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Aligarh Ramzan Fruits Rate: रमजान का पाक महीना चल रहा है और इस समय फलों की मांग तेजी से बढ़ जाती है. फल विक्रेता अफजाल बताते हैं कि रमजान आते ही लगभग हर फल के रेट बढ़ गए हैं और इस बार महंगाई पहले के मुकाबले काफी ज्यादा है.
अलीगढ़: रमजान का महीना शुरू होते ही बाजारों में फलों की मांग काफी बढ़ गई है. रोजा रखने वाले लोग इफ्तार में फलों का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं, जिसके कारण फलों के दामों में भी तेज उछाल देखने को मिल रही है. फल विक्रेता अफजाल बताते हैं कि रमजान आते ही लगभग हर फल के रेट बढ़ गए हैं और इस बार महंगाई पहले के मुकाबले काफी ज्यादा है.
फल विक्रेता अफजाल खान के अनुसार, पहले जो चीकू 50 रुपए प्रति किलो बिक रहा था, वह अब 80 रुपए किलो हो गया है. सेब का दाम 100 रुपए से बढ़कर 180 रुपए किलो पहुंच गया है, जबकि संतरा 100 रुपए से बढ़कर 160 रुपए किलो बिक रहा है. पपीता पहले 30 रुपए किलो था, जो अब 50 रुपए किलो हो गया है. वहीं अमरूद 50 रुपए से सीधे 100 रुपए किलो तक पहुंच गया है.
‘पहले कभी नहीं देखी इतनी महंगाई’
उनका कहना है कि लगभग हर फल के दाम में भारी बढ़ोतरी हुई है और पीछे से ही माल महंगा आ रहा है, इसलिए दुकानदारों के पास रेट कम करने का कोई विकल्प नहीं है. अफजल पिछले करीब 15 सालों से फल का कारोबार कर रहे हैं. उनका कहना है कि इतने वर्षों में उन्होंने फलों पर इतनी महंगाई पहले कभी नहीं देखी. उनके मुताबिक, सप्लाई और बाजार की राजनीति भी इसकी एक बड़ी वजह है, जहां माल को रोककर धीरे-धीरे बाजार में उतारा जाता है, जिससे कीमतें बढ़ जाती हैं.
ग्राहकों पर दिख रहा महंगाई का असर
उन्होंने बताया कि पहले के रमजान में तरबूज 20 रुपए किलो तक बिकता था, लेकिन इस बार इसका रेट 50 रुपए से 60 रुपए किलो तक पहुंच गया है. महंगाई का असर ग्राहकों के साथ-साथ दुकानदारों पर भी साफ दिखाई दे रहा है. अफजल बताते हैं कि पहले के मुकाबले बिक्री में जमीन-आसमान का फर्क आ गया है. महंगे दामों की वजह से कई गरीब ग्राहक फल खरीद ही नहीं पा रहे हैं. इसके बावजूद वे कहते हैं कि यही उनका रोज़गार है और पिछले 15 सालों से इसी काम से जुड़े हैं. इसलिए कमाई कम हो या ज्यादा, उन्हें यह काम जारी रखना ही पड़ेगा.
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आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.


