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कृषि न्यूजः कचनावां गांव के निवासी आनंद मिश्रा बिहार में एक मल्टीनेशनल कंपनी में मैनेजर के पद पर कार्यरत थे. लेकिन वहां उनका मन नहीं लगा. 2014 में उन्होंने अपनी 6 लाख रुपये सालाना पैकेज वाली नौकरी छोड़ दी और अपने गांव लौट आए. शुरुआत में उन्होंने पारंपरिक खेती जैसे धान और गेहूं करने की कोशिश की. लेकिन इसमें उन्हें अपेक्षित मुनाफा नहीं हुआ.
रायबरेली: यह कहना कि सिर्फ सरकारी नौकरियां ही अच्छे आय का साधन होती है इसे रायबरेली के एक शख्स ने गलत साबित कर दिया है. इस शख्स ने लाखों रुपए के पैकेज वाली नौकरी छोड़कर खेती का रास्ता अपनाया और अब इससे अच्छा मुनाफा कमा रहे है. हम बात कर रहे है रायबरेली जिले के डीह थाना क्षेत्र के कचनावा गांव के प्रगतिशील किसान आनंद मिश्रा की. जिन्हें लोग “लेमन मैन” के नाम से भी जानते है. अपनी मेहनत और कार्यकुशलता के बल पर उन्होंने बागवानी के क्षेत्र में एक नई मिसाल कायम की है.
कचनावां गांव के निवासी आनंद मिश्रा बिहार में एक मल्टीनेशनल कंपनी में मैनेजर के पद पर कार्यरत थे. लेकिन वहां उनका मन नहीं लगा. 2014 में उन्होंने अपनी 6 लाख रुपये सालाना पैकेज वाली नौकरी छोड़ दी और अपने गांव लौट आए. शुरुआत में उन्होंने पारंपरिक खेती जैसे धान और गेहूं करने की कोशिश की. लेकिन इसमें उन्हें अपेक्षित मुनाफा नहीं हुआ.
कृषि विज्ञान केंद्र से मिली जानकारी: इसके बाद आनंद ने दरियापुर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क किया. जहां विशेषज्ञों ने उन्हें बागवानी करने की सलाह दी. उन्होंने 3 एकड़ जमीन पर नींबू और अमरूद की खेती शुरू की. जिससे अब वे सालाना लाखों की कमाई कर रहे है.
नींबू की उन्नत प्रजातियों की खेती: आनंद मिश्रा न केवल नींबू की खेती करते है. बल्कि आम, आंवला, कटहल, अंजीर, स्टार फ्रूट, करौंदा, अनार, मौसंबी और चीकू जैसे कई अन्य फलों की भी खेती करते है. उनके बागान में नींबू की आधा दर्जन से अधिक उन्नत प्रजातियां उगाई जाती है, जिनमें एनआरसी 8, कागजी, प्रमालिनी, साई सरबती, कागजी रसभरी, मैक्सिकन, बालाजी और कोलकत्ता पत्ती शामिल है.
कम लागत, अधिक मुनाफा: आनंद बताते है कि नींबू की एक एकड़ फसल तैयार करने में 40 से 50 हजार रुपये तक का खर्च आता है, लेकिन इसकी सालाना कमाई लाखों में पहुंच जाती है. वे पिछले 10 वर्षों से बागवानी कर रहे है और अब उन्हें “लेमन मैन” के नाम से जाना जाता है.


