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Ranchi Air Ambulance Crash: रांची क पास चतरा में एक एयर एम्बुलेंश के क्रैश होने के बाद विमानों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए है. छोटा और हल्का विमान होने की वजह से इसमें कोई ब्लैक बॉक्स नहीं था. इतना ही नहीं यह विमान चार साल से इस्तेमाल नहीं हुआ था. ऐसे में सवाल यह है कि ऐसे विमानों को उड़ान की अनुमति किस आधार पर मिल रही है.
दुर्घटनाग्रस्त विमान का मलबा. फोटो- पीटीआई
Ranchi Air Ambulance Crash: झारखंड के चतरा जिले में सोमवार रात एक एयर एम्बुलेंस के क्रैश होने से सात लोगों की मौत हो गई थी. दिल्ली स्थित रेडबर्ड एयरवेज प्राइवेट लिमिटेड द्वारा संचालित बीचक्राफ्ट C90 किंग एयर विमान रांची से दिल्ली जा रहा था, जब यह कसारिया क्षेत्र के घने जंगलों में दुर्घटनाग्रस्त हो गया. विमान में मरीज संजय कुमार (41), एक डॉक्टर, एक पैरामेडिकल स्टाफ, दो परिचारक और दो पायलट थे. विमान को पायलट विवेक विकास भगत तथा फर्स्ट ऑफिसर सवराजदीप सिंह उड़ा रहे थे. विकास भगत के पास लगभग 1,400 घंटे का फ्लाइंग अनुभव था. वहीं सवराजदीप सिंह के पास 450 घंटे का अनुभव था.
लेकिन अब इस हादसे की जांच उलझती दिख रही है. जांचकर्ताओं के सामने बड़ी चुनौती यह है कि विमान में ब्लैक बॉक्स (कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर या फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर) नहीं था. सिविल एविएशन नियमों के अनुसार 5,700 किलोग्राम से कम वजन वाले विमानों के लिए CVR या FDR अनिवार्य नहीं है. हिंदुस्तान टाइम्स अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक एक इंडस्ट्री एक्सपर्ट ने बताया कि दुर्घटना की जांच एयर ट्रैफिक कंट्रोल से कम्युनिकेशन, मलबे के विश्लेषण और आईविटनेस अकाउंट्स के आधार पर करनी होगी. क्योंकि ब्लैक बॉक्स के अभाव में जांच पूरी तरह उलझ गई है.
4 साल से इस्तेमाल में नहीं था विमान
अब इस बात की जांच होगी कि क्या विमान का ऑनबोर्ड वेदर रडार खराब था, जिसके कारण क्रू ने रूट में घातक डेविएशन लिया. यह विमान 1987 में बना था और 2022 में रेडबर्ड एयरवेज ने ओरिएंट फ्लाइंग स्कूल से खरीदा था. 2018 से 2022 तक यह अनयूज्ड रहा था, हालांकि इसके पीछे का कारण स्पष्ट नहीं है. DGCA ने हाल ही में महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम की लियरजेट क्रैश के बाद चार्टर ऑपरेटर्स का स्पेशल ऑडिट ऑर्डर किया था, लेकिन रेडबर्ड के विमानों की जांच हुई कि नहीं यह स्पष्ट नहीं है.
7 जिंदगियों के साथ ये कैसा मजाक
इस हादसे में सभी सवार लोगों की मौके पर ही मौत हो गई. विमान 23 फरवरी को शाम 7:11 बजे बिरसा मुंडा एयरपोर्ट, रांची से उड़ा था और दिल्ली में उसके करीब 10 बजे लैंड करने की उम्मीद थी. रांची एटीसी ने उड़ान के तुरंत बाद इसे कोलकाता एरिया कंट्रोल को हैंडओवर कर दिया. उड़ान के दौरान मौसम खराब होने के कारण विमान ने दायीं तरफ रूट डेविएशन की मांग की. इससे पहले इसी रूट पर एयर इंडिया और इंडिगो की दो कमर्शियल फ्लाइट्स ने भी खराब मौसम से बचने के लिए डेविएशन मांगा था, लेकिन इंडिगो ने बाएं तरफ डेविएशन लिया. आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, अंतिम रडार संपर्क शाम 7:22 बजे 13,800 फीट की ऊंचाई पर रांची से करीब 40 नॉटिकल माइल दूर दर्ज हुआ. कोलकाता कंट्रोलर्स से आखिरी रेडियो संपर्क 7:34 बजे हुआ, जिसके बाद विमान का कम्युनिकेशन और रडार संपर्क वराणसी से दक्षिण-पूर्व में करीब 100 नॉटिकल माइल दूर खो गया. इसके बाद वाराणसी या लखनऊ एटीसी से कोई संपर्क नहीं हुआ, जिसके कारण कोलकाता रेस्क्यू कोऑर्डिनेशन सेंटर ने सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया.
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न्यूज18 हिंदी में बतौर एसोसिएट एडिटर कार्यरत. मीडिया में करीब दो दशक का अनुभव. दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, आईएएनएस, बीबीसी, अमर उजाला, जी समूह सहित कई अन्य संस्थानों में कार्य करने का मौका मिला. माखनलाल यूनिवर्स…और पढ़ें


