखपुर यूनिवर्सिटी के एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट के प्रशिक्षण के जरिए यह पता चल सकेगा कि, कौन से सब्जी की खेती की जा सकेगी. दरअसल, बिना मिट्टी के खेती करने वाले इस सिस्टम को हाइड्रोपोनिक कहते हैं. हाइड्रोपोनिक तकनीक ऐसी आधुनिक खेती पद्धति है जिसमें मिट्टी के बिना केवल पानी और पोषक घोल की मदद से फसल उगाई जाती है. इसमें पौधों की जड़ों को सीधे पोषक तत्वों से भरपूर पानी में रखा जाता है या कोकोपीट, पर्लाइट जैसे माध्यम में लगाया जाता है. इसके काम करने का तरीका बेहद हाईटेक होता है, पहले पोषक घोल तैयार किया जाता है. फिर पानी में नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटाश, कैल्शियम आदि मिलाए जाते हैं. जिससे जड़ों को पोषण सीधे मिलता है, जड़ें मिट्टी की जगह पानी से पोषक तत्व लेती हैं. फिर पीएच और ईसी कंट्रोल, पानी का पीएच (5.5–6.5) और पोषक घनत्व नियंत्रित किया जाता है. जिससे री-सर्कुलेशन सिस्टम काम करता है, वही इस प्रक्रिया के जरिए पानी बार-बार इस्तेमाल होता है, जिससे पानी की बचत भी होती है.
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