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उत्तर प्रदेश के हरदोई मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी वॉर्ड में एक किशोरी की मौत हो गई. उसका शव 6 घंटे से ज्यादा देर तक बेड पर पड़ा रहा. ड्यूटी पर तैनात नर्सिंग स्टाफ और डॉक्टरों को इसकी भनक तक नहीं लगी. बॉडी जब अकड़ने लगी तो एक तीमारदार की नजर उस पर पड़ी.
हरदोई में अस्पताल में पड़े-पड़े लड़की की मौत. (सांकेतिक तस्वीर)
हरदोईः उत्तर प्रदेश के हरदोई मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी वॉर्ड में एक किशोरी की मौत हो गई. उसका शव 6 घंटे से ज्यादा देर तक बेड पर पड़ा रहा. ड्यूटी पर तैनात नर्सिंग स्टाफ और डॉक्टरों को इसकी भनक तक नहीं लगी. बॉडी जब अकड़ने लगी तो एक तीमारदार की नजर उस पर पड़ी. इसके बाद अस्पताल प्रशासन को घटना का पता चला. सोमवार की शाम एक व्यक्ति को किशोरी बेसुध हालत में बस स्टैंड के पास मिली थी. उसने किशोरी को अस्पताल में भर्ती करा दिया.
बेसुध हालत में मिली थी किशोरी
डॉक्टरों ने उसे प्राथमिक उपचार दिया, लेकिन उसके बाद किशोरी की निगरानी नहीं की. मामला शहर कोतवाली क्षेत्र का है. आशा नगर के रहने वाले राम गोपाल सोमवार की शाम 5:30 बजे हरपालपुर से लौट रहे थे. बस स्टैंड के पास उन्हें एक अज्ञात किशोरी बेसुध हालत में मिली. राम गोपाल को दया आ गई. वह किशोरी को अपनी गाड़ी से लेकर मेडिकल कॉलेज पहुंचे. वहां उसे इमरजेंसी में भर्ती कराया गया. डॉक्टरों ने उसका प्राथमिक उपचार किया. इसके बाद उसे वार्ड में बेड पर ही छोड़ दिया. उसकी निगरानी नहीं की गई.
अकड़ चुकी थी किशोरी की लाश
मंगलवार सुबह करीब 5 बजे वार्ड में ही भर्ती मल्लावां के संजय के परिजन गिरधर लाल ने देखा कि किशोरी के हाथ-पैर पूरी तरह अकड़ चुके थे. उन्होंने तत्काल डॉक्टरों को इसकी सूचना दी. मौके पर पहुंचे डॉक्टरों ने किशोरी का चेक किया और उसे मृत घोषित कर दिया. CMS डॉ. चंद्र कुमार के अनुसार, शरीर में ऐसी जकड़न आमतौर पर मौत के कम से कम 6 घंटे बाद ही आती है. हालांकि, कमजोर शरीर में यह समय कुछ कम हो सकता है. इससे साफ होता है कि किशोरी ने रात में ही दम तोड़ दिया था.
घटना की हो रही है जांच
मेडिकल कॉलेज के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. चंद्र कुमार ने बताया कि घटना उनके संज्ञान में आई है. किशोरी अज्ञात थी और काफी कमजोर थी. राइगर मोर्टिस की प्रक्रिया आमतौर पर मौत के 6 घंटे बाद शुरू होती है. डॉ. कुमार ने कहा कि इस पूरी घटना की जांच कराई जा रही है. ड्यूटी पर मौजूद जिस भी स्टाफ की लापरवाही पाई जाएगी, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.
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प्रशान्त राय मूल रूप से उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के रहने वाले हैं. प्रशांत राय पत्रकारिता में पिछले 8 साल से एक्टिव हैं. अलग-अलग संस्थानों में काम करते हुए प्रशांत राय फिलहाल न्यूज18 हिंदी के साथ पिछले तीन …और पढ़ें


