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Success Story: शिवहर जिले की पवन देवी की कहानी गांव की चौखट से निकलकर आत्मनिर्भरता की मजबूत पहचान बनने तक का सफर है. कभी दाने-दाने को मोहताज परिवार की यह महिला आज अपने दम पर आजीविका चला रही है. सीमित संसाधन, आर्थिक तंगी और सामाजिक चुनौतियों के बीच पवन देवी ने हालात के आगे हार मानने के बजाय संघर्ष को अपना हथियार बनाया. उनका मानना था कि मेहनत और ईमानदारी से किया गया प्रयास कभी बेकार नहीं जाता. यही सोच उनके जीवन में बदलाव की पहली कड़ी बनी.
मीनापुर बल्हा पंचायत के वार्ड संख्या-12 की रहने वाली पवन देवी ने घर पर ही धागा बनाना शुरू किया. शुरुआत बेहद साधारण थी – कम पूंजी, सीमित साधन और बाजार तक पहुंच की कमी. बावजूद इसके उन्होंने अपने हाथों के हुनर को पहचान दी.
गांव में ही धागा बेचने से शुरुआत हुई, फिर धीरे-धीरे आसपास के इलाकों और जिले तक उनका काम पहुंचने लगा. कठिन हालातों में भी उन्होंने गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया, जो आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी ताकत बनी.
लगातार मेहनत और बेहतर गुणवत्ता के कारण पवन देवी के बनाए धागों की मांग बढ़ती चली गई. आज उनके उत्पाद जिले के बाहर तक पहुंच रहे हैं. इससे न सिर्फ उनकी आमदनी में बढ़ोतरी हुई है, बल्कि परिवार की आर्थिक स्थिति भी मजबूत हुई है.
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कभी जिन जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता था, आज वही जरूरतें आत्मसम्मान के साथ पूरी हो रही हैं. पवन देवी अब अपने परिवार के लिए सहारा ही नहीं, बल्कि निर्णय लेने वाली सशक्त महिला बन चुकी हैं.
पवन देवी की यह यात्रा सिर्फ एक महिला की सफलता की कहानी नहीं है, बल्कि यह उन तमाम ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों में भी कुछ कर दिखाने का हौसला रखती हैं.
उनकी कहानी यह संदेश देती है कि बड़े सपनों के लिए बड़े साधनों की नहीं, बल्कि मजबूत इरादों की जरूरत होती है. साधारण धागे से अपनी तकदीर की डोर बुनने वाली पवन देवी आज ग्रामीण आत्मनिर्भरता और महिला सशक्तिकरण की एक जीवंत मिसाल बन चुकी हैं.


