मिर्जापुर में बाल विवाह के खिलाफ मुहिम, डॉक्टरों ने संभाली कमान, पेंटिंग प्रतियोगिता से करे रहे जागरूक

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मिर्जापुर जिले में बाल विवाह को रोकने के लिए केयर एंड क्योर फाउंडेशन की ओर से 100 दिनों का विशेष अभियान चलाया जा रहा है. खास बात यह है कि संस्था की मुहिम में डॉक्टर भी शामिल हुए हैं. डॉक्टरों के द्वारा किशोरियों को बाल विवाह से होने वाले नुक्सान के बारे में भी बताया जा रहा है. कार्यक्रम में मिर्जापुर के 15 अलग-अलग गांव से 12 से 17 साल की लड़कियां शामिल हुई. कार्यक्रम में बाल विवाह की थीम पर पेंटिंग कॉम्पटीशन का आयोजन किया गया, जिसमें सभी ने भाग लिया. कॉप्टीशन में सबसे बेस्ट पेंटिंग बनाने वाले को पुरस्कार दिया गया.

मिर्जापुर: उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में अशिक्षा और सामाजिक चेतना न होने की वजह से सबसे ज्यादा बाल विवाह होता था. यहां पर बाल विवाह रोकने के लिए सरकार की ओर से कई योजनाएं चलाई जा रही है. सरकार के बाद अब दूसरे भगवान कहें जाने वाले डॉक्टर भी इस कड़ी में जुड़ गए हैं. महिला डॉक्टर एनजीओ के माध्यम से बाल विवाह को लेकर न सिर्फ छात्राओं को जागरूक कर रही है. बल्कि, पेंटिंग कंपटीशन के माध्यम से बाल विवाह को लेकर जानकारी भी साझा की जा रही है. इसमें बाल विवाह से जुड़ी पेंटिंग छात्राओं और किशोरियों के द्वारा तैयार किया जाता है, जहां सबसे बेसट पेंटिंग पर  पुरस्कार और अन्य लोगों को प्रसस्ति पत्र दिया जाता है. डॉक्टरों का कहना है कि बाल विवाह एक कुप्रथा है. इससे बालिकाओं का विकास प्रभावित होता है. इसे रोकने के लिए स्वयं उनका जागरूक होना जरूरी है.

मिर्जापुर जिले में बाल विवाह को रोकने के लिए केयर एंड क्योर फाउंडेशन की ओर से 100 दिनों का विशेष अभियान चलाया जा रहा है. खास बात यह है कि संस्था की मुहिम में डॉक्टर भी शामिल हुए हैं. डॉक्टरों के द्वारा किशोरियों को बाल विवाह से होने वाले नुक्सान के बारे में भी बताया जा रहा है. कार्यक्रम में मिर्जापुर के 15 अलग-अलग गांव से 12 से 17 साल की लड़कियां शामिल हुई. कार्यक्रम में बाल विवाह की थीम पर पेंटिंग कॉम्पटीशन का आयोजन किया गया, जिसमें सभी ने भाग लिया. कॉप्टीशन में सबसे बेस्ट पेंटिंग बनाने वाले को पुरस्कार दिया गया. वहीं, अन्य को प्रसस्ति पत्र दिया गया. कार्यक्रम में कम उम्र में होने वाले विवाह से बच्चों को नुक्सान के बारे में बताया गया. डीपीओ डॉ. आशा राय ने बताया कि बाल विवाह से न सिर्फ शारीरिक नुक्सान होता है. बल्कि, मानसिक आघात होता है.

मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को नुकसान
डॉ. ज्योति सिंह ने बताया कि 15 से 17 साल की लड़कियों को बाल विवाह को लेकर जानकारी दी गई है. बाल विवाह से होने वाले दुष्परिणाम के बारे में भी बताया गया है. बाल विवाह से शारीरिक और मानसिक दोनों नुकसान होता है. ऐसे में यह कैसे नुकसान पहुंचाता है, इसको लेकर जानकारी दी गई है.  किशोरियों को मौलिक अधिकारों के बारे मे भी बताया गया है. यह बहुत दिनों से चल रहा है. मुख्य उद्देश्य समाज की कुरीतियों में एक बाल विवाह को बंद करना है.

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Manish Rai

काशी के बगल चंदौली से ताल्लुक रखते है. बिजेनस, सेहत, स्पोर्टस, राजनीति, लाइफस्टाइल और ट्रैवल से जुड़ी खबरें पढ़ना पसंद है. मीडिया में करियर की शुरुआत ईटीवी भारत हैदराबाद से हुई. अभी लोकल18 यूपी के कॉर्डिनेटर की…और पढ़ें



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