सुबह 10:45 तक भोर कैसे नहीं हुई? फिल्मी अंदाज में लिखी गोहत्या की एफआईआर, बहराइच एसपी पर भड़का लखनऊ हाईकोर्ट

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पूरा मामला यूपी के बहराइच का है. लखनऊ हाईकोर्ट ने याची की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है. कोर्ट ने कहा कि अगर एसपी अपना व्यक्तिगत शपथ पत्र दाखिल नहीं करते हैं तो उन्हें खुद हाजिर होना होगा. याची ने इसी साल 22 जनवरी को बहराइच के जरवल रोड थाने में उसके खिलाफ दर्ज एफआईआर को चुनौती दी थी. हाईकोर्ट ने कहा कि एफआईआर में कुछ टिप्पणियां ऐसी हैं, जो किसी फिल्मी स्क्रिप्ट जैसी लगती हैं. अदालत ने कहा कि बार-बार ऐसी एफआईआर आ रही हैं, जिसमें इस्तेमाल भाषा जमीनी हकीकत नहीं दिखाती, बल्कि सुनी सुनाई ज्यादा लगती हैं.

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लखनऊ हाईकोर्ट (फाइल फोटो)

लखनऊ. गोहत्या केस की एफआईआर को फिल्मी अंदाज में लिखने पर लखनऊ हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई है. हाईकोर्ट लखनऊ बेंच ने बहराइच के एसपी से जवाब तलब किया है. अदालत ने याची की गिरफ्तारी पर फौरी तौर पर रोक लगा दी है. हाईकोर्ट ने कहा कि यदि एसपी अपना व्यक्तिगत शपथ पत्र दाखिल नहीं करते हैं तो उन्हें पूरे मामले के अभिलेख समेत कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से हाजिर होना होगा. अदालत ने ये आदेश बहराइच के अकबर अली की ओर से दाखिल याचिका पर दिया. याची ने 22 जनवरी 2026 को बहराइच के जरवल रोड थाने में उसके खिलाफ दर्ज एफआईआर को चुनौती दी थी.

तरीके पर असंतोष
मुखबिर की सूचना के आधार पर पुलिस ने गो हत्या और हत्या के प्रयास के आरोप में तीन लोगों को मौके से गिरफ्तार किया था. पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों ने मौके से फरार हुए चौथे आरोपी के रूप में याची अकबर अली का नाम बताया था. कोर्ट ने कहा कि एफआईआर के अनुसार, घटना का समय सुबह का 10:45 अंकित है, इस बात का भी जिक्र है कि जब पुलिस दल मौके पर पहुंचा तो याची और अन्य लोग ये कहते हुए सुने गए कि अब उजाला होने वाला है. कोर्ट ने हैरानी जताई कि सुबह 10:45 तक भोर कैसे नहीं हुई थी. हाईकोर्ट ने ये भी नोट किया कि एफआईआर में कुछ टिप्पणियां ऐसी हैं, जो किसी फिल्मी स्क्रिप्ट जैसी प्रतीत होती हैं. अदालत ने एफआईआर दर्ज करने के तरीके पर असंतोष जताया.

रोक लगाने का समय
उच्च न्यायालय ने कहा कि कोर्ट के सामने बार-बार ऐसी एफआईआर आ रही हैं, जिसमें इस्तेमाल भाषा जमीनी हकीकत नहीं दिखाती, बल्कि सुनी सुनाई, लिखित स्क्रिप्ट जैसी और फिल्मों से प्रभावित काल्पनिक और अत्यधिक बढ़ा चढ़ा कर प्रस्तुत की गई लगती हैं. ऐसी पुनरावृत्ति पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कोर्ट ने कहा कि अब समय आ गया है कि कोर्ट हस्तक्षेप करें और पुलिस की ओर से दर्ज की जा रही काल्पनिक और अत्यधिक बढ़ा-चढ़ा कर लिखी गई एफआईआर पर रोक लगाई जा सके. हाईकोर्ट ने कहा कि ये एफआईआर ऐसे मामलों का प्रत्यक्ष उदाहरण है.

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Priyanshu Gupta

Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें



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