नागौर के किसान दंपति की डेयरी से कमाल! नौकरी के साथ पशुपालन, हर पशु से कर रहे 12 हजार कमाई

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नागौर. कहते हैं अगर इंसान ठान ले, तो वह किसी भी काम को सफलता में बदल सकता है. गांव की मिट्टी से जुड़ा हुनर और नई सोच जब एक साथ चलें, तो चमत्कार हो जाता है. ऐसा ही एक चमत्कार कर दिखाया है मलसीसर गांव के किसान दंपति रमेश कुमार और केसर देवी खिलेरी ने, जिन्होंने पशुपालन और डेयरी फार्म को केवल रोजगार नहीं, बल्कि एक सफल व्यवसाय बना दिया है.

रमेश कुमार पढ़े-लिखे किसान हैं. उन्होंने एमएससी बी.एड. की पढ़ाई की है और वर्तमान में वे सरकारी नौकरी में सीनियर टीचर के पद पर कार्यरत हैं. इसके बावजूद उनका जुड़ाव खेती और पशुपालन से बना रहा. रमेश बताते हैं कि उन्हें बचपन से ही पशुओं से खास लगाव था और वे हमेशा कुछ ऐसा करना चाहते थे, जिससे गांव के लोगों को रोजगार मिले और युवा पीढ़ी को प्रेरणा मिल सके

2024 में डेयरी फार्म की शुरूआत की

रमेश बताते हैं कि इसी सोच के साथ मार्च 2024 को रमेश कुमार और उनकी पत्नी केसर देवी ने डेयरी फार्म की शुरुआत की. लगभग दो साल की मेहनत में उन्होंने अपने फार्म पर 40 से अधिक पशु तैयार कर लिए. इनमें अधिकतर एचएफ नस्ल की गायें हैं, जिनसे कम खर्च में अच्छा उत्पादन मिलता है. रमेश का कहना है कि सही नस्ल और सही देखभाल से पशुपालन को फायदे का सौदा बनाया जा सकता है.

पशुओं की खिलाते हैं देसी डाइट

रमेश ने बताया कि पशुओं के खान-पान पर भी पूरा ध्यान दिया जाता है. मौसम के अनुसार उन्हें मूंगफली का चारा दिया जाता है. इसके साथ ही गुड़, अजवाइन, खल, मक्का और बाजार से लाया गया संतुलित आहार खिलाया जाता है. दूध निकालने के लिए आधुनिक मशीनों का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे समय और मेहनत दोनों की बचत होती है और मिट्टी, मच्छर पडने का डर नहीं रहता है.

एक पशु से हर महीने 10 से 12 हजार की हो रही कमाई

डेयरी फार्म से निकलने वाले दूध को केवल कच्चा बेचने के बजाय उससे शुद्ध देसी घी, दूध, दही और पनीर जैसे उत्पाद तैयार किए जाते हैं. इन उत्पादों की बाजार में अच्छी मांग है, जिससे मुनाफा और बढ़ जाता है. रमेश बताते हैं कि एक पशु से हर महीने करीब 10 से 12 हजार रुपये तक का शुद्ध लाभ आसानी से कमाया जा सकता है.

बचपन के शौक को कभी मरने नहीं दिया

सरकारी नौकरी में होने के बावजूद रमेश कुमार ने अपने बचपन के शौक को कभी मरने नहीं दिया. उन्होंने यह साबित कर दिखाया कि नौकरी के साथ भी अगर सही योजना और सच्ची मेहनत हो, तो गांव में रहकर भी सफल उद्यम खड़ा किया जा सकता है. उनकी इस सोच में उनकी जीवनसाथी केसर देवी बराबर की भागीदार बनीं और दोनों ने मिलकर डेयरी फार्म को सफलता की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया. उनकी इस मेहनत और नवाचार को सरकार ने भी सराहा है. प्रगतिशील किसान योजना के तहत रमेश कुमार को पुरस्कार से सम्मानित किया गया है. यह सम्मान न केवल उनकी मेहनत का फल है, बल्कि अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा है.



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