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पीलीभीत: जिले में बढ़ती मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं के बीच बड़ी राहत की खबर सामने आई है. राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) ने पीलीभीत टाइगर रिजर्व के बाहर सक्रिय बाघों और तेंदुओं के प्रबंधन के लिए ‘टाइगर आउटसाइड द टाइगर रिजर्व’ कार्यक्रम शुरू किया है. इस पहल के तहत आधुनिक तकनीक और विशेष रेस्क्यू उपकरणों की मदद से न केवल वन्यजीवों की निगरानी मजबूत की जाएगी, बल्कि सीमावर्ती गांवों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जाएगी.
पीलीभीत. पीलीभीत में मानव-वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती घटनाओं के बीच राष्ट्रीय स्तर पर एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है. बाघ और तेंदुओं की गतिविधियों को नियंत्रित करने और ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक विशेष कार्यक्रम की शुरुआत की गई है. इसका उद्देश्य टाइगर रिजर्व की सीमा से बाहर सक्रिय वन्यजीवों के बेहतर प्रबंधन की व्यवस्था करना है.
‘टाइगर आउटसाइड द टाइगर रिजर्व’ कार्यक्रम की शुरुआत
राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) ने ‘टाइगर आउटसाइड द टाइगर रिजर्व’ कार्यक्रम शुरू किया है. इस योजना के तहत उन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, जहां बाघ और अन्य वन्यजीव रिजर्व की सीमा से बाहर देखे जाते हैं. पीलीभीत टाइगर रिजर्व के बाहर भी बाघों और तेंदुओं की मौजूदगी के कारण अक्सर चुनौतियां सामने आती हैं. इन्हीं समस्याओं को वैज्ञानिक और तकनीकी तरीके से हल करने के लिए यह प्रोजेक्ट लागू किया जा रहा है.
पीलीभीत भी चुना गया विशेष डिवीजन
पीलीभीत वन एवं वन्यजीव प्रभाग के प्रभागीय निदेशक भरत कुमार डीके ने बताया कि देश के चार डिवीजनों को इस विशेष प्रोजेक्ट के लिए चुना गया है, जिनमें पीलीभीत भी शामिल है. इस पहल के लिए लगभग 90 लाख रुपये का बजट निर्धारित किया गया है.
आधुनिक तकनीक और उपकरणों पर जोर
इस बजट का उपयोग आधुनिक रेस्क्यू वैन और एडवांस्ड रेस्क्यू उपकरणों की खरीद में किया जाएगा. इनमें शामिल हैं:
1) ट्रैंकुलाइजिंग गन.
2) मजबूत पिंजरे.
3) थर्मल ड्रोन जैसी निगरानी तकनीक.
इन उपकरणों की मदद से जंगलों के बाहर बाघों की गतिविधियों पर सटीक नजर रखी जा सकेगी और जरूरत पड़ने पर उन्हें सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू किया जा सकेगा.
फ्रंटलाइन स्टाफ को मिलेगा विशेष प्रशिक्षण
प्रभागीय निदेशक ने बताया कि बजट जारी होते ही विभाग के फ्रंटलाइन स्टाफ को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा. कर्मचारियों को नई तकनीकों से लैस किया जाएगा ताकि वे कठिन परिस्थितियों में भी वन्यजीवों को बिना नुकसान पहुंचाए सुरक्षित तरीके से नियंत्रित और रेस्क्यू कर सकें.
औपचारिकताएं अंतिम चरण में
फिलहाल प्रोजेक्ट के लिए बैंक खाता खोलने और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाएं अंतिम चरण में हैं. प्रक्रिया पूरी होते ही धनराशि जारी कर दी जाएगी.
ग्रामीणों की सुरक्षा और बाघ संरक्षण दोनों पर फोकस
यह पहल न केवल बाघों के संरक्षण में मददगार साबित होगी, बल्कि सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले ग्रामीणों की सुरक्षा को भी मजबूत करेगी. विशेषज्ञों का मानना है कि वैज्ञानिक प्रबंधन और तकनीकी निगरानी से मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं में कमी लाई जा सकेगी.
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पिछले 4 साल से मीडिया इंडस्ट्री में काम कर रही हूं और फिलहाल News18 में कार्यरत हूं. इससे पहले एक MNC में भी काम कर चुकी हूं. यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश की बीट कवर करती हूं. खबरों के साथ-साथ मुझे…और पढ़ें


