एनसीपी (शरद पवार गुट) के नेता रोहित पवार ने अजित पवार के प्लेन क्रैश को लेकर केंद्र सरकार और नागरिक उड्डयन नियामक डीजीसीए पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. रोहित पवार ने आरोप लगाया कि मामले की जांच पारदर्शी नहीं है और कुछ प्रभावशाली लोगों और संस्थाओं को बचाने की कोशिश की जा रही है. इसी आधार पर उन्होंने केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की मांग की है.
रोहित पवार ने दिल्ली में आयोजित मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि अजित पवार के विमान दुर्घटना से जुड़े तथ्यों की पड़ताल के दौरान कई अहम बिंदु सामने आए हैं, लेकिन 24 दिन बीत जाने के बावजूद जांच की प्रारंभिक रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई. उन्होंने सवाल उठाया कि जब इतना समय बीत चुका है, तो रिपोर्ट आने में देरी क्यों हो रही है.
श्वेता सिंह कौन हैं?
उन्होंने दावा किया कि जिस VSR नामक कंपनी से यह मामला जुड़ा है, उसे सत्ता से जुड़े प्रभावशाली लोगों का संरक्षण हासिल है. रोहित पवार के अनुसार, अगर कोई संस्था या अधिकारी VSR को बचाने की कोशिश कर रहा है, तो वह भी कथित साजिश का हिस्सा हो सकता है. उन्होंने आरोप लगाया कि DGCA के कुछ अधिकारी कंपनी की मदद कर रहे हैं.
रोहित पवार ने यह भी आरोप लगाया कि जांच समिति में ऐसे अधिकारियों को शामिल किया गया है, जिनके पास संबंधित लीयरजेट विमान का पर्याप्त तकनीकी अनुभव नहीं है. उन्होंने विशेष तौर पर डीजीसीए की वरिष्ठ अधिकारी श्वेता सिंह का नाम लेते हुए कहा कि इस मामले में उनकी भूमिका पर सवाल उठते हैं और जांच में उनका शामिल होना उचित नहीं है.
एनसीपी नेता ने यह भी खुलासा किया कि दिल्ली के एक प्रसिद्ध क्रिकेटर को वीएसआर के विमान में पहले गंभीर तकनीकी खराबी का सामना करना पड़ा था, जिसके बाद वह दोबारा उस विमान में कभी नहीं बैठे. उनके मुताबिक, यह उदाहरण विमान सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताओं को दर्शाता है.
राममोहन नायडू पर क्या आरोप?
रोहित पवार ने आरोप लगाया कि सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मांगी गई जानकारियां भी सरकार की ओर से उपलब्ध नहीं कराई गईं. उन्होंने कहा कि इससे संदेह और गहराता है कि कहीं न कहीं जांच को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है.
उन्होंने दावा किया कि VSR को फंडिंग देने वाली एक कंपनी का संबंध तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के एक वरिष्ठ नेता की पत्नी से है, जिससे केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू का अप्रत्यक्ष संबंध बनता है. इसी आधार पर रोहित पवार ने कहा कि भले ही इन संबंधों का सीधे तौर पर दुर्घटना से जुड़ाव साबित न हो, लेकिन पारदर्शिता बनाए रखने के लिए मंत्री को नैतिक आधार पर इस्तीफा देना चाहिए.
पीएम मोदी और अमित शाह से अपील
रोहित पवार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से भी इस पूरे मामले पर हस्तक्षेप की अपील की. उन्होंने कहा कि वह प्रधानमंत्री को ई-मेल के जरिए पत्र लिखेंगे और उनसे निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने का आग्रह करेंगे. इसके साथ ही उन्होंने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से भी इस मुद्दे को उठाने की मांग की.
रोहित पवार ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी यह दावा नहीं कर रही कि राजनीतिक या कारोबारी संबंधों का सीधे तौर पर दुर्घटना से संबंध है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में निष्पक्ष और भरोसेमंद जांच पर सवाल खड़े हो रहे हैं. उन्होंने मांग की कि मामले की जांच सेवानिवृत्त अधिकारियों, पूर्व न्यायाधीशों, लोकसभा और महाराष्ट्र विधानसभा में विपक्ष के नेताओं की निगरानी में गठित एक स्वतंत्र समिति से कराई जाए, ताकि समयबद्ध और पारदर्शी जांच हो सके.
उन्होंने अंत में कहा कि यह मामला केवल एक विमान दुर्घटना तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की विमानन सुरक्षा और संस्थानों की विश्वसनीयता से जुड़ा है, इसलिए इस पर गंभीरता से ध्यान दिया जाना जरूरी है.


