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बॉम्बे हाईकोर्ट ने आईएनएस शिकरा के पास बहुमंजिला इमारत निर्माण पर नौसेना की खुफिया विफलता को लेकर फटकार लगाई. हाईकोर्ट ने बीएमसी पर भी कार्रवाई की चेतावनी दी. अगली सुनवाई 30 मार्च को. पीठ ने कहा कि वह निर्माण स्थल पर निर्माण गतिविधि को अस्थायी रूप से रोकने के अपने पूर्व आदेश को बरकरार रखने की अनुमति नहीं दे सकती.
बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि खुफिया जानकारी जुटाने में प्रथम दृष्टया चूक हुई है. (एआई)
मुंबई. बॉम्बे हाईकोर्ट ने दक्षिण मुंबई में नौसेना के प्रमुख हवाई ठिकाने ‘आईएनएस शिकरा’ के आसपास एक बहुमंजिला इमारत के निर्माण को लेकर शुक्रवार को नौसेना को ‘खुफिया विफलता’ के लिए कड़ी फटकार लगाई और सवाल किया कि इमारत के बनते समय कैसे इस पर किसी की नजर नहीं पड़ी. जस्टिस रवींद्र घुगे और जस्टिस अभय मंत्री की पीठ ने कहा कि प्रथम दृष्टया उनकी राय यह है कि नौसेना की ओर से खुफिया चूक हुई है, क्योंकि वह अपने प्रतिष्ठान के आसपास एक गगनचुंबी इमारत के निर्माण पर ध्यान देने में विफल रही. पीठ ‘आईएनएस शिकरा’ के कमांडिंग ऑफिसर की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें संवेदनशील सैन्य प्रतिष्ठान के लिए महत्वपूर्ण सुरक्षा जोखिमों का हवाला देते हुए परियोजना पर रोक लगाने का निर्देश जारी करने का अनुरोध किया गया है.
पीठ ने नौसेना के सिर्फ इसी इमारत के निर्माण का विरोध करने पर भी सवाल उठाया, जबकि आसपास कई अन्य बहुमंजिला आवासीय इमारतें मौजूद हैं, जिनमें से कुछ ‘आईएनएस शिकरा’ से “बेहद कम दूरी” पर स्थित हैं. याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील आरवी गोविलकर ने दलील दी कि अन्य इमारतों का निर्माण साल 2011 में रक्षा मंत्रालय के एक अधिसूचना जारी कर रक्षा प्रतिष्ठानों के आसपास ऊंची संरचनाओं के निर्माण के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) को अनिवार्य बनाने से पहले किया गया था. हालांकि, हाईकोर्ट ने गौर किया कि याचिका में उल्लिखित बहुमंजिला इमारत को मार्च 2011 में निर्माण शुरू करने का प्रमाण पत्र मिला था, जिसके बाद इसे बनाने का काम शुरू हो गया था.
पीठ ने कहा, “आप (नौसेना) अपनी तरफ से हुई गंभीर चूक को छिपाने की कोशिश कर रहे हैं… खुफिया और सुरक्षा दोनों पहलुओं पर हुई चूक…. नौसेना अपने दफ्तर में बैठती रही और साल 2024 तक लगभग 70 मीटर (19 मंजिला) ऊंची इमारत बन जाने के बाद ही इस पर ध्यान दिया.” उसने कहा कि खुफिया जानकारी जुटाने में प्रथम दृष्टया चूक हुई है. पीठ ने कहा, “हम हैरान हैं कि नौसेना इतने वर्षों तक इस तरह की बहुमंजिला इमारत के निर्माण को कैसे नहीं देख पाई? यह इमारत किसी की नजर में कैसे नहीं आई? इसका कारण केवल खुफिया जानकारी जुटाने में नौसेना अधिकारियों की विफलता ही हो सकती है.”
पीठ ने कहा कि वह निर्माण स्थल पर निर्माण गतिविधि को अस्थायी रूप से रोकने के अपने पूर्व आदेश को बरकरार रखने की अनुमति नहीं दे सकती, क्योंकि यह फैसला प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की हाल ही में संपन्न मुंबई यात्रा से पहले सुरक्षा चिंताओं के मद्देनजर पारित किया गया था. हाईकोर्ट ने कहा कि चूंकि इस क्षेत्र में 53.07 मीटर (15 मंजिल) तक निर्माण की अनुमति है, इसलिए इमारत के डेवलपर को अनुमत ऊंचाई से ऊपर निर्माण अपने जोखिम पर करना होगा. उसने कहा कि अगर अदालत अंततः इस निष्कर्ष पर पहुंचती है कि एनओसी अनिवार्य है, तो वह अनुमत 53 मीटर से ऊपर की इमारत को ध्वस्त करने का निर्देश देगी.
पीठ ने यह पाए जाने पर बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी भी दी कि बीएमसी ने नौसेना से एनओसी प्राप्त किए बिना निर्माण शुरू करने का प्रमाण पत्र जारी करके लापरवाही बरती है या कोई चूक की है. हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 30 मार्च की तारीख तय की.
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राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें


