तृणमूल के मजबूत गढ़ कोलकाता पोर्ट में बदले सियासत के समीकरण, 20 साल में वापसी नहीं कर पाए वाम दल और कांग्रेस

Date:


होमताजा खबरदेश

TMC के मजबूत गढ़ में बदले समीकरण, 20 साल में वापसी नहीं कर पाए वाम और कांग्रेस

Last Updated:

कोलकाता पोर्ट विधानसभा सीट, जिसमें गार्डन रीच, मेटियाब्रुज, किडरपोर शामिल हैं, को टीएमसी का मजबूत गढ़ माना जाता है. फिरहाद हकीम यहां के प्रमुख नेता हैं. 2011 के विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस ने इस सीट पर जीत दर्ज की. इसके बाद 2016 और 2021 में भी मतदाताओं ने तृणमूल कांग्रेस पर ही भरोसा जताया.

ख़बरें फटाफट

Zoom

2006 तक कोलकाता पोर्ट क्षेत्र में कांग्रेस और वाम दलों का प्रभाव रहा.

कोलकाता. पश्चिम बंगाल की राजनीति में कभी ‘गार्डन रीच’ के नाम से जानी जाने वाली ‘कोलकाता पोर्ट’ विधानसभा सीट आज तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सबसे मजबूत गढ़ों में से एक मानी जाती है. यह क्षेत्र कोलकाता जिले में स्थित है और कोलकाता दक्षिण लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र का हिस्सा है. कोलकाता पोर्ट विधानसभा क्षेत्र में कोलकाता नगर निगम के वार्ड संख्या 75, 76, 78, 79, 80, 133, 134 और 135 शामिल हैं. यह पूरी तरह घनी आबादी वाला शहरी इलाका है, जहां ग्रामीण मतदाता नहीं के बराबर हैं.

हुगली के किनारे बसा यह विधानसभा क्षेत्र एक ऐसा शहरी गलियारा है, जो राज्य की आर्थिक और औद्योगिक धड़कन को अपने भीतर समेटे हुए है. इसमें कोलकाता के प्रमुख पोर्ट-साइड इलाकों में गार्डन रीच, मेटियाब्रुज, किडरपोर और खिदिरपुर के कुछ हिस्से आते हैं. एक तरीके से पोर्ट, शिपयार्ड, डॉक रोड और बड़े वेयरहाउस इसकी पहचान हैं.

मेटियाब्रुज अपने विशाल गारमेंट मार्केट के लिए जाना जाता है, जबकि गार्डन रीच शिपिंग और औद्योगिक गतिविधियों का केंद्र है. खिदिरपुर का सौ साल पुराना बाजार और औपनिवेशिक दौर की वास्तुकला आज भी इलाके की ऐतिहासिक पहचान को जीवित रखे हुए है.

भले ही यह इलाका एस्प्लेनेड (9 किमी) और अलीपुर (5 किमी) जैसे प्रमुख केंद्रों के करीब हो, लेकिन यहां की नागरिक समस्याएं आज भी चुनावी मुद्दा बनती हैं. ​सकरी गलियां, अत्यधिक भीड़भाड़ और जल निकासी की पुरानी समस्या यहां के निवासियों के लिए सिरदर्द है. एक तरफ आधुनिक फ्लाईओवर और बेहतर होते सिटी रोड लिंक हैं, तो दूसरी तरफ डॉक रोड और वेयरहाउस वाले इलाकों में आज भी बुनियादी ढांचे में सुधार की दरकार है.

इसका राजनीतिक इतिहास देखा जाए तो 2006 तक इस क्षेत्र में कांग्रेस और वाम दलों का प्रभाव रहा, लेकिन बीते दो दशकों में न तो कांग्रेस और न ही कम्युनिस्ट पार्टियां यहां अपनी जमीन दोबारा मजबूत कर पाईं. 2011 के विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस ने इस सीट पर जीत दर्ज की. इसके बाद 2016 और 2021 में भी मतदाताओं ने तृणमूल कांग्रेस पर ही भरोसा जताया, जिससे यह सीट पार्टी का मजबूत गढ़ बन गई. फिरहाद हकीम टीएमसी से यहां के कद्दावर नेता हैं.

About the Author

Rakesh Ranjan Kumar

राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें



Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

spot_imgspot_img

Popular

More like this
Related