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चेक बाउंस मामले में तिहाड़ जेल की हवा खा चुके एक्टर राजपाल यादव हाल ही में अंतरिम जमानत पर बाहर आए हैं. जेल से छूटने के बाद उन्होंने ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जहां वह काफी भावुक नजर आए. उन्होंने मुश्किल घड़ी में साथ देने वाले फैंस और बच्चों का शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि जनता ने उन्हें जो प्यार दिया है, उसका कर्ज वह जीवन भर नहीं उतार पाएंगे. फिलहाल कोर्ट ने उन्हें 18 मार्च तक की राहत दी है.
राजपाल यादव को कोर्ट से 18 मार्च तक मिली है राहत.
मीडिया से मुखातिब होते हुए राजपाल यादव ने भावुक अंदाज में कहा, ‘आप अपने अकाउंट की डिटेल्स जरूर भेजिएगा. मुझे आपसे सिर्फ थोड़ा समय चाहिए. आपका प्यार तो मेरे साथ है ही, लेकिन जिस तरह से और जिस सम्मान के साथ आपका पैसा मेरे पास आया है, उसी आभार के साथ वह आपके खातों में वापस भी जाएगा.’
सपोर्ट करने के लिए लोगों को कहा शुक्रिया
राजपाल यादव ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा, ‘मैं उन सभी लोगों का धन्यवाद करना चाहता हूं जो मेरे साथ खड़े रहे. देश के इतने लोग और इतने बच्चे मेरे समर्थन में आगे आए. यह प्यार का ऐसा कर्ज है, जिसे शायद मैं जिंदगी भर नहीं उतार पाऊंगा.’
राजपाल यादव को 18 मार्च तक मिली राहत
दिल्ली हाई कोर्ट ने राजपाल यादव को 18 मार्च तक के लिए अंतरिम जमानत दे दी है. जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच ने 1 लाख के बेल बॉन्ड पर यह राहत दी. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पहले राजपाल को दोपहर 3 बजे तक 1.5 करोड़ जमा करने का आदेश दिया था. शिकायतकर्ता कंपनी मुरली प्रोजेक्ट्स के वकील ने जब इस बात की पुष्टि कर दी कि एक्टर ने चेक बाउंस की राशि के बदले यह रकम उनके बैंक खाते में जमा कर दी है, तब जाकर उन्हें जमानत मिली.
क्या है राजपाल यादव से जुड़ा चेक बाउंस मामला?
राजपाल की मुश्किलें साल 2010 में शुरू हुई थीं, जब उन्होंने अपनी बतौर डायरेक्टर पहली फिल्म अता पता लापता (2012) बनाने के लिए दिल्ली की कंपनी मुरली प्रोजेक्ट्स से 5 करोड़ का कर्ज लिया था. फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह पिट गई, जिसके बाद कर्ज चुकाने का संकट खड़ा हो गया. मामला कानूनी लड़ाई में बदल गया और अप्रैल 2018 में मजिस्ट्रेट कोर्ट ने राजपाल और उनकी पत्नी राधा को ‘नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट’ की धारा 138 के तहत दोषी करार दिया.
कोर्ट में चल रहा है मामला
कुल सात चेक बाउंस होने के मामले में राजपाल यादव को 6 महीने की कैद की सजा सुनाई गई थी, जिसे 2019 में सेशंस कोर्ट ने भी बरकरार रखा था. अक्टूबर 2025 तक यादव ने डिमांड ड्राफ्ट के जरिए 75 लाख तो जमा किए, लेकिन अदालत ने पाया कि कर्ज की एक बड़ी राशि अब भी बकाया है.
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साल 2015 में दैनिक भास्कर से करियर की शुरुआत की. फिर दैनिक जागरण में बतौर टीम लीड काम किया. डिजिटल करियर की शुरुआत आज तक से की और एबीपी, ज़ी न्यूज़, बिज़नेस वर्ल्ड जैसे संस्थानों में काम किया. पिछले 6 सालों से …और पढ़ें

