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उत्तर प्रदेश में पिछले दो साल में लापता हुए 1 लाख से अधिक लोगों में से यूपी पुलिस ने अभियान चलाकर लापता हुए लोगों में से 88022 को तलाश निकाला. हालांकि 20350 लोग अब भी लापता हैं. यह आंकड़ा डीजीपी राजीव कृष्ण ने जारी किया है. गुमशुदा लोगों की तलाश के लिए यूपी पुलिस ने बड़े स्तर पर प्लानिंग तैयार की थी.
यूपी पुलिस ने ढूंढ निकाले 88000 लापता लोग. (सांकेतिक तस्वीर-AI)
लखनऊः उत्तर प्रदेश में पिछले दो साल में लापता हुए 1 लाख से अधिक लोगों में से यूपी पुलिस ने अभियान चलाकर लापता हुए लोगों में से 88022 को तलाश निकाला. हालांकि 20350 लोग अब भी लापता हैं. यह आंकड़ा डीजीपी राजीव कृष्ण ने जारी किया है. गुमशुदा लोगों की तलाश के लिए यूपी पुलिस ने बड़े स्तर पर प्लानिंग तैयार की थी. डीजीपी ने सभी पुलिस कमिश्नर, एडीजी जोन ,आईजी – डीआईजी रेंज, एसएसपी को पत्र भी लिखा है. बता दें कि यूपी में 1 जनवरी 2024 से 18 जनवरी 2026 के बीच कुल 108372 लोगों की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज की गई थी.
पुलिस ने 88000 लोगों को ढूंढ निकाला
पुलिस ने अभियान चलाकर इनमें से 88022 लोगों को खोज निकाला है. इनमें से कुछ लोगों की मौत भी हो चुकी है. वहीं तमाम लोग ऐसे भी थे जो खुद से घर वापस आ चुके थे. लेकिन उनके परिजनों ने पुलिस को जानकारी नहीं दी थी. पुलिस के मुताबिक रिकवरी रेट 81.22 फीसदी है. अब ये डेटा सीसीटीएनएस पर अपडेट कर दिया गया है.
पिछले दो साल में लापता हुए थे एक लाख लोग
बता दें कि हाल ही में एक याचिका की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट को पता चला था कि पिछले दो साल में यूपी में 1 लाख से अधिक लोग लापता हैं. इसके बाद स्वतः संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने इसपर सुनवाई करते हुए पूरे रिकॉर्ड के साथ अपर मुख्य सचिव गृह और डीजीपी को तलब किया था. हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के संबंधित विभागों से सभी आंकड़े और रिकॉर्ड तलब किए थे. हालांकि अभी इस मामले की सुनवाई 23 मार्च को होनी है.
हाईकोर्ट ने स्वतः लिया था संज्ञान
हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई पर अपर मुख्य सचिव गृह और डीजीपी को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मौजूद रहने का आदेश दिया हुआ है. मामले में हाईकोर्ट ने स्वत संज्ञान लेकर जनहित याचिका दाखिल करने का बुधवार को ऑर्डर दिया था. हाईकोर्ट में पेश आंकड़ों के मुताबिक दो साल में 108300 लोगों के गुमशुदा होने की बात सामने आई थी. इनमें से मात्र 9700 लोगों को पुलिस तलाश पाई थी. मामले को गंभीर और चिंताजनक बताते हुए हाईकोर्ट ने जनहित याचिका दाखिल करने का आदेश दिया था.
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प्रशान्त राय मूल रूप से उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के रहने वाले हैं. प्रशांत राय पत्रकारिता में पिछले 8 साल से एक्टिव हैं. अलग-अलग संस्थानों में काम करते हुए प्रशांत राय फिलहाल न्यूज18 हिंदी के साथ पिछले तीन …और पढ़ें


