टमाटर क्यों फटते हैं? मिट्टी और पोषण से बनाएं फल मजबूत और चमकदार, जानिए आसान टिप्स

Date:


होमताजा खबरकृषि

क्यों ऊसर जमीन में टमाटर जल्दी फटते हैं? विशेषज्ञ से जानें पूरा कारण

Last Updated:

टमाटर की अच्छी पैदावार सिर्फ बीज और पानी पर निर्भर नहीं करती, बल्कि सही मिट्टी और पोषक तत्वों का संतुलन भी उतना ही महत्वपूर्ण है. ऊसर या बंजर जमीन में लवणता बढ़ जाने से फल फटने की समस्या आम हो जाती है. जिला उद्यान अधिकारी डॉ. पुनीत पाठक के अनुसार, इसका मुख्य कारण पानी का असंतुलन और बोरॉन की कमी है. सही दिशा-निर्देश अपनाकर आप टमाटर की फसल को सुरक्षित और उपजाऊ बना सकते हैं.

ख़बरें फटाफट

शाहजहांपुर. टमाटर की बेहतर पैदावार के लिए मिट्टी का चयन सबसे महत्वपूर्ण है. कृषि एक्सपर्ट का कहना है कि ऊसर या बंजर जमीन में टमाटर की रोपाई करने से फल फटने की समस्या तेजी से बढ़ती है. ऐसी मिट्टी में पोषक तत्वों का अभाव और लवणता अधिक होने के कारण पौधे तनाव में आ जाते हैं, जिससे फलों की बाहरी त्वचा कमजोर होकर फटने लगती है. किसान जलभराव और खराब गुणवत्ता वाली मिट्टी के बजाय उपजाऊ और संतुलित जल निकासी वाली भूमि का ही चुनाव करें ताकि फसल को नुकसान से बचाया जा सके.

जिला उद्यान अधिकारी डॉ. पुनीत कुमार पाठक ने बताया कि टमाटर में फल फटने के पीछे पानी का असंतुलन और बोरॉन की कमी मुख्य कारण हैं. लंबे सूखे के बाद अचानक तेज बारिश या सिंचाई से फलों के अंदरूनी हिस्से तेजी से बढ़ते हैं, जिससे छिलका फट जाता है. इसके समाधान के लिए किसानों को मिट्टी में 20 से 25 किलो बोरेक्स का प्रयोग करना चाहिए. साथ ही, फल बनते समय 0.25% बोरेक्स का दो से तीन बार छिड़काव करना चाहिए जो कि अत्यंत प्रभावी होता है. उचित प्रबंधन से किसान इस समस्या को पूरी तरह खत्म कर सकते हैं.

पोषक तत्वों का प्रबंधन 
टमाटर की फसल में बोरॉन एक सूक्ष्म पोषक तत्व है, जिसकी कमी से फल अपनी लचीलापन खो देते हैं. जब मिट्टी में बोरॉन का स्तर गिरता है, तो फलों की कोशिका भित्ति कमजोर हो जाती है और वे विकास के दौरान फटने लगते हैं. डॉ. पुनीत पाठक ने सुझाव देते हुए बताया कि केवल बाहरी छिड़काव ही नहीं, बल्कि बुवाई के समय मिट्टी का उपचार भी जरूरी है. सही मात्रा में बोरेक्स का इस्तेमाल करने से फसल की गुणवत्ता और बाजार मूल्य दोनों बेहतर होते हैं.

सिंचाई और जल निकासी का महत्व
मिट्टी और पोषण के अलावा, सिंचाई का तरीका भी फल फटने की दर को प्रभावित करता है. अनियंत्रित सिंचाई और मौसम में अचानक बदलाव के कारण पौधों में नमी का स्तर बिगड़ जाता है. किसानों को चाहिए कि वे ऊसर भूमि में खेती करने से बचें और खेत में नमी का एक समान स्तर बनाए रखें. सूखे के तुरंत बाद भारी सिंचाई न करें, बल्कि हल्की और नियमित सिंचाई को प्राथमिकता दें ताकि टमाटर के फल सुरक्षित और चमकदार बने रहें.

About the Author

Madhuri Chaudhary

पिछले 4 साल से मीडिया इंडस्ट्री में काम कर रही हूं और फिलहाल News18 में कार्यरत हूं. इससे पहले एक MNC में भी काम कर चुकी हूं. यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश की बीट कवर करती हूं. खबरों के साथ-साथ मुझे…और पढ़ें



Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

spot_imgspot_img

Popular

More like this
Related

अगरतला राजभाषा सम्मेलन में आयुर्वेद संस्थान की टीम ने निःशुल्क स्वास्थ्य जांच

होमताजा खबरDelhiदिल्ली से आयुष चिकित्सकों की टीम गई...