Last Updated:
DRDO ने ओडिशा के चांदीपुर में स्वदेशी VSHORADS मिसाइल सिस्टम के तीन सफल टेस्ट किए हैं. यह मैन पोर्टेबल सिस्टम दुश्मन के हाई-स्पीड विमानों और ड्रोन को पलक झपकते ही तबाह करने में सक्षम है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस कामयाबी पर टीम को बधाई दी है. जल्द ही इसे सेना में शामिल किया जाएगा.
DRDO ने किया ‘वेरी शॉर्ट-रेंज एयर डिफेंस सिस्टम (VSHORADS) का सफल टेस्ट.
नई दिल्ली: रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने अपनी बेहद खास मिसाइल VSHORADS के तीन बैक-टू-बैक सफल टेस्ट किए हैं. यह परीक्षण ओडिशा के चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज से किए गए. इस मिसाइल सिस्टम को खासतौर पर कम दूरी से आने वाले हवाई खतरों को खत्म करने के लिए बनाया गया है. टेस्ट के दौरान मिसाइल ने अपनी अचूक क्षमता का प्रदर्शन किया. इसने हाई-स्पीड से आ रहे टारगेट को बीच हवा में ही इंटरसेप्ट कर पूरी तरह तबाह कर दिया. यह कामयाबी भारत की एयर डिफेंस पावर को नई ऊंचाइयों पर ले जाने वाली है. अब भारतीय सीमा में घुसपैठ करने वाले दुश्मन के विमानों और ड्रोन का बचना नामुमकिन होगा.
मिसाइल परीक्षण के दौरान क्या हुआ?
चांदीपुर में हुए इन फ्लाइट-ट्रायल्स का मकसद मिसाइल की क्षमता को दोबारा परखना था. टेस्ट में हाई-स्पीड वाले ऐसे टारगेट इस्तेमाल किए गए जो दुश्मन के फाइटर जेट्स की नकल कर रहे थे. मिसाइल ने अलग-अलग स्पीड, रेंज और ऊंचाई पर उड़ रहे इन लक्ष्यों को सफलतापूर्वक मार गिराया. सबसे खास बात यह रही कि ये टेस्ट उसी कॉन्फिगरेशन में किए गए, जिसमें इसे युद्ध के मैदान में तैनात किया जाना है. फील्ड ऑपरेटर्स ने खुद टारगेट को ट्रैक किया और फिर मिसाइल फायर की. टेलिमेट्री और इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल ट्रैकिंग सिस्टम ने पुष्टि की है कि मिसाइल ने हर पैरामीटर पर शानदार प्रदर्शन किया है.
यह मिसाइल इतनी खास क्यों है?
- VSHORADS एक मैन पोर्टेबल एयर डिफेंस सिस्टम है. इसका मतलब है कि इसे सैनिक आसानी से कहीं भी ले जा सकते हैं और फायर कर सकते हैं.
- इसे रिसर्च सेंटर इमारत ने DRDO की अन्य लैब के साथ मिलकर पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से तैयार किया है.
- यह सिस्टम भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना तीनों की जरूरतों को पूरा करने के लिए डिजाइन किया गया है.
- इसकी सबसे बड़ी खूबी इसका हल्का होना और पोर्टेबिलिटी है.
- दुर्गम पहाड़ी इलाकों या बॉर्डर की अग्रिम चौकियों पर इसे तैनात करना बहुत आसान होगा.
- यह मिसाइल कम ऊंचाई पर उड़ने वाले खतरों के लिए काल साबित होगी.
सेना की ताकत में कितना इजाफा होगा?
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस सफल परीक्षण पर DRDO और सशस्त्र बलों को बधाई दी है. उन्होंने कहा कि लगातार तीन सफल टेस्ट एक बड़ी जीत है और जल्द ही इसे सेना में शामिल किया जाएगा. DRDO चीफ डॉ. समीर वी कामत ने भी इस प्रोजेक्ट से जुड़ी पूरी टीम की तारीफ की है. इस मिसाइल के आने से भारत की विदेशी डिफेंस सिस्टम पर निर्भरता कम होगी. वर्तमान दौर में ड्रोन और छोटे विमानों से होने वाले हमलों का खतरा बढ़ गया है. ऐसे में VSHORADS जैसा स्वदेशी सिस्टम बॉर्डर की सुरक्षा को अभेद्य बनाने में गेम चेंजर साबित होने वाला है.
About the Author
दीपक वर्मा (Deepak Verma) एक पत्रकार हैं जो मुख्य रूप से विज्ञान, राजनीति, भारत के आंतरिक घटनाक्रमों और समसामयिक विषयों से जुडी विस्तृत रिपोर्ट्स लिखते हैं. वह News18 हिंदी के डिजिटल न्यूजरूम में डिप्टी न्यूज़…और पढ़ें

