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मीठा खाने की आदत अगर आपकी सेहत पर भारी पड़ रही है, तो प्रकृति ने इसका समाधान भी तैयार कर रखा है. गुड़मार नाम का यह औषधीय पौधा शुगर रोगियों के लिए किसी वरदान से कम नहीं माना जाता. सदियों से ब्लड शुगर कंट्रोल करने के लिए उपयोग किया जाता रहा है. इसकी खासियत यह है कि यह जीभ पर मीठे स्वाद की अनुभूति को कुछ समय के लिए कम कर देता है, जिससे मीठा खाने की तलब घटने लगती है. आखिर यह पौधा शरीर पर कैसे असर करता है, जानिए आगे विस्तार से….
शुगर को नियंत्रण करने में गुड़मार की भूमिका सबसे ज्यादा होती है. इसीलिए गुड़मार को शुगर रोगियों के लिए संजीवनी समान कहा गया है. इसमें जिम्नेमिक एसिड होता है, जो शरीर में शुगर के अवशोषण को कम करने में मदद करता है. यह अग्न्याशय को इंसुलिन स्राव के लिए प्रेरित कर सकता है, जिससे ब्लड शुगर स्तर अपेक्षाकृत स्थिर रहता है, जिससे उतार-चढ़ाव कम होते हैं.
गुड़मार औषधि की सबसे बड़ी खासियत यह है कि, मीठे की तलब पर लगाम लगाना, जी हां यह गुड़ यानी मीठे स्वाद को मार देता है. इसके पत्ते चबाने से कुछ समय के लिए जीभ पर मीठे का स्वाद महसूस ही नहीं होता हैं, जो लोग चीनी या मिठाइयों के आदी हैं, उनके लिए यह प्राकृतिक स्वीट कंट्रोल स्विच के रूप में काम करता है.
गुड़मार कई समस्याओं में बेहद उपयोगी साबित हो सकता हैं. अगर वजन प्रबंधन की बात करें, तो गुड़मार मेटाबॉलिज्म को सक्रिय करने में सहायक होता है. यह शरीर में वसा जमा होने की प्रक्रिया को धीमा कर सकता है. संतुलित आहार और व्यायाम के साथ इसका इस्तेमाल वजन घटाने के प्रयासों को मजबूत बना सकता है.
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राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय नगर बलिया की पांच साल अनुभवी आयुर्वेदाचार्य डॉ. वंदना तिवारी के अनुसार, कोलेस्ट्रॉल के मामले में भी गुड़मार बहुत लाभकारी बताया गया है. यह जहां एक तरफ खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) और ट्राइग्लिसराइड्स को कम करने में मदद करता है, तो वहीं दूसरी ओर अच्छे कोलेस्ट्रॉल (HDL) के स्तर को बेहतर बनाए रखने में सहायक हो सकता है. यह हृदय के लिए भी फायदेमंद हैं.
बात अगर पाचन और लीवर के स्वास्थ्य की करे, तो गुड़मार का योगदान बड़ा उल्लेखनीय बताया गया है. यह पाचन क्रिया को संतुलित करने में मदद कर और पेट से जुड़ी हल्की समस्याओं में राहत दे सकता है. जी हां पारंपरिक चिकित्सा में भी इसे लीवर की कार्यक्षमता को समर्थन देने वाली जड़ी-बूटी के रूप में प्रयोग किया जाता रहा है.
गुड़मार में एंटीऑक्सीडेंट और सूजनरोधी गुण होते हैं, जिसके कारण गुड़मार शरीर को ऑक्सीडेटिव तनाव से बचाने में सहायक हो सकता है. सूजन कम करने की इसकी क्षमता इसे बहुत उपयोगी बनाती है. इसी के चलते आयुर्वेदिक फॉर्मूलेशन में इसे महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त हुआ है.
किसी भी औषधीय पौधे का उपयोग सावधानीपूर्वक करना जरूरी होता है. यदि आप शुगर की दवाएं ले रहे हैं, तो डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें, क्योंकि शुगर स्तर अत्यधिक कम होने का खतरा भी हो सकता है. अगर आयुर्वेद एक्सपर्ट से सलाह लेकर इसका सेवन किया जाए, कई लाभ मिल सकते हैं. अपने मन से कभी भी इसका सेवन न करें.


