Last Updated:
Success Story: सीकर के दिनेश भाकर ने इंजीनियरिंग के बाद नौकरी के बजाय घोड़ों के पालन और प्रशिक्षण को अपना करियर बनाया. उनके स्टड फार्म में ‘सूचेतक’ जैसे घोड़े हैं जिनकी कीमत 1.78 करोड़ रुपये तक लग चुकी है. राजस्थान और झारखंड में फैले उनके ‘दुर्गा स्टड फार्म’ ने उन्हें देशभर में एक सफल उद्यमी के रूप में पहचान दिलाई है.
सीकर. अगर इंसान अपने पैशन को पहचान ले और उसे कड़ी मेहनत से आगे बढ़ाए, तो वही पैशन एक दिन उसकी बड़ी पहचान बन जाता है. इस कहावत को सीकर के नेछवा क्षेत्र स्थित भाकरो की ढाणी निवासी दिनेश भाकर ने सच साबित कर दिखाया है. दिनेश अपने फार्म हाउस पर लग्जरी गाड़ियों से भी महंगे लाखों-करोड़ों रुपये के घोड़े तैयार कर रहे हैं. पॉलिटेक्निक इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद दिनेश ने तकनीकी फील्ड में नौकरी करने के बजाय अपने बचपन के शौक को ही भविष्य चुना. उन्हें घोड़ों से लगाव विरासत में मिला था, क्योंकि उनके पिता सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद घर पर एक घोड़ी लाए थे.
दिनेश ने साल 2014 में अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद 6 महीने की एक सफेद घोड़ी खरीदी और उसका नाम ‘दुर्गा’ रखा. दिनेश ने दुर्गा को डांस और प्रतियोगिताओं के लिए विशेष ट्रेनिंग दी. देखते ही देखते दुर्गा ने नागौर, बालोतरा, मुंबई और शेखावाटी महोत्सव 2023 सहित देश की कई बड़ी प्रतियोगिताओं में खिताब जीते. इस सफलता से उत्साहित होकर दिनेश ने साल 2019 में 1.80 लाख रुपये की लागत से अपने खेत में एक छोटा स्टड फार्म शुरू किया. यहाँ उन्होंने मारवाड़ी और नुकरा जैसी श्रेष्ठ नस्लों के घोड़े-घोड़ियां पालना और उन्हें प्रशिक्षित करना शुरू किया.
करोड़ों की बोली और ‘सूचेतक’ का जलवा
आज दिनेश भाकर के स्टड फार्म में देशभर के सबसे सुंदर और ऊंचे घोड़ों में गिना जाने वाला ‘सूचेतक’ मौजूद है. मुंबई में आयोजित राष्ट्रीय चैंपियनशिप जीत चुके 68 इंच ऊंचे सूचेतक को खरीदने के लिए खरीदारों ने 1.78 करोड़ रुपये तक की बोली लगाई है. एक समय 1.80 लाख रुपये से शुरू हुआ यह सफर आज करोड़ों के टर्नओवर तक पहुँच चुका है. हाल ही में पुष्कर मेले में भी दिनेश की घोड़ी ‘दुर्गा भारत’ ने अपनी सुंदर बनावट के चलते पूरे मेले में तीसरा स्थान प्राप्त कर प्रदेश का नाम रोशन किया है.
राजस्थान से झारखंड तक फैला कारोबार
दिनेश भाकर का यह काम अब सिर्फ राजस्थान तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्होंने झारखंड में भी अपना फार्म हाउस संचालित किया है. अपनी पहली घोड़ी दुर्गा के सम्मान में उन्होंने फार्म का नाम ‘दुर्गा स्टड फार्म’ रखा है. वे अब तक सैकड़ों घोड़ों का सफल कारोबार कर चुके हैं और घोड़ों की ब्रीडिंग सुविधा भी उपलब्ध करवा रहे हैं. दिनेश बताते हैं कि हर महीने घोड़ों के खान-पान और रखरखाव पर लगभग 50 हजार रुपये का खर्च आता है. उन्होंने साबित कर दिया कि यदि जुनून सच्चा हो, तो पारंपरिक नौकरियों के पीछे भागने के बजाय अपने हुनर से भी बड़ा मुकाम हासिल किया जा सकता है.
About the Author
Vicky Rathore is a multimedia journalist and digital content specialist with 8 years of experience in digital media, social media management, video production, editing, content writing, and graphic, A MAJMC gra…और पढ़ें


