हजारीबाग की निशा कुमारी ने स्टार्टअप से अनोखी कैंडल्स बनाई

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Hazaribagh Success Story : हजारीबाग की निशा कुमारी ने मेरु गांव से ग्लोमेल्ट स्टार्टअप शुरू कर 100 से ज्यादा अनोखी कैंडल्स बना रही है, जिससे वह हर माह 15000 से 20000 रुपये कमा रही हैं. उन्होंने बताया कि वह अपने पिता की सलाह से ये स्टार्टअप की हैं.

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हजारीबाग: झारखंड के हजारीबाग जिले के सदर प्रखंड अंतर्गत मेरु गांव की रहने वाली निशा कुमारी खूब चर्चा में हैं. उन्होंने घर से ही यह साबित कर दिखाया है कि अगर सोच नई हो और हौसले मजबूत हों तो छोटे शहरों से भी बड़े सपनों को साकार किया जा सकता है. वह पारंपरिक मोमबत्तियों को क्रिएटिव डिजाइन और खुशबू के साथ नया रूप देकर अपना स्टार्टअप ग्लोमेल्ट शुरू किया है. जो आज महिला उद्यमिता की एक प्रेरक मिसाल बन चुका है.

15 दिनों का ऑनलाइन लिया है प्रशिक्षण

निशा की इस उद्यमिता यात्रा की शुरुआत एक साधारण से सुझाव से हुई थी. बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष दिवाली के मौके पर उनके पिता ने उन्हें मोमबत्तियों को कुछ अलग अंदाज में बनाने का विचार दिया था. इस विचार को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने ऑनलाइन माध्यम से 15 दिनों का प्रशिक्षण लिया और क्रिसमस के अवसर पर कैंडल निर्माण की शुरुआत की. यह काम पहले केवल एक प्रयोग था. वही आज एक सफल व्यवसाय बन चुका है.

100 तरह की बनाती हैं अनोखी मोमबत्तियां

आज निशा 100 से अधिक तरह की अनोखी और आकर्षक कैंडल्स तैयार कर रही हैं. अचार, गाजर का हलवा, फुल ग्लास, बकेट कैंडल, टैडी और कार्टून कैरेक्टर जैसे डिजाइन लोगों के बीच खासे लोकप्रिय हो रहे हैं. उनकी कैंडल्स इतनी वास्तविक दिखती है कि पहली नजर में पहचान पाना मुश्किल हो जाता है कि वे मोम से बनी हैं.

कैंडल से कर रही हैं 20000 की कमाई

इन कैंडल्स की सबसे खास बात यह है कि ये बिना धुएं के जलती हैं और अलग-अलग फ्लेवर की खुशबू से पूरे माहौल को महका देती हैं. सोया वैक्स से बनी इन कैंडल्स में से कुछ लगातार दो दिनों तक जलने की क्षमता रखती हैं, जिससे इनकी मांग लगातार बढ़ रही है. इससे उनकी कमाई भी लगातार बढ़ रही है. आज वह कैंडल के जरिए 15 से 20 हजार की कमाई कर रही है. वह खुद के जीवन को रोशन कर रही हैं. सबसे खास बात यह भी है कि निशा कस्टमाइज्ड कैंडल भी बनाती है, जिसमें खास संदेश छुपाए जा सकते हैं, जो कैंडल जलने के कुछ समय बाद नजर आते हैं और उसे यादगार बना देते हैं.

निशा कुमारी की कहानी यह संदेश देती है कि आत्मनिर्भर बनने के लिए बड़े संसाधनों की नहीं, बल्कि नए विचार, सीखने की इच्छा और आत्मविश्वास की जरूरत होती है. हजारीबाग की यह बेटी आज न केवल अपनी पहचान बना रही है. बल्कि कई महिलाओं के लिए आगे बढ़ने की राह भी रोशन कर रही है.

About the Author

Brijendra Pratap Singh

बृजेंद्र प्रताप सिंह डिजिटल-टीवी मीडिया में लगभग 4 सालों से सक्रिय हैं. मेट्रो न्यूज 24 टीवी चैनल मुंबई, ईटीवी भारत डेस्क, दैनिक भास्कर डिजिटल डेस्क के अनुभव के साथ 14 मई 2024 से News.in में सीनियर कंटेंट राइटर…और पढ़ें



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