पढ़ाई छूटी, लेकिन हौसला नहीं.. मीठे समोसे और इमरती के स्वाद से बनाया खुद का ब्रांड, आज रोजाना कमाते हैं हजारों रुपए

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संदीप कि यह दुकान सुल्तानपुर मुख्य शहर में ही स्थित है.उनकी इस दुकान पर लोगों की भीड़ लगी रहती है क्योंकि मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल के बिल्कुल नजदीक होने की वजह से यहां पर प्रतिदिन हजारों की संख्या में समोसा की बिक्री होती है. वह समोसा छोला, सादा समोसा, इमरती और मीठा समोसा बेचकर प्रतिदिन हजारों रुपए की कमाई कर रहे हैं. इसमें उन्होंने अपने भाई दी

लोगों के जीवन में कभी-कभी ऐसी परिस्थितियों बनती हैं कि लोग अपनी पढ़ाई को आगे पूरा नहीं कर पाते हैं, लेकिन वह जीवन में कुछ ऐसा करते हैं कि उनकी चर्चा समाज में चारों ओर होती है. एक ऐसा ही उदाहरण पेश किया है सुल्तानपुर के रहने वाले संदीप कुमार ने, जो पारिवारिक परिस्थितियों के चलते अपनी पढ़ाई सिर्फ आठवीं तक ही कर पाए. लेकिन वह हार नहीं माने और उन्होंने अपने पारिवारिक व्यवसाय को आगे बढ़ाने का फैसला किया और सुल्तानपुर के जिला अस्पताल से मात्र 100 मीटर की दूरी पर दीपक समोसा कार्नर के नाम से इमरती और समोसे की दुकान खोली, जिससे वे आज न सिर्फ अपने परिवार का जीवन-यापन कर रहे हैं बल्कि उन्होंने समाज में अन्य युवाओं के लिए प्रेरणा का भी काम किया है.

यहां से सीखा 

संदीप कुमार लोकल 18 से बातचीत के दौरान बताते हैं कि वह जब स्कूल में पढ़ाई कर रहे थे उसी दरमियान वे अपने पिता के साथ दुकान पर आते थे और उनके काम में हाथ बंटाते थे. कक्षा आठवीं की पढ़ाई के बाद उन्होंने दुकान खुद संभाल ली और अपने पिता के साथ इमरती फेंटना, समोसे में सीक्रेट मसाले का रेसियो और मीठे समोसे को बनाना सीख गए. वह बताते हैं कि उनको बनाने में पहले काफी दिक्कतें होती थी लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने यह काम संभाल लिया और आज वे इमरती समोसा और मीठा समोसा बनाने में पारंगत है

करते हैं इतनी कमाई 

संदीप कि यह दुकान सुल्तानपुर मुख्य शहर में ही स्थित है.उनकी इस दुकान पर लोगों की भीड़ लगी रहती है क्योंकि मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल के बिल्कुल नजदीक होने की वजह से यहां पर प्रतिदिन हजारों की संख्या में समोसा की बिक्री होती है. वह समोसा छोला, सादा समोसा, इमरती और मीठा समोसा बेचकर प्रतिदिन हजारों रुपए की कमाई कर रहे हैं. इसमें उन्होंने अपने भाई दीपक को भी व्यापार में शामिल किया है.

पढ़े कम गढ़े ज्यादा 

वैसे तो दीपक ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं है उन्होंने मात्र आठवीं कक्षा तक ही पढ़ाई की है, लेकिन उनके हाथों की कला ने उनके व्यापार को और आगे तक बढ़ाने का काम किया है. यही वजह है कि स्वच्छता और साफ सफाई के साथ वे अपनी दुकान को संचालित कर रहे हैं. वह कहते हैं कि जो लोग बेरोजगार घूम रहे हैं उनको अपने अंदर कोई एक कौशल पैदा करना चाहिए और इस पर काम करना चाहिए, क्योंकि इस समय बाजार की दुनिया है और लोग किसी भी व्यापार को अपने दम पर स्थापित कर सकते हैं.

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Vivek Kumar

विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…और पढ़ें



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