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Herbal Color Making Video: हर्बल कलर बनाने के लिए सबसे पहले जिस भी सब्जी, भाजी या फूल से रंग तैयार करना है, उसे अच्छी तरह साफ कर लिया जाता है. इसके बाद लाल भाजी, पालक, पलाश के फूल या फिर चुकंदर को मिक्सी में पीसकर उसका प्राकृतिक रंग निकाला जाता है.
बिलासपुर. होली का त्योहार रंगों का उत्सव है लेकिन बाजार में बिकने वाले केमिकल युक्त रंग कई बार त्वचा, आंख और स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह साबित होते हैं. ऐसे में छत्तीसगढ़ के बिलासपुर के गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय (GGU) के विज्ञान एवं टेक्नोलॉजी विभाग के छात्र प्राकृतिक विकल्प को बढ़ावा दे रहे हैं. लोकल 18 से बातचीत में छात्रों ने बताया कि कैसे घर की भाजी, सब्जियों और फूलों से सुरक्षित हर्बल गुलाल और रंग तैयार किया जा सकता है. यह न सिर्फ त्वचा के लिए सुरक्षित है बल्कि पर्यावरण के अनुकूल भी है. छात्र प्रदीप कोराम ने लोकल 18 को बताया कि वर्तमान समय में होली पर बाजारों में केमिकल से बने तरह-तरह के रंग उपलब्ध हैं, जिनका अधिक उपयोग हो रहा है. ये रंग त्वचा और सेहत के लिए हानिकारक हो सकते हैं. ऐसे में घर पर ही लाल भाजी, पालक भाजी, पलाश (टेसू) के फूल और चुकंदर जैसी प्राकृतिक चीजों से हर्बल गुलाल और रंग आसानी से बनाया जा सकता है.
छात्र प्रदीप कोराम के अनुसार, हर्बल कलर बनाने की प्रक्रिया इस प्रकार है कि सबसे पहले जिस भी सब्जी, भाजी या फूल से रंग तैयार करना है, उसे अच्छी तरह साफ किया जाता है. फिर लाल भाजी, पालक, पलाश के फूल या चुकंदर को मिक्सी में पीसकर उसका प्राकृतिक रंग निकाला जाता है. पीसने के बाद जो गाढ़ा रंग या पेस्ट तैयार होता है, उसे आरारोट या मैदा (स्टार्च बेस) में मिलाया जाता है. इसके बाद इस मिश्रण को अच्छी तरह फैलाकर सुखाया जाता है. सूखने के बाद इसे हाथों से मिक्स किया जाता है और फिर ग्राइंडिंग कर बारीक बनाया जाता है ताकि उसमें मौजूद किसी भी तरह का खुरदरापन या गांठ पूरी तरह खत्म हो जाए और गुलाल चिकना बने. अंत में इसमें प्राकृतिक सुगंध मिलाई जाती है. इसके लिए गुलाब, लेमनग्रास या मोगरा फूल की खुशबू का उपयोग किया जाता है. इस तरह अलग-अलग रंगों के साथ प्राकृतिक खुशबू वाला हर्बल गुलाल तैयार हो जाता है.
साइड इफेक्ट्स से बचाते हर्बल रंग
छात्रा खुशी ने कहा कि होली पर ज्यादातर लोग केमिकल से बने रंगों का उपयोग करते हैं, जिससे त्वचा संबंधी समस्याएं, एलर्जी, खुजली और अन्य गंभीर दिक्कतें हो सकती हैं. कई मामलों में आंखों और सांस से जुड़ी समस्याएं भी सामने आती हैं. हर्बल गुलाल का उपयोग इन साइड इफेक्ट्स से बचाता है. प्राकृतिक रंग त्वचा के लिए सुरक्षित होते हैं और कई बार त्वचा को नुकसान पहुंचाने के बजाय फायदा भी करते हैं. जिन लोगों को केमिकल रंगों से डर लगता है और वे होली खेलने से बचते हैं, उनके लिए हर्बल गुलाल एक बेहतर विकल्प है. इसे घर पर आसानी से बनाया जा सकता है और यह त्वचा के रूखेपन या पिंपल जैसी समस्याओं को भी नहीं बढ़ाता.
स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए सुरक्षित
विश्वविद्यालय के छात्रों का कहना है कि थोड़ी सी जागरूकता और प्रयास से हर कोई अपने घर में प्राकृतिक संसाधनों से रंग बना सकता है. इससे न केवल स्वास्थ्य की सुरक्षा होती है बल्कि पर्यावरण को भी नुकसान नहीं पहुंचता. इस होली अगर आप भी सुरक्षित और खुशहाल त्योहार मनाना चाहते हैं, तो बाजार के केमिकल रंगों की बजाय घर पर बने हर्बल गुलाल को अपनाएं.


