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भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील अभी पूरी भी नहीं हुई है और अमेरिकी कोर्ट ने टैरिफ को कैंसिल कर दिया है. भारत की मंशा अब इस डील को नए सिरे से आगे बढ़ाने की है. इसके लिए पहले ही डील की शर्तों में क्लॉज-8 का प्रावधान किया गया था. अब भारत इस क्लॉज का फायदा उठाकर डील को अपनी शर्तों पर बढ़ाना चाहता है, लेकिन ट्रंप ने अभी से धमकियां देना शुरू कर दिया है.
अमेरिका-भारत ट्रेड डील में क्लॉज 8 से फायदा उठाया जा सकता है.
नई दिल्ली. भारत और अमेरिका के बीच बड़ी मशक्कत के बाद ट्रेड डील पर अंतरिम मुहर लगी थी और अभी डील फाइनल भी नहीं हुई कि नया ट्विस्ट आ गया. अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट ने पिछले दिनों ट्रंप के टैरिफ को निरस्त कर दिया और अब भारत के साथ डील भी नए सिरे से लागू करने पर मंथन शुरू हो गया है. पहले हुई डील में भारत ने एक क्लॉज जुड़वाया था, जिसका फायदा अब नए सिरे डील को परवान चढ़ाने में मिल सकता है. अमेरिकी कोर्ट ने भारत को वह हथियार दे दिया है, जिसका इस्तेमाल करके डील को अपने हित में पलटवाया जा सकता है.
पिछले दिनों भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर बातचीत के दौरान क्लॉज-8 रखा गया था. यह क्लॉज भारत ने रखवाया था, क्योंकि तब ट्रंप के टैरिफ पर अमेरिकी अदालत में मुकदमा चल रहा था. लिहाजा भारत ने अपने बचाव के लिए इस डील में क्लॉज-8 जुड़वाया था. अब जबकि अमेरिकी अदालत ने ट्रंप के टैरिफ को अवैध करार दे दिया है तो इस क्लॉज की जरूरत भी आन पड़ी है. भातर अब इस स्थिति में है कि वह क्लॉज-8 का फायदा उठाकर डील को नए सिरे से आगे बढ़ा सकता है. यह क्लॉज-8 अब भारत को इस डील में ज्यादा फायदेमंद स्थिति में रहने का मौका दे रहा है.
क्या है क्लॉज-8
भारत और अमेरिका की ट्रेड डील अंतरिम थी, जिसका मतलब था कि इसमें आगे बदलाव की गुंजाइश बनी हुई थी. यही वजह है कि भारत ने क्लॉज-8 का प्रावधान जुड़वाया था. क्लॉज-8 कहता है, ‘अगर किसी भी देश के टैरिफ में कोई बदलाव होता है तो दूसरा देश अपने सारे वायदे को बदल सकता है.’ भारत ने टैरिफ पर चल रहे मुकदमे को देखते हुए यह क्लॉज जुड़वाया था. अब जबकि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने टैरिफ को निरस्त कर दिया है तो भारत इस क्लॉज का फायदा उठाते हुए ट्रेड डील पर नई शर्तें लागू करा सकता है.
भारत को क्या होगा फायदा
अमेरिकी कोर्ट ने IEEPA के तहत ट्रंप के टैरिफ को गैरकानूनी करार दिया है, जिसके बाद ट्रंप ने 18 फीसदी के बजाय भारत पर 15 फीसदी टैरिफ लगा दिया. इसका मतलब है कि डील पूरी होने से पहले ही टैरिफ में बदलाव हो चुका है. लिहाजा भारत क्लॉज 8 का हवाला देकर अमेरिकी सामान पर टैरिफ वापस लगाने या फिर 500 अरब डॉलर के अमेरिकी सामान की खरीद जैसी शर्तों में बदलाव किया जा सकता है. हालांकि, अगर भारत ने ज्यादा सख्ती की तो पूरी डील ही अटक सकती है. फिलहाल दोनों तरफ से डील ऑन है.
पहले अमेरिका को ज्यादा था फायदा
- पहले हुई डील में अमेरिका को ज्यादा लाभ था, क्योंकि उसके सामान को भारतीय बाजार में आसान एंट्री मिल जाती है.
- भारत में अमेरिकी इंडस्ट्रियल गुड्स पर टैरिफ जीरो या बहुत कम करेगा.
- एग्री प्रोडक्ट्स जैसे सोराबम, ट्री नट्स, फ्रूट, सोयाबीन ऑयल, वाइन, स्पिरिट्स आदि पर भी टैरिफ कम रहता है.
- भारत पर अगले 5 साल में अमेरिका से एनर्जी, एयरक्राफ्ट, प्रीशियस मेटल्स, टेक प्रोडक्ट्स, कोकिंग कोल आदि खरीदने का दबाव है, जिससे अमेरिकी एक्सपोर्ट और जॉब्स को बढ़ावा मिलेगा.
- अमेरिका का भारत के साथ ट्रेड डेफिसिट घटेगा. रूल्स ऑफ ओरिजिन से सिर्फ अमेरिका-भारत प्रोडक्ट्स को ही फायदा मिलेगा.
ट्रंप अभी से देने लगे धमकी
राष्ट्रपति ट्रंप को भी इस क्लॉज के बारे में बखूबी पता है कि भारत अब इस डील पर ज्यादा फायदे की स्थिति में पहुंच सकता है. यही वजह है कि ट्रंप अभी से बिना नाम लिए भारत को धमकियां भी देने लगे हैं. ट्रंप ने कहा है कि अगर डील से पीछे हटे तो अंजाम भुगतना होगा. अमेरिकी कोर्ट का फैसला आने के बाद भारत ने फिलहाल ट्रेड डील पर बातचीत होल्ड कर दिया है. अब देखना ये है कि भारत इस नए अवसर का फायदा आखिर कैसे उठा सकता है.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें


