घर वापसी का काम जल्दी… लखनऊ में RSS प्रमुख मोहन भागवत, बोले- तीन बच्चे पैदा करें हिंदू

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लखनऊः उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक कार्यक्रम के दौरान आरएसएस सरसंघ संचालक मोहन भागवत ने कहा कि हिंदुओं को कम से कम तीन बच्चें पैदा करना चाहिए. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि घर वापसी का काम जल्दी होना चाहिए. इसके अलावा RSS प्रमुख मोहन भागवत ने विदेशी शक्तियों से चेताते हुए कहा कि अमेरिका-चीन जैसे देशो में बैठे कुछ लोग हमारी सदभावना के विरुद्ध योजना बना रहे हैं. ऐसी विदेशी शक्तियों से हमें सावधान रहना होगा. एक दूसरे के प्रति अविश्वास समाप्त करना होगा. एक दूसरे दुःख दर्द में शामिल होना होगा.

इसके अलावा आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने यूजीसी के नए कानून पर भी टिप्पणी की है. मोहन भागवत ने कहा कि कानून सभी को मानना चाहिए. यदि कानून गलत हैं, तो बदलने का उपाय भी हैं. जातियां झगडे का कारण नहीं बनना चाहिए. जो नीचे गिरे हैं, उन्हें झुककर ऊपर उठाना पड़ेगा. सभी अपने हैं, ये भाव मन में होना चाहिए. संघर्ष से नहीं समन्वय से दुनिया आगे बढ़ती हैं. एक को दबाकर दूसरे को खड़ा करने का भाव नहीं होना चाहिए.

जो लोग हिंदू धर्म में लौटे उनका ख्याल रखना होगा- मोहन भागवत
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि हिंदू समाज को संगठित औऱ सशक्त होने की आवश्यकता है. हमको किसी से खतरा नहीं है, लेकिन सावधान रहना है. यह बात राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने लखनऊ के निराला नगर स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में सामाजिक सद्भाव बैठक में बोलते हुए कही. हिंदुओं की घटती जनसंख्या पर चिंता जताते हुए उन्होंने लालच और जबरदस्ती हो रहे धर्मांततरण पर रोक लगाने की बात कही. उन्होंने कहा कि घर वापसी का काम तेज होना चाहिए. जो लोग हिंदू धर्म में लौटें, उनका ध्यान भी हमें रखना होगा.

घुसपैठ पर मोहन भागवत ने जताई चिंता
बढ़ती घुसपैठ पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि घुसपैठियों को डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट करना होगा. उन्हें रोजगार नहीं देना है. उन्होंने कहा कि हिंदुओं के कम से कम तीन बच्चे होने चाहिए। वैज्ञानिकों के हवाले से उन्होंने कहा कि जिस समाज में औसतन तीन से कम बच्चे होते हैं, वह समाज भविष्य में समाप्त हो जाता है. यह बात हमारे परिवारों में नव दंपतियों को बताई जानी चाहिए. डॉ. भागवत ने कहा कि विवाह का उद्देश्य सृष्टि आगे चले, यह होना चाहिए, वासना पूर्ति नहीं. इसी भावना से कर्तव्य बोध आता है.

सद्भाव बढ़ाने की जरूरत
उन्होंने कहा कि सद्भाव ना रहने से भेदभाव होता है. हम सभी एक देश, एक मातृभूमि के पुत्र हैं. मनुष्य होने के नाते हम सब एक हैं. एक समय भेद नहीं था, लेकिन समय चक्र के चलते भेदभाव की आदत पड़ गई है, जिसे दूर करना होगा. उन्होंने कहा कि सनातन विचारधारा सद्भाव की विचारधारा है. जो विरोधी हैं, उन्हें मिटाना है, ऐसा हम नहीं मानते. एक ही सत्य सर्वत्र है। इस दर्शन को समझ कर आचरण में लाने से भेदभाव समाप्त होगा.

मातृशक्ति परिवार का आधार
सरसंघचालक जी ने कहा कि घर-परिवार का आधार मातृशक्ति है. हमारी परंपरा में कमाई का अधिकार पुरुषों को था, लेकिन खर्च कैसे हो, यह मातायें तय करती थी. मातृशक्ति विवाह के बाद दूसरे घर में आकर सभी को अपना बना लेती है. महिला को हमें अबला नहीं मानना है, वह असुर मर्दिनी है. हमने स्त्री की, प्रकृति की जो कल्पना की, वह बलशाली है। महिलाओं को आत्म संरक्षण का प्रशिक्षण होना चाहिए. पश्चिम में महिलाओं का स्तर पत्नी से है, हमारे यहां उन्हें माता माना जाता है। उनका सौंदर्य नहीं, वात्सल्य देखा जाता है.

कानून सभी को मानना है
यूजीसी गाइडलाइन को लेकर किए गए एक प्रश्न के उत्तर में सरसंघचालक जी ने कहा कि कानून सभी को मानना चाहिए. यदि कानून गलत है तो बदलने का उपाय भी है. जातियां झगड़े का कारण नहीं बनना चाहिए. समाज में अपनेपन का भाव होगा तो इस तरह की समस्या नहीं होगी. जो नीचे गिरे हैं, उन्हें झुक कर ऊपर उठाना पड़ेगा. सभी अपने हैं, यह भाव मन में होना चाहिए. संघर्ष से नहीं, समन्वय से दुनिया आगे बढ़ती है. एक को दबाकर दूसरे को खड़ा करने का भाव नहीं होना चाहिए.

विश्व का मार्गदर्शन करेगा भारत
डॉ. भागवत जी ने कहा कि भारत निकट भविष्य में विश्व को मार्गदर्शन देगा. विश्व की अनेक समस्याओं का समाधान भारत के पास ही है. डॉ. भागवत ने समाज की सज्जन शक्ति का आह्वान करते हुए कहा कि बस्ती स्तर पर सामाजिक सद्भाव से जुड़ी बैठकें नियमित होनी चाहिए. हम आपस में मिलेंगे तो गलतफहमियां दूर होंगी। इस प्रकार की बैठकों में रूढ़ियों से मुक्त होने पर चर्चा होनी चाहिए. जो समस्याएं सामने आएं, उनको दूर करने का प्रयास होना चाहिए, जो दुर्बल है, उनकी सहायता करना चाहिए.

विदेशी शक्तियों के प्रति चेताया
उन्होंने कहा कि अमेरिका और चीन जैसे देशों में बैठे कुछ लोग हमारी सद्भावना के विरुद्ध योजना बना रहे हैं. इससे हमें सावधान रहना होगा. एक दूसरे के प्रति अविश्वास समाप्त करना होगा. एक दूसरे के दुख दर्द में शामिल होना होगा. कार्यक्रम में सिक्ख,बौद्ध,जैन समाज के साथ ही रामकृष्ण मिशन, इस्कॉन, जय गुरुदेव, शिव शांति आश्रम, आर्ट ऑफ लिविंग, संत निरंकारी आश्रम, संत कृपाल आश्रम, कबीर मिशन, गोरक्षा पीठ, आर्य समाज, संत रविदास पीठ, दिव्यानंद आश्रम, ब्रह्म विद्या निकेतन, सहित विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधि सम्मिलित हुए.



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