बैक्टीरियल विल्ट से तना छेदक तक…बैंगन किसानों सावधान, बढ़ रहा इन रोगों का खतरा, जानें बचाव

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बैक्टीरियल विल्ट से तना छेदक तक…बैंगन किसानों सावधान, बढ़ा इन रोगों का खतरा

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फरवरी का महीना चल रहा है. मौसम में गर्माहट घुलने लगी है. इन बदलावों से बैंगन के पौधों पर कीट लगने का खतरा बढ़ गया. इनमें प्रमुख रूप से फल छेदक कीट सबसे घातक हैं. ये कीट पौधे के तने और फलों में छेदकर अंदर से नुकसान पहुंचाता है. लोकल 18 ने इसके बचाव के बारे में जानने के लिए रायबरेली के सहायक विकास अधिकारी (कृषि) दिलीप कुमार सोनी से बात की. वे बताते हैं कि खेत में फेरोमोन ट्रैप लगाएं. जरूरत पड़ने पर कीटनाशकों का छिड़काव भी कर सकते हैं.

बैंगन की फसल इस समय कई खतरनाक रोगों की चपेट में आ रही है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है. बदलते मौसम, अधिक नमी और तापमान में उतार-चढ़ाव के कारण फसल में फफूंद और बैक्टीरिया जनित रोग तेजी से फैल रहे हैं. समय रहते पहचान और सही प्रबंधन से इन रोगों से बचाव संभव है.

रायबरेली जिले के राजकीय कृषि केंद्र शिवगढ़ के सहायक विकास अधिकारी कृषि दिलीप कुमार सोनी लोकल 18 से बताते हैं कि बदलते मौसम में बैंगन की फसल पर खासा प्रभाव पड़ रहा है क्योंकि इस समय पौधों पर बैंगन लगना शुरू हो गए हैं. ऐसे में मौसम में बदलाव की वजह से कीट लगने का खतरा बढ़ गया. फल छेदक कीट का खतरा सबसे ज्यादा है.

फल और तना छेदक कीट (शूट एंड फ्रूट बोरर) पौधे के तने और फलों में छेदकर अंदर से नुकसान पहुंचाते हैं. इससे उत्पादन घट जाता है. इसके नियंत्रण के लिए संक्रमित टहनियों और फलों को तोड़कर नष्ट करें. खेत में फेरोमोन ट्रैप लगाएं और आवश्यकता होने पर अनुशंसित कीटनाशकों का छिड़काव करें.

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बैक्टीरियल विल्ट (मुरझा रोग) लगने पर पौधे अचानक मुरझा जाते हैं और कुछ ही दिनों में सूख सकते हैं. यह रोग मिट्टी के माध्यम से फैलता है. इससे बचाव के लिए रोगरोधी किस्मों का चयन करें. फसल चक्र अपनाएं और जल निकासी की उचित व्यवस्था रखें. खेत में जलभराव न होने दें.

लीफ स्पॉट (पत्ती धब्बा रोग) भी तेजी से फैल रहा है. इसमें पत्तियों पर भूरे या काले धब्बे बन जाते हैं, जिससे प्रकाश संश्लेषण प्रभावित होता है. नियंत्रण के लिए समय-समय पर फफूंदनाशक दवाओं का छिड़काव करें और पौधों के बीच उचित दूरी बनाए रखें ताकि हवा का संचार बना रहे.

दिलीप कुमार सोनी बताते हैं कि नाइट्रोजन की अधिक मात्रा से पौधे कोमल हो जाते हैं और रोगों की संभावना बढ़ जाती है. किसान भाई इससे बचने के लिए जैविक खाद और सूक्ष्म पोषक तत्वों का संतुलित उपयोग करें.



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