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सक्सेस स्टोरी: सुल्तानपुर की 18 वर्षीय छात्रा ऊर्जा अग्रवाल ने संयुक्त प्रवेश परीक्षा (मुख्य) में 85 परसेंटाइल अंक हासिल कर जिले का नाम रोशन किया है. उनकी सफलता में परिवार और आकाश इंस्टीट्यूट के शिक्षकों का विशेष योगदान रहा. ऊर्जा रोज 4–5 घंटे नियमित अध्ययन करती थीं और बनाए गए शेड्यूल का पालन करती थीं. उनके पिता कमला नेहरू प्रौद्योगिकी संस्थान में प्रोफेसर हैं. ऊर्जा का लक्ष्य उत्कृष्ट अभियंता बनकर देश की सेवा करना है.
सुल्तानपुर : कहते हैं कि अगर दिल में हौसला और जुनून हो तो कोई भी आदमी किसी भी काम को आसानी से कर सकता है. इसी का उदाहरण पेश किया है सुल्तानपुर के रहने वाली 18 वर्षीय छात्रा ऊर्जा अग्रवाल ने. जिनके मां-बाप दोनों शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े हुए हैं और शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े इन गार्जियन का सपना अपनी बेटी को इंजीनियर बनाने का है. जिसने पहली सीढ़ी को पार कर लिया है और जेईई मेंस की परीक्षा में टॉप कर न सिर्फ अपने मां-बाप का नाम रोशन किया, बल्कि सुल्तानपुर जिले का भी नाम रोशन किया है. ऐसे में आइए जानते हैं किस तरह से ऊर्जा ने पढ़ाई की और किस तरह से सफलता प्राप्त की.
इस तरह से पाई सफलता
लोकल 18 से बातचीत के दौरान ऊर्जा अग्रवाल ने बताया कि उनकी सफलता में उनके परिवार का काफी योगदान रहा है. इसके साथ ही उन्होंने अपने कोचिंग आकाश इंस्टीट्यूट के अध्यापकों के निर्देशन में अपनी पढ़ाई को अनवरत जारी रखा. इसी का परिणाम रहा कि वे अपने लक्ष्य में कामयाब हुई. दिन में 4-5 घंटे पढ़ाई किया करती थी. इसके साथ ही उन्होंने अपना शेड्यूल भी बनाया था कि किस विषय को कितना समय देना है. उस नियम और शेड्यूल को फॉलो करते रही और जिसका परिणाम आज सबके सामने है.
परिवार का मिला सहयोग
अपने माता-पिता को अपना आदर्श मानने वाली ऊर्जा का परिवार काफी पढ़ा लिखा है. उनके पिता KNIT में प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं. वहीं उनकी माता शिक्षक हैं, जिन्होंने अच्छी परवरिश और अच्छे माहौल को घर में डेवलप किया. जिसका प्रभाव ऊर्जा पर पड़ा और ऊर्जा ने जेई मेंस की परीक्षा को क्रैक किया.
भविष्य में यह बनने का है सपना
ऊर्जा अग्रवाल ने बताया कि जेईई मेंस में सिलेक्शन होने के बाद उनका कॉन्फिडेंस बड़ा है और अब वह एक बड़े लक्ष्य को हासिल करना चाहती हैं. उनका भविष्य में एक बेहतरीन इंजीनियर बनने का सपना है. उन्होंने बताया कि इस परीक्षा में उन्होंने 85 परसेंटाइल प्राप्त किया है, जिससे परिवार वालों में खुशी का माहौल है. भविष्य में वह इंजीनियर बनकर देश की सेवा करना चाहती हैं और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए भी वह काफी प्रयास करना चाहती हैं. उन्होंने बताया कि किसी भी सफलता का राज फोकस, रेगुलेटरी और डेडीकेशन से होता है.
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पिछले एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं. 2010 में प्रिंट मीडिया से अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत की, जिसके बाद यह सफर निरंतर आगे बढ़ता गया. प्रिंट, टीवी और डिजिटल-तीनों ही माध्यमों म…और पढ़ें


