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Ranchi Success Story : रांची के रहने वाले सुनील गरीबी की वजह से 1 क्लास तक भी पढ़ाई नहीं किए हुए हैं. आज वह बांस के तरह-तरह के प्रोडक्ट बनाकर 40000 रुपये से अधिक महीने का कमा रहे हैं. कभी उनके पास जेब में 1 रुपये भी नहीं थे, आज उनकी जेब में हमेशा 10000 रुपये से अधिक हमेशा रहता है.
रांची : झारखंड की राजधानी रांची के सुनील बताते हैं कि उन्हें कभी स्कूल जाने का मौका ही नहीं मिला. उनकी गरीब ऐसी थी कि वह आज तक स्कूल नहीं गए, लेकिन वह आज अपने बच्चों को बड़े प्राइवेट स्कूलों में पढ़ रहे हैं. वह बांस से कलाकारी करते हैं. उन्होंने बांस से एक से बढ़कर एक डिजाइनर वाली चीजें बनाई हैं. चाहे वह ट्रे से लेकर घर की खूबसूरत सजाने की सामग्री हो. यह सब अपने हाथों से बनाते हैं. सरकार से इनको लोन भी मिला था. वह बताते हैं आज उनके जो कस्टमर हैं. वह सभी अमीर वर्ग से अधिक हैं. उनके बीच इन सारी चीजों की जबरदस्त डिमांड होती है और आज अच्छी खासी कमाई हो जाती है.
2 वक्त की रोटी मिल जाए वही है काफी
सुनील ने लोकल 18 से बताया कि उनका बचपन से स्कूल जाने का बड़ा मन था, लेकिन गरीबी ऐसी थी कि स्कूल की फीस ही नहीं दे पाए. उनके मां-पिताजी दोनों किसान हैं. बस इतना ही उनका पता था, जिसमें वह दो वक्त की रोटी खा पाएं .स्कूल के बारे में तो सोचना ही बहुत बड़ी बात थी, लेकिन उनके अंदर जुनून ऐसा था कि उन्हें कुछ करना है. इसके लिए उन्होंने अपने बच्चों को स्कूल भेजना शुरू किया.
उन्होंने बताया कि दूसरों को देखा कि वह बांस से कलाकारी कर रहे हैं. ऐसे में उन्होंने सोचा यह काम तो वह भी कर सकता हैं. फिर अपना भी कुछ दिमाग लगाया और सोचा की बांस से सिंपल चीज बनाने से अच्छा है. क्यों ना, फैशनेबल ट्रे, घर को सजाने के लिए खूबसूरत झालर ही बनाई जाए. यह सारी चीज देखने में भी अच्छी है. इसके लिए उन्हें एक महीने की सरकार की तरफ से ट्रेनिंग भी मिली थी. इस ट्रेनिंग के बाद उन्होंने खुद का भी थोड़ा दिमाग लगाया और अनेकों प्रोडक्ट बनाना शुरू कर दिया.
सुनील ने बताया कि उन्होंने अपने हाथों से खासतौर पर बांस के कटोरे से लेकर बांस का स्टैंड सब बनाते हैं. घर को सजाने के लिए बांस के कई तरह के डिजाइनर पोट से लेकर कई सारे प्रोडक्ट बनाए हैं. खासतौर पर जो अमीर घर के जो लोग हैं. वह उनसे स्पेशल आर्डर करके कई सारी चीजें बनवाते हैं. जहां घर को सजाने की सामग्री शामिल है.
कभी जेब में नहीं थे ₹10, अब हमेशा रहता है 10000
सुनील बताते हैं कि कभी उनकी जेब में ₹10 तक नहीं थे. हालांकि आज उनकी जेब में हमेशा 10,000 रुपये तक रहता है. आज उनके दोनों बच्चे बढ़िया प्राइवेट स्कूल में पढ़ रहे हैं. किसी प्रकार की कोई दिक्कत नहीं है. आज वह महीने का आराम से ₹40,000 तक की कमाई कर रहे हैं. कभी मार्केट अच्छा रहा तो 50 से 60 हजार रुपये तक की कमाई हो जाती है. अब उनका सपना है कि वह नहीं पढ़ाई किए हैं तो अपने बच्चों को बढ़िया पढ़ाई करवाएं. क्योंकि शिक्षा एक ऐसी चीज है की वह आपको गरीबी से आसानी से बाहर निकल देती है.
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बृजेंद्र प्रताप सिंह डिजिटल-टीवी मीडिया में लगभग 4 सालों से सक्रिय हैं. मेट्रो न्यूज 24 टीवी चैनल मुंबई, ईटीवी भारत डेस्क, दैनिक भास्कर डिजिटल डेस्क के अनुभव के साथ 14 मई 2024 से News.in में सीनियर कंटेंट राइटर…और पढ़ें


