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Success Stoy: बोकारो जिले के चास प्रखंड की उलगोड़ा गांव निवासी चंचला कुमारी ने पारंपरिक खेती से अलग हटकर गेंदा फूल की खेती कर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश की है. नवंबर में 50 डिसमिल जमीन पर करीब 5000 पौधों के साथ शुरू की गई इस खेती में लगभग ₹15 हजार की लागत आई और 3–4 महीने में उत्पादन शुरू हो गया. शादी-विवाह और पूजा सीजन में ₹50 से ₹150 प्रति किलो तक भाव मिलने से वे औसतन ₹30 हजार तक की कमाई कर रही हैं, जिससे फूलों की खेती उनके लिए लाभदायक विकल्प साबित हो रही है. रिपोर्ट- कैलाश कुमार गोपे
बोकारो जिले के चास प्रखंड के उलगोड़ा गांव की रहने वाली चंचला कुमारी पारंपरिक खेती से अलग हटकर गेंदा फूल की खेती कर आत्मनिर्भरता की मिसाल बन चुकी हैं. उन्होंने साबित कर दिया है कि अगर सोच नई हो और मेहनत सच्ची तो खेती के जरिए भी अच्छी आमदनी कमाई की जा सकती है.
खास बातचीत में महिला किसान चंचला कुमारी ने बताया कि उन्होंने नवंबर महीने में 50 डिसमिल की जमीन पर गेंदा फूल की खेती की शुरुआत की थी. इसका विचार उन्हें यूट्यूब पर खेती का वीडियो देखने के दौरान आया. जिसके बाद उन्होंने गेंदा फूल की खेती करने का निर्णय लिया. आज वह अपने पति मिथलेश शरण के साथ मिलकर सफलतापूर्वक गेंदा की खेती कर रही हैं.
चंचला कुमारी ने आगे बताया कि उन्होंने लगभग 5000 गेंदा के पौधे लगाए हैं, जिसमें करीब 15 हजार रुपये की लागत आई. गेंदा के पौधे 3 से 4 महीने में तैयार हो जाते हैं और एक बार फूल आना शुरू होने के बाद लगातार दो से तीन महीने तक उत्पादन मिलता है. जिससे नियमित तौर पर आमदनी होती है.
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वहीं तैयार गेंदा के फूलों को वह चास के फुल बाजार में बेचती हैं, जहां बाजार और सीजन भाव के अनुसार 50 रुपये से लेकर 150 रुपये प्रति किलो तक कीमत मिल जाती है.
शादी-विवाह और पूजा-पाठ के मौसम में फूलों की मांग बढ़ने से आमदनी भी बेहतर हो जाती है. 50 डिसमिल में 5 से 6 क्विंटल गेंदा फूल का उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं. जिससे औसतन 30,000 हजार तक आसानी से कमाई कि जा सकती है.
गेंदा फूल की खेती को लेकर चंचला कुमारी ने बताया कि गेंदा के फूल की खेती में कम जोखिम होता है और इस खेती में बंदरों के हमले जैसी समस्या भी नहीं होती.
वहीं, खेती के दौरान गेंदा फूल के जड़ में फंगस या कीट जैसी समस्याएं आती हैं, जिनसे बचाव के लिए समय-समय पर कीटनाशक के छिड़काव करने से फसल सुरक्षित रहती है.


