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बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन की एक ऐसी मास्टपीस फिल्म है, जिसकी कामयाबी की गूंज सरहदों के पार तक सुनाई दी. संजय लीला भंसाली के निर्देशन में बनी यह फिल्म बॉलीवुड की इकलौती ऐसी मूवी है, जिसका तुर्की में आधिकारिक रीमेक बनाया गया. साल 2013 में तुर्की के मशहूर निर्देशक उगुर युसेल ने इसे ‘बेनिम दुन्याम’ के नाम से पर्दे पर उतारा, जो भंसाली की जादुई कहानी के ग्लोबल प्रभाव को दर्शाता है. दिलचस्प बात यह है कि इस मास्टरपीस के लिए बिग बी ने अपनी फीस तक नहीं ली थी.
नई दिल्ली. संजय लीला भंसाली को उनकी ऐतिहासिक और भव्य फिल्मों के लिए जाना जाता है, लेकिन उनकी एक ऐसी गैर-ऐतिहासिक फिल्म भी रही है जिसने लोगों के दिलों को गहराई से छुआ. वह मास्टरपीस फिल्म है ‘ब्लैक’. यह फिल्म महलों या भारी-भरकम लिबास के बारे में नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं की एक सच्ची कहानी थी. महज 22 करोड़ रुपये के बजट में बनी इस फिल्म ने दुनियाभर में 66 करोड़ रुपये की कमाई की, लेकिन इसकी असली कामयाबी वह भावनात्मक असर था, जो इसने दर्शकों पर छोड़ा.
साल 2005 में रिलीज हुई इस फिल्म में अमिताभ बच्चन और रानी मुखर्जी ने अपने करियर की सबसे यादगार भूमिकाएं निभाईं. ‘ब्लैक’ बनाने का विचार भंसाली के मन में 90 के दशक में फिल्म ‘खामोशी: द म्यूजिकल’ के दौरान आया था. उस फिल्म में नाना पाटेकर और सीमा बिस्वास एक मूक-बधिर जोड़े के किरदार में थे. फिल्म के दौरान भंसाली ने विशेष रूप से सक्षम लोगों के साथ काफी वक्त बिताया और उनके अनुभवों ने उन्हें एक गहरी और प्रभावशाली कहानी कहने के लिए प्रेरित किया. (फोटो साभार: IMDb)
‘ब्लैक’ की कहानी मशहूर एक्टिविस्ट हेलन केलर के जीवन से प्रेरित थी, जिन्होंने अपनी शारीरिक बाधाओं को पार कर एक नई मिसाल पेश की थी. फिल्म मिशेल मैकनेली नाम की एक ऐसी लड़की के इर्द-गिर्द घूमती है जो देख और सुन नहीं सकती, और उसके गुरु देबराज सहाय, जो खुद अपनी परेशानियों से लड़ते हुए उसे दुनिया देखना सिखाते हैं. इन दोनों का रिश्ता फिल्म की आत्मा है, जो अटूट लगन और गरिमा की एक बेहतरीन मिसाल पेश करता है. (फोटो साभार: IMDb)
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इस फिल्म की कामयाबी का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि बॉलीवुड की उन गिनी-चुनी फिल्मों में शामिल है जिनका इंटरनेशनल रीमेक बना है. साल 2013 में तुर्की के डायरेक्टर उगुर युसेल ने इसे ‘बेनिम दुन्याम’ के नाम से दोबारा बनाया, जो यह साबित करता है कि संजय लीला भंसाली की कहानी और इसके जज्बात पूरी दुनिया के लिए थे. (फोटो साभार: IMDb)
फिल्म से जुड़ा एक और बेहद दिलचस्प किस्सा यह है कि अमिताभ बच्चन ने इस मास्टरपीस मूवी के लिए एक भी रुपया फीस नहीं ली थी. उन्होंने खुद बताया था कि वह संजय लीला भंसाली की कहानी से इतने प्रभावित थे कि इस फिल्म का हिस्सा बनना ही उनके लिए सबसे बड़ा इनाम था. उन्होंने देबराज सहाय का रोल निभाया, जो अल्जाइमर से पीड़िता रहता है. यह उनके करियर की सबसे बेहतरीन परफॉर्मेंस मानी जाती है. (फोटो साभार: IMDb)
वहीं, रानी मुखर्जी ने तो शुरुआत में इस फिल्म के लिए मना ही कर दिया था. उन्हें डर था कि वह एक ऐसी लड़की का किरदार बखूबी निभा पाएंगी या नहीं जो देख और सुन नहीं सकती. लेकिन कड़ी मेहनत और भंसाली के भरोसे ने उनसे उनके करियर की सबसे दमदार परफॉर्मेंस निकलवाई, जिसके लिए उन्हें हर तरफ से तारीफें मिलीं. (फोटो साभार: IMDb)
फिल्म की मेकिंग के दौरान एक बड़ा हादसा भी हुआ था. 2004 में शूटिंग के वक्त सेट पर भीषण आग लग गई थी, जिसमें काफी महंगे इक्विपमेंट्स जलकर खाक हो गए और कुछ क्रू मेंबर्स भी घायल हुए. शुक्र है कि उस वक्त अमिताभ और रानी सेट पर मौजूद नहीं थे. इस बड़े नुकसान के बावजूद टीम ने हार नहीं मानी, शूटिंग पूरी की और फिल्म ने रिलीज होकर इतिहास रच दिया. (फोटो साभार: IMDb)
अवॉर्ड्स के मामले में भी ब्लैक फिल्म ने झंडे गाड़ दिए थे. 53वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स में ‘ब्लैक’ ने बेस्ट एक्टर, बेस्ट फीचर फिल्म (हिंदी) और बेस्ट कॉस्ट्यूम डिजाइन जैसे बड़े सम्मान अपने नाम किए. इतना ही नहीं, साल 2005 में प्रतिष्ठित ‘टाइम’ (यूरोप) मैगजीन ने इसे दुनिया की 10 सबसे बेहतरीन फिल्मों की लिस्ट में पांचवें पायदान पर रखा था, जो किसी भी हिंदी फिल्म के लिए एक बहुत बड़ी वैश्विक उपलब्धि है. (फोटो साभार: IMDb)
रिलीज के दो दशक बाद भी ‘ब्लैक’ संजय लीला भंसाली के करियर की सबसे अनमोल फिल्मों में से एक मानी जाती है. भव्य महलों और शाही लिबास के बिना भी यह फिल्म मानवीय रिश्तों, अटूट हौसले और निस्वार्थ प्रेम की ताकत को बखूबी बयां करती है. आज यह नेटफ्लिक्स पर मौजूद है और यह बात साबित करती है कि सिनेमा की असली भव्यता सिर्फ दिखावे में नहीं, बल्कि उसकी रूह में होती है. (फोटो साभार: IMDb)


