Last Updated:
Babai Plant Health Benefits: छतरपुर जिले में उगने वाला बबई नाम का एक साधारण दिखने वाला पौधा किसानों के लिए कमाई का जरिया बन गया है. इस पौधे के बीज 150 से 200 रुपये किलो तक बिकते हैं और उनसे औषधीय तेल बनाया जाता है. दर्द, घुटनों की तकलीफ और हड्डी रोग में इसका तेल उपयोग किया जाता है. गांवों में आंखों के इलाज के लिए इसकी पत्तियों का रस घरेलू नुस्खे के रूप में इस्तेमाल होता है. जानवर भी जिसे नहीं खाते, वही बबई पौधा अब किसानों के लिए फायदे का सौदा साबित हो रहा है.
बबई के फायदे: छतरपुर जिले के गांवों में एक ऐसा पौधा उगता है जिसे लोग आमतौर पर खरपतवार समझ लेते हैं. जानवर भी इसे नहीं खाते, इसलिए यह खेतों के किनारे यूं ही खड़ा रहता है. लेकिन गांव के किसान जानते हैं कि यह कोई मामूली घास नहीं, बल्कि कमाई का जरिया है. इसे यहां बबई कहा जाता है.
बरसात और ठंड के मौसम में यह पौधा अपने आप उग आता है. खेतों की मेड़ों पर हर साल दिखाई देता है. खास बात यह है कि किसान इसे उखाड़कर फेंकते नहीं, बल्कि बड़े काम की चीज समझकर संभाल कर रखते हैं.
बीज से निकलता है औषधीय तेल, बाजार में जबरदस्त मांग
गांव के किसान प्रेमचंद गिरि बताते हैं कि बबई के बीजों की सबसे ज्यादा कीमत होती है. पहले पौधे को काटकर छत या खलिहान में सुखाया जाता है. जब यह पूरी तरह सूख जाता है, तब इसे कूटकर बीज निकाले जाते हैं. इन्हीं बीजों से तेल निकाला जाता है, जिसका इस्तेमाल कई तरह के औषधीय तेल बनाने में होता है. जैसे दर्द का तेल, घुटनों के दर्द का तेल, वात रोग का तेल, हड्डी दर्द का तेल. बाजार में इसके बीज 150 से 200 रुपये किलो तक बिक जाते हैं. यानी जो पौधा खेत में खुद उगता है, वही किसानों के लिए अतिरिक्त कमाई का जरिया बन जाता है.
आंखों के लिए रामबाण माना जाता है
गांव के लोग बताते हैं कि अगर किसी की आंखें आ जाएं या लाल हो जाएं, तो बबई की पत्तियों का रस डालने से आराम मिलता है. सालों से गांव में यही देसी इलाज चलता आ रहा है. लोग इसे भरोसेमंद घरेलू नुस्खा मानते हैं. इतना ही नहीं, दीपावली के समय भी इस पौधे का उपयोग किया जाता है. घर-घर इसकी खुशबू या महक दी जाती है, जिसे शुभ माना जाता है.
जानवर भी नहीं खाते, फिर भी हर साल उगता है
इस पौधे की एक और खास बात है कि इसे जानवर हाथ तक नहीं लगाते. इसलिए यह खेतों के किनारे सुरक्षित रहता है. हर साल बरसात में अपने आप उग जाता है, लेकिन इसका बीज अपने आप नहीं झड़ता. यही वजह है कि किसान इसे संभालकर रखते हैं और समय आने पर बेचकर अच्छी कमाई कर लेते हैं. कुल मिलाकर, जिसे लोग बेकार समझते हैं, वही बबई गांव के किसानों के लिए छोटी सी मगर पक्की कमाई का जरिया बन चुका है.
About the Author
Shweta Singh, currently working with News18MPCG (Digital), has been crafting impactful stories in digital journalism for more than two years. From hyperlocal issues to politics, crime, astrology, and lifestyle,…और पढ़ें
Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.


