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नेपाल सीमा से सटे महराजगंज जिले का रामग्राम ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण स्थल माना जाता है. मान्यता है कि यहां स्थित प्राचीन स्तूप में भगवान बुद्ध के अस्थि-अवशेषों का एक भाग सुरक्षित है. कहा जाता है कि सम्राट अशोक भी इस स्तूप का उत्खनन कराने पहुंचे थे, लेकिन नाग समुदाय ने इसकी रक्षा की. रामग्राम का यह इतिहास आज भी क्षेत्र की गौरवगाथा के रूप में याद किया जाता है.
महराजगंज. यूपी का महराजगंज जिला देश के अंतिम छोर पर स्थित है, यह जिला अपनी भौगोलिक स्थिति और ऐतिहासिक महत्व के कारण एक अलग पहचान रखता है. इसके साथ ही महराजगंज अपने प्राकृतिक सौंदर्य और प्राचीन ऐतिहासिक विरासत के लिए भी जाना जाता है. इस जिले की खास बात यह है कि यह पड़ोसी देश नेपाल से सटा हुआ है, जिससे इसका सामाजिक और भौगोलिक महत्व और भी बढ़ जाता है. नेपाल की सीमा से लगा यह जिला लंबे समय से सांस्कृतिक और सामाजिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है. इसके अलावा जिले के विभिन्न हिस्सों में अनेक धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल मौजूद हैं, जिनकी अपनी विशेष मान्यताएं और समृद्ध इतिहास है. ऐसा ही एक प्राचीन ऐतिहासिक स्थल महराजगंज जिले के चौक क्षेत्र के रामग्राम में स्थित है, जो जिले की ऐतिहासिक विरासत के रूप में प्रसिद्ध है. प्राचीन समय में यहां एक नाग समुदाय निवास करता था, जिसकी कहानी अत्यंत रोचक है और जिसने उस समय महत्वपूर्ण योगदान दिया था.
सम्राट अशोक भी रामग्राम स्तूप का उत्खनन कराने पहुंचे
ऐतिहासिक दृष्टिकोण से इस समुदाय का तत्कालीन समय में महत्वपूर्ण योगदान रहा है. महराजगंज जिले के चौक क्षेत्र के रामग्राम में एक ऐसा स्तूप स्थित है, जो ऐतिहासिक रूप से अत्यंत विशेष है और जिले के प्रमुख ऐतिहासिक स्थलों में से एक माना जाता है. कहा जाता है कि भगवान बुद्ध के महापरिनिर्वाण के बाद उनके अस्थि-अवशेषों को आठ भागों में विभाजित किया गया था, जिनमें से एक भाग यहां इस स्तूप में स्थापित है. हालांकि, इस तथ्य की प्रमाणिकता अभी पूरी तरह से सिद्ध नहीं हो सकी है और इस पर शोध कार्य जारी है. प्राचीन काल में जब सम्राट अशोक विभिन्न स्थानों पर बने स्तूपों का उत्खनन करवा रहे थे, तब वे यहां भी पहुंचे थे. किंतु यहां के नागवंशी, जिन्हें नाग समुदाय के रूप में जाना जाता था, उन्होंने ऐसा होने नहीं दिया. उनके नागवंशी कहलाने के पीछे भी एक रोचक कथा प्रचलित है.
रामग्राम के इतिहास में नाग समुदाय का बड़ा योगदान
महराजगंज जिले के लोकप्रिय लेखक डॉ. परशुराम गुप्त ने लोकल 18 से बातचीत के दौरान बताया कि गौतम बुद्ध से पहले इस क्षेत्र में काशी के राजा राम कुष्ठ रोग के उपचार हेतु आए थे. काशी के राजा राम नागवंशी थे और उनके कारण ही उस समय यहां के कोलिय समुदाय को नागवंशी या नाग कहा जाने लगा. इतिहास में उल्लेख मिलता है कि उस समय नाग समुदाय रामग्राम स्थित बौद्ध स्तूप की रक्षा करता था. इस प्रकार ऐतिहासिक दृष्टिकोण से इस समुदाय का क्षेत्र के इतिहास में महत्वपूर्ण योगदान रहा है, जिसे इतिहास की कथाओं में सदैव स्मरण किया जाएगा.
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