राज्यसभा चुनाव को लेकर महाराष्ट्र विकास आघाड़ी (एमवीए) के भीतर खींचतान खुलकर सामने आ गई है. विपक्षी गठबंधन के पास बस एक ही राज्यसभा सीट है, जिसे वह अपने संख्याबल के दम पर जीत सकता है, लेकिन उसी एक सीट पर अब तीनों सहयोगी दलों ने दावेदारी ठोक दी है. इस सियासी खींचतान के बीच अब कांग्रेस भी खुलकर मैदान में उतर आई है.
शिवसेना में अलग-अलग सुर
शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ सांसद संजय राउत ने हाल ही में यह संकेत दिया था कि एनसीपी (एसपी) प्रमुख शरद पवार राज्यसभा चुनाव लड़ने के इच्छुक हैं, क्योंकि उनका कार्यकाल समाप्त हो रहा है. हालांकि, इसके तुरंत बाद शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे ने यह कहकर समीकरण बदल दिए कि यह सीट उनकी पार्टी की है.
कांग्रेस ने ठोका दावा
इसी बीच कांग्रेस ने भी अपना दावा ठोक दिया है. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, पार्टी प्रवक्ता अतुल लोंढे ने शुक्रवार को कहा कि एमवीए में कांग्रेस के पास दूसरा सबसे बड़ा विधायक दल है, इसलिए पार्टी को या तो एक राज्यसभा सीट या फिर विधान परिषद (MLC) की सीट मिलनी चाहिए. लोंढे के बयान के बाद यह साफ हो गया है कि गठबंधन के भीतर सहमति बनाना आसान नहीं होगा.
हालांकि बढ़ते विवाद के बीच संजय राउत ने सुलह का रुख अपनाने की कोशिश की. उन्होंने कहा कि एमवीए के तीनों दल- शिवसेना (यूबीटी), कांग्रेस और एनसीपी (एसपी)- आपस में बैठकर चर्चा करेंगे और सर्वसम्मति से उम्मीदवार का फैसला लिया जाएगा. राउत ने कहा, ‘हमारे पास एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए पर्याप्त संख्या है. महाराष्ट्र के हित और पहचान को ध्यान में रखते हुए सबसे उपयुक्त उम्मीदवार चुना जाएगा.’ राज्यसभा चुनाव 16 मार्च को होना है.
क्या कह रहे उद्धव ठाकरे के दूत?
जब राउत से शरद पवार की संभावित दावेदारी को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि पवार देश के बड़े नेताओं में से एक हैं. उन्होंने यह भी जोड़ा कि गठबंधन में हर पार्टी खुद को अहम मानती है और अवसर चाहती है, लेकिन अंत में फैसला आपसी सहमति से ही होगा.
राउत ने यह भी जोर दिया कि राज्यसभा में महाराष्ट्र के मुद्दों को मजबूती से उठाने के लिए एक मराठी भाषी उम्मीदवार को भेजना जरूरी है.
एमवीए में संयुक्त उम्मीदवार को लेकर चल रही यह रस्साकशी इसलिए भी अहम मानी जा रही है, क्योंकि एनसीपी (एसपी) और सत्तारूढ़ महायुति में शामिल एनसीपी के संभावित विलय की अटकलें भी तेज हैं. मौजूदा गणित के मुताबिक, एमवीए को राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 37 विधायकों के समर्थन की जरूरत है, जबकि गठबंधन के पास कुल 47 विधायक हैं. इनमें शिवसेना (यूबीटी) के 20, कांग्रेस के 16 और एनसीपी (एसपी) के 10 विधायक शामिल हैं.
कुल मिलाकर, एक ही राज्यसभा सीट को लेकर एमवीए के भीतर बढ़ता ‘सिर फुटव्वल’ यह संकेत दे रहा है कि गठबंधन के सामने सबसे बड़ी चुनौती बाहरी नहीं, बल्कि अंदरूनी संतुलन बनाए रखने की है.


