थायराइड से हैं परेशान? इन 4 आसान योगासनों से हार्मोनल बैलेंस को करें ठीक, कुछ ही दिनों में दिखेगा असर!

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Yoga for hormonal balance : योग केवल व्यायाम नहीं, बल्कि शरीर को अंदर से ठीक करने की एक प्रक्रिया है. अगर आप नियमित रूप से इन आसनों का अभ्यास करते हैं, तो थायराइड(Thyroid) की समस्या को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है.

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योग शुरू करने से पहले एक बार अपने डॉक्टर या योग विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें.

Yoga for Thyroid: आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी और खराब लाइफस्टाइल का सबसे बुरा असर हमारे मेटाबॉलिज्म पर पड़ रहा है, और जिसकी वजह से आज हर तीसरे या चौथे युवाओं, खासतौर पर महिलाओं को ‘थायराइड’ की बीमारी से जूझना पड़ रहा है. इसे कंट्रोल करने के लिए दवाओं का सहारा लेना सबसे सेफ माना जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि दवाइयों के साथ-साथ अगर आप अपनी दिनचर्या में कुछ खास योगासनों को शामिल करें, तो आप अपनी थायराइड ग्रंथि (Gland) को फिर से एक्टिव कर सकते हैं? थायराइड फंक्शन को बेहतर बनाने और हार्मोनल बैलेंस के लिए The Yoga Institute के ये 4 योगेंद्र आसन रामबाण साबित हो सकते हैं:

1. योगेंद्र मत्स्यासन (The Fish Pose)-

यह आसन गले के हिस्से को खोलता है और थायराइड ग्रंथि को सीधा स्टिमुलेट (उत्तेजित) करता है.
  • कैसे करें: पीठ के बल लेट जाएं. पैरों को सुखासन या पद्मासन की मुद्रा में मोड़ें. अब अपने हाथों को सिर के नीचे ले जाकर कोहनियों को पकड़ें और हाथों को सिर के ऊपर जमीन पर टिका दें. इस मुद्रा में 1-2 मिनट तक लयबद्ध सांस लें.
    सावधानी: अगर आपको गंभीर गठिया, हृदय रोग, हर्निया या रीढ़ की हड्डी में चोट है, तो इसे न करें.

2. योगेंद्र भुजंगासन (Cobra Pose)-

 यह गर्दन के सामने के हिस्से में खिंचाव पैदा करता है, जो थायराइड के लिए बहुत फायदेमंद है.
  • कैसे करें: पेट के बल लेट जाएं, हथेलियों को छाती के पास रखें. सांस भरते हुए धीरे-धीरे सिर, गर्दन और फिर कंधों को ऊपर उठाएं. अपनी पीठ की मांसपेशियों का उपयोग करते हुए रीढ़ को पीछे की ओर मोड़ें. 30 सेकंड से 2 मिनट तक रुकें और फिर सांस छोड़ते हुए वापस आएं.
    सावधानी: हर्निया, हाई बीपी और गर्भवती महिलाएं इसे न करें. यह हाइपोथायराइड के लिए अच्छा है, लेकिन हाइपरथायराइड वालों को इससे बचना चाहिए.

3. योगेंद्र त्रिकोणासन-2 (Triangle Pose)- 

यह आसन शरीर में संतुलन बनाने के साथ-साथ पेट के अंगों और थायराइड को उत्तेजित करता है.
  • कैसे करें: पैरों के बीच 3-4 फीट की दूरी बनाकर खड़े हों. दाहिने पैर को बाहर की ओर मोड़ें. सांस छोड़ते हुए दाईं ओर झुकें और दाएं पैर के अंगूठे को छुएं. बायां हाथ छत की ओर सीधा रहे. ऊपर की ओर देखें और कुछ देर रुकें. यही प्रक्रिया दूसरी तरफ से भी दोहराएं.
    सावधानी: रीढ़ की हड्डी में समस्या, फ्रोजन शोल्डर या गंभीर पीठ दर्द वाले लोग इसे न करें.

4. योगेंद्र गरुड़ासन (The Eagle Pose)-

 यह एकाग्रता बढ़ाने के साथ-साथ कंधों और बाजुओं में खिंचाव पैदा करता है.
  • कैसे करें: सीधे खड़े हों. बाएं पैर को दाएं पैर के ऊपर से लपेट लें (जैसे रस्सी लपेटते हैं). इसी तरह बाएं हाथ को दाएं हाथ के नीचे से ले जाकर हथेलियों को आपस में जोड़ें. अपनी नजर एक बिंदु पर टिकाएं और संतुलन बनाएं.
    सावधानी: अगर घुटनों में दर्द, गठिया या चक्कर आने की समस्या (Vertigo) है, तो इस आसन से दूर रहें.
    योग केवल व्यायाम नहीं, बल्कि शरीर को अंदर से ठीक करने की एक प्रक्रिया है.

अगर आप नियमित रूप से इन आसनों का अभ्यास करते हैं, तो थायराइड की समस्या को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है. याद रखें, योग हमेशा खाली पेट और शांत मन से करें.

प्रो टिप: योग शुरू करने से पहले एक बार अपने डॉक्टर या योग विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें, खासकर अगर आपको कोई पुरानी चोट या गंभीर बीमारी है.

About the Author

Pranaty Tiwary

मैंने लेडी श्रीराम कॉलेज फॉर वूमन से अपनी ग्रेजुएशन और मिरांडा हाउस से मास्टर्स की डिग्री पूरी की है. पत्रकारिता करियर की शुरुआत दूरदर्शन(2009) से की, जिसके बाद दैनिक भास्कर सहित कई प्रमुख अख़बारों में मेनस्ट्र…और पढ़ें



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