वाल्मीकि टाइगर रिज़र्व में तेंदुओं का बढ़ता खौफ, ‘जंगल का घोस्ट’ बना ग्रामीणों की चिंता

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वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट अभिषेक के अनुसार, बाघ की तुलना में तेंदुआ अधिक लचीला और सफल शिकारी होता है. बाघ आमतौर पर सांभर, चीतल या गौर जैसे बड़े जंगली जीवों का शिकार करता है, जबकि तेंदुआ अपने फूड चेन में आने वाले छोटे से बड़े किसी भी जीव पर झपट सकता है.

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पश्चिम चम्पारण: जिस तरह माउंटेन लायन को पहाड़ों का ‘घोस्ट’ कहा जाता है, उसी तरह तेंदुए को जंगल का ‘घोस्ट’ माना जाता है. पश्चिम चम्पारण जिले में स्थित वाल्मीकि टाइगर रिज़र्व में तेंदुओं की संख्या 120 से अधिक बताई जाती है. यह रिज़र्व जहां बंगाल टाइगर की बढ़ती संख्या के लिए प्रसिद्ध है, वहीं आसपास के गांवों में इन दिनों तेंदुए की गतिविधियों की चर्चा ज्यादा हो रही है. जंगल से सटे ग्रामीण इलाकों में बाघ से ज्यादा खौफ तेंदुए का है. इसकी वजह है तेंदुए द्वारा किए जाने वाले हमले, जिनमें कई बार ग्रामीणों के पालतू मवेशी भी शिकार बन जाते हैं.

माहिर शिकारी, छोटे-बड़े हर जीव पर नजर
वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट अभिषेक के अनुसार, बाघ की तुलना में तेंदुआ अधिक लचीला और सफल शिकारी होता है. बाघ आमतौर पर सांभर, चीतल या गौर जैसे बड़े जंगली जीवों का शिकार करता है, जबकि तेंदुआ अपने फूड चेन में आने वाले छोटे से बड़े किसी भी जीव पर झपट सकता है. तेंदुआ अक्सर जंगल की सीमा पार कर गांवों तक पहुंच जाता है और वहां पाले गए मवेशियों को भी निशाना बनाता है. यही कारण है कि उसका शिकार दायरा व्यापक होता है और सफलता दर भी अधिक मानी जाती है.

‘जंगल का घोस्ट’ क्यों कहा जाता है?
विशेषज्ञों के मुताबिक, जंगल के अधिकांश शिकारी जीव छिपने में दक्ष होते हैं, लेकिन तेंदुआ इस कला में सबसे आगे है. बाघ और शेर अपने भारी वजन के कारण पेड़ों पर अधिक ऊंचाई तक नहीं चढ़ पाते, जबकि तेंदुआ पलक झपकते ही ऊंची से ऊंची शाखा पर पहुंच सकता है. पेड़ की ऊंचाई पर बैठा तेंदुआ नीचे खड़े लोगों को आसानी से दिखाई नहीं देता. उसकी यही छिपने की क्षमता उसे ‘जंगल का घोस्ट’ बनाती है.

जबड़ों में 500 PSI की ताकत
शिकार करते समय तेंदुआ अपने शिकार की गर्दन दबोच लेता है और उसे घसीटकर सुरक्षित स्थान तक ले जाता है. इतना ही नहीं, अपने शिकार को लकड़बग्घों या अन्य बड़े शिकारी जीवों से बचाने के लिए वह उसे पेड़ पर चढ़ाकर टांग देता है. तेंदुए के जबड़ों में करीब 500 PSI (पाउंड प्रति वर्ग इंच) की ताकत होती है, जिससे वह शिकार को मजबूती से पकड़कर ऊंचे पेड़ों पर भी आसानी से चढ़ जाता है. इसी फुर्ती, ताकत और छिपने की अद्भुत कला के कारण तेंदुआ जंगल का सबसे माहिर और रहस्यमय शिकारी माना जाता है.

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Amita kishor

न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…और पढ़ें



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