मावा-ड्राई फ्रूट्स और घी से बनती है यह गुजिया, स्वाद के दीवाने हैं लोग, रोजाना बिक जाती है 50KG

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दिल्ली-सहारनपुर हाईवे किनारे काठा गांव स्थित ऋतिक स्वीट्स पर देसी घी, मावा और ड्राई फ्रूट्स से बनी स्पेशल गुजिया की खूब मांग है. संचालक सुनील कौशिक के अनुसार रोज करीब 50 किलो बिक्री हो रही है. 350 रुपये किलो कीमत वाली यह गुजिया हरियाणा, शामली और मुजफ्फरनगर तक पसंद की जा रही है.

बागपतः होली के पावन पर्व को लेकर बागपत में मिठाइयों की दुकानों पर रौनक बढ़ गई है. खासतौर पर दिल्ली-सहारनपुर हाईवे किनारे काठा गांव स्थित ऋतिक स्वीट्स पर तैयार की जा रही स्पेशल गुजिया लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बनी हुई है. देसी घी, शुद्ध मावा और ड्राई फ्रूट्स से तैयार यह गुजिया स्वाद के मामले में कई मशहूर मिठाइयों को टक्कर दे रही है. यहां रोजाना 50 किलो गुजिया की बिक्री हो जा रही है.

देसी घी और शुद्ध मावे से तैयार होती है गुजिया

दुकान के संचालक सुनील कौशिक बताते हैं कि गुजिया की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाता. सबसे पहले आसपास के किसानों से ताजा दूध इकट्ठा किया जाता है. इस दूध को भट्टी पर लगातार भूना जाता है, जिससे शुद्ध मावा तैयार होता है. इसके बाद काजू, बादाम और पिस्ता को बारीक पीसकर मावे में मिलाया जाता है. फिर मैदा तैयार कर उसमें मावा और ड्राई फ्रूट्स की भरावन डालकर गुजिया को आकार दिया जाता है. अंत में इन्हें धीमी आंच पर देसी घी में तला जाता है, जिससे इसका स्वाद और सुगंध दोनों खास हो जाते हैं.

रोजाना 50 किलो तक बिक्री

होली के मौसम में यहां रोजाना करीब 50 किलो गुजिया की बिक्री हो रही है. बागपत ही नहीं बल्कि हरियाणा, शामली और मुजफ्फरनगर समेत आसपास के जिलों से लोग यहां पहुंचते हैं. दूर-दराज के ग्राहक ऑर्डर देकर गुजिया मंगवाते हैं. पिछले आठ वर्षों से यह दुकान अपने स्वाद के कारण लोगों के बीच लोकप्रिय बनी हुई है.

350 रुपये किलो, हर वर्ग के लिए खास

सुनील कौशिक के अनुसार, गुजिया की कीमत 350 रुपये प्रति किलो रखी गई है, ताकि हर वर्ग का व्यक्ति इसका स्वाद ले सके. क्वांटिटी और क्वालिटी दोनों का विशेष ध्यान रखा जाता है. एक बार स्वाद चखने के बाद ग्राहक बार-बार यहां लौटकर आते हैं.

होली के मौके पर तैयार की जाने वाली यह स्पेशल गुजिया न सिर्फ त्योहार की मिठास बढ़ा रही है, बल्कि बागपत की पहचान भी बनती जा रही है.

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Lalit Bhatt

पिछले एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं. 2010 में प्रिंट मीडिया से अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत की, जिसके बाद यह सफर निरंतर आगे बढ़ता गया. प्रिंट, टीवी और डिजिटल-तीनों ही माध्यमों म…और पढ़ें



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