फेनी: पुरानी दिल्ली के मटिया महल बाजार में रमजान के दौरान खास व्यंजन.

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Ramzan Special 2026: रमजान में पुरानी दिल्ली के जामा मस्जिद के मटिया महल बाजार में फेनी की मांग बढ़ जाती है. मोहम्मद जाकिर समेत दुकानदार रोज 100 किलो से ज्यादा ताजा फेनी बेचते हैं. आइये जानते हैं इसके बारे में.

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दिल्ली: रमजान के पावन दिन पूरी दुनिया में शुरू हो चुके हैं. ऐसे में रमजान का असर भारत में भी दिख रहा है. खासकर राजधानी दिल्ली के पुराने बाजारों में लोगों की चहल-पहल और भी ज्यादा इन दिनों में बढ़ जाती है. इसी के चलते लोकल 18 की टीम पुरानी दिल्ली की जामा मस्जिद से सटे मटिया महल बाजार पहुंची. यहां दुकानों पर अलग-अलग तरह के व्यंजनों की भरमार दिखाई दी, जिन्हें खरीदने के लिए बड़ी संख्या में लोग जमा थे. इसी दौरान लोकल 18 की टीम की नजर एक ऐसे व्यंजन पर पड़ी, जो देखने में काफी अलग थी. आमतौर पर यह पुरानी दिल्ली के इलाकों में कम ही देखने को मिलती है. टीम ने यहां के दुकानदारों और वहां मौजूद लोगों से पूछताछ की. आइये जानते हैं यहां के दुकानदारों और लोगों ने इस खास व्यंजन के बारे में क्या बातें बताई.

जानें क्या है इस व्यंजन का नाम

मटिया महल बाजार में पहुंचते ही लोकल 18 की टीम ने इस व्यंजन को देखा और वहां के सबसे पुराने अनुभवी दुकानदार मोहम्मद जाकिर से बातचीत की, जो की मटिया महल में करीब 50 सालों से अपनी दुकान चला रहे हैं. उन्होंने बताया कि इस व्यंजन का नाम ‘फेनी’ है. उन्होंने आगे यह भी बताया कि आमतौर पर पुरानी दिल्ली से सटे इलाकों में यह चीज़ आम दिनों में नहीं बिकती है. खास तौर पर हर साल जैसे ही रमज़ान शुरू होता है और उसके दिन आते हैं. तभी यह चीज आपको खास तौर पर पुरानी दिल्ली के जामा मस्जिद इलाके में हर दुकान पर मिल जाती है. उनका यह भी कहना था कि रमजान के दिनों में यहां फेनी बेचने वाली लगभग हर दुकान का हर दुकानदार रोज 100 किलो से ज्यादा फेनी बेचता है. यह फेनी हर दिन ताजा तैयार की जाती है.

जानें रमजान में ही क्यों फेनी खाते हैं लोग

यहां पर फेनी बेचने वाले दुकानदारों और इसे खरीदने वाले लोगों से जब लोकल 18 की टीम ने बातचीत की. टीम ने पूछा कि ये फेनी आखिर रमजान में ही क्यों बाजारों में बिकती है लोग इसे इतनी मात्रा में क्यों खरीदते हैं. इसके जवाब में दुकानदारों और खरीदारों ने बताया कि उनके बुज़ुर्ग जब से पुरानी दिल्ली में रहते आ रहे हैं. तब से ही रमजान में खास तौर पर सुबह की सहरी में वह फेनी खाना पसंद करते थे.

उनका कहना है कि यह भोजन काफी हल्का होता है. इसलिए इसे दूध में डालकर खाया जाता है. उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए आज भी लोग रमजान के दौरान इसे खाते हैं. अपने बुज़ुर्गों की इस परंपरा को निभा रहे हैं. वहीं, यहां के दुकानदारों ने यह भी बताया कि फेनी को बनाने में काफी ज़्यादा समय लगता है. पहले आटे में घी मिलाकर उसे अच्छी तरह गूंथा जाता है. इसके बाद उसके पेड़े बनाए जाते हैं और उन्हें तेल या घी में तला जाता है. जैसे ही तलने की प्रक्रिया शुरू होती है. उसमें बड़े-बड़े लच्छे बनने लगते हैं. उसी समय गोल-गोल लच्छों को तेल या घी से बाहर निकाल लिया जाता है. इसी तरह यह फेनी तैयार की जाती है.

About the Author

Brijendra Pratap Singh

बृजेंद्र प्रताप सिंह डिजिटल-टीवी मीडिया में लगभग 4 सालों से सक्रिय हैं. मेट्रो न्यूज 24 टीवी चैनल मुंबई, ईटीवी भारत डेस्क, दैनिक भास्कर डिजिटल डेस्क के अनुभव के साथ 14 मई 2024 से News.in में सीनियर कंटेंट राइटर…और पढ़ें



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