तिरंगा थाली से दूर भगाएं बीमारी…भोजन करना, केवल पेट भरना नहीं, शरीर के लिए पोषण जरूरी, शेफाली रानी का तरीका

Date:


जमशेदपुर. ग्रामीण इलाकों में अक्सर देखा जाता है कि लोगों का रोजमर्रा का भोजन सीमित होता है. ज्यादातर घरों में सुबह-शाम चावल, आलू या नमक-रोटी से ही दिन गुजर जाता है. पेट तो भर जाता है, लेकिन शरीर को जरूरी विटामिन, प्रोटीन और खनिज नहीं मिल पाते. इसी वजह से बच्चों में कमजोरी, महिलाओं में खून की कमी और बुजुर्गों में जल्दी थकान जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं. ऐसे माहौल में घाटशिला प्रखंड की रहने वाली शेफाली रानी ने पोषण के प्रति जागरूकता फैलाने की पहल की है.

तिरंगा भोजन, शरीर के लिए जरूरी
शेफाली रानी ने विशेष प्रशिक्षण लेकर तिरंगा भोजन का तरीका सीखा और अब वह गांव-गांव जाकर लोगों को समझा रही हैं कि शरीर को सिर्फ पेट भरने वाला नहीं, बल्कि संतुलित भोजन चाहिए. उनका कहना है कि महंगा खाना जरूरी नहीं, सही संयोजन जरूरी है. घर के आसपास मिलने वाली सस्ती और स्थानीय चीजों से भी पूरा पोषण पाया जा सकता है. वह महिलाओं की बैठकों, आंगनबाड़ी केंद्रों और स्कूलों में जाकर बच्चों और माताओं को संतुलित थाली बनाना सिखाती हैं.

तीन भागों में बंटा है भोजन
तिरंगा भोजन को उन्होंने तीन हिस्सों में बांटा है – रक्षा दायक, ऊर्जा दायक और वृद्धि दायक भोजन. रक्षा दायक भोजन हरे रंग का होता है. इसमें पत्तेदार साग-सब्जियां जैसे पालक, सरसों, मेथी, कोचई, सहजन के पत्ते, कद्दू, लौकी, अन्य हरी सब्जियां और पपीता शामिल हैं. यह भोजन शरीर को बीमारियों से बचाने और खून की कमी दूर करने में मदद करता है. शेफाली बताती हैं कि हरी सब्जियां रोज थोड़ी मात्रा में खाने से बच्चों की आंखें और त्वचा स्वस्थ रहती हैं और महिलाओं की कमजोरी भी कम होती है.

इस तरह का भोजन देता है ताकत
दूसरा है ऊर्जा दायक भोजन, जिसे सफेद या हल्के रंग का भोजन कहा गया है. इसमें चावल, गेहूं, मक्का, सूजी, चूड़ा, आलू, शकरकंद और मूली जैसे खाद्य पदार्थ शामिल हैं. यह भोजन शरीर को काम करने की ताकत देता है. खेतों में काम करने वाले मजदूरों और मेहनतकश लोगों के लिए यह जरूरी है, क्योंकि यही शरीर को तुरंत ऊर्जा देता है और दिनभर काम करने की क्षमता बढ़ाता है.

यह बनाता है शरीर को मजबूत
तीसरा हिस्सा है वृद्धि दायक भोजन, जो शरीर की बनावट और ताकत बढ़ाता है. इसमें अरहर, मूंग, मसूर, चना, राजमा, लोबिया जैसी दालें, साथ ही दूध, अंडा और सोयाबीन शामिल हैं. शेफाली समझाती हैं कि बच्चों की लंबाई और वजन बढ़ाने तथा मांसपेशियों को मजबूत बनाने के लिए प्रोटीन जरूरी है. अगर रोज थोड़ी मात्रा में दाल भी खाई जाए तो शरीर मजबूत बन सकता है.

केवल पेट भरना नहीं है भोजन
शेफाली रानी का संदेश साफ है – अमीर या गरीब, हर परिवार संतुलित भोजन अपना सकता है. बस थाली में तीनों हिस्से शामिल होने चाहिए – हरा यानी रक्षा, सफेद या पीला यानी ऊर्जा और दाल या प्रोटीन यानी वृद्धि. उनके प्रयास से कई गांवों में महिलाएं अब बच्चों को साग, दाल और फल देने लगी हैं. धीरे-धीरे लोगों की सोच बदल रही है और केवल पेट भरने से आगे बढ़कर शरीर को पोषण देने वाला भोजन अपनाया जा रहा है.



Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

spot_imgspot_img

Popular

More like this
Related