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बॉलीवुड में टाइटल को कॉपी करना अक्सर रिस्की होता है, लेकिन ‘दोस्ताना’ ने इतिहास रच दिया. जहां अमिताभ बच्चन और शत्रुघ्न सिन्हा की ‘दोस्ताना’ 1980 में बॉक्स ऑफिस पर ब्लॉकबस्टर सफल रही, वहीं 28 साल बाद 2008 में उनके बेटे अभिषेक बच्चन की इसी टाइटल वाली फिल्म ने थिएटर्स पर धूम मचा दी. बॉलीवुड में यह एक दुर्लभ संयोग है, जहां पिता और पुत्र दोनों ने एक ही टाइटल वाली फिल्मों से सफलता की नई ऊंचाइयों को छुआ. जहां पुरानी फिल्म इमोशन और त्याग की कहानी थी, वहीं नई फिल्म ने अपने मॉडर्न ट्विस्ट और कॉमेडी से दर्शकों को लुभाया.
नई दिल्ली. बॉलीवुड में रीमेक और टाइटल को बार-बार दोहराना अक्सर रिस्की माना जाता है, लेकिन ‘दोस्ताना’ बच्चन परिवार के लिए लकी चार्म साबित हुई है. 1980 में रिलीज हुई यश जौहर की ‘दोस्ताना’ और 2008 में रिलीज हुई करण जौहर की ‘दोस्ताना’ (लगभग तीन दशक के अंतर पर) ने एक जैसी सफलता दिलाई है.
1980 का दशक: 1970 और 1980 का दशक बॉलीवुड में ‘एंग्री यंग मैन’ का दौर था. 1980 में राज खोसला की डायरेक्ट की हुई फिल्म ‘दोस्ताना’ रिलीज हुई. इस फिल्म ने उस समय के दो सबसे बड़े राइवल्स- अमिताभ बच्चन और शत्रुघ्न सिन्हा को स्क्रीन पर एक साथ लाया. फिल्म में दो सबसे अच्छे दोस्तों (विजय और रवि) की कहानी थी जिन्हें एक ही लड़की (जीनत अमान) से प्यार हो जाता है. दोस्ती और प्यार के बीच के टकराव को जिस सीरियसली दिखाया गया, उसने दर्शकों को अट्रैक्ट किया.
बॉक्स ऑफिस कलेक्शन: मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 1980 में फिल्म ने लगभग ₹11 करोड़ कमाए, जो उस जमाने के हिसाब से बहुत बड़ी रकम थी. यह उस साल की दूसरी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बन गई. लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल का म्यूजिक और मोहम्मद रफी के गाए ‘बनी रहे जोड़ी’ और ‘सलामत रहे दोस्ताना हमारा’ जैसे गाने आज भी दोस्ती की मिसाल माने जाते हैं.
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2008 का टर्निंग पॉइंट: 28 साल बाद, ‘दोस्ताना’ टाइटल को धर्मा प्रोडक्शन्स के बैनर तले दोबारा बनाया गया. हालांकि, इस बार कहानी बिल्कुल अलग थी. डायरेक्टर तरुण मनसुखानी ने इसे एक मॉडर्न, बोल्ड और कॉमेडी फिल्म के तौर पर पेश किया. अभिषेक बच्चन और जॉन अब्राहम ने दो ऐसे नौजवानों का रोल किया जो मियामी में एक अपार्टमेंट पाने के लिए गे होने का नाटक करते हैं. प्रियंका चोपड़ा ने फीमेल लीड रोल किया.
अभिषेक बच्चन का करिश्मा: 2008 तक अभिषेक बच्चन ने अपनी अलग पहचान बना ली थी, लेकिन ‘दोस्ताना’ ने उनकी कॉमिक टाइमिंग को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया. उन्होंने साबित कर दिया कि वह अपने पिता की विरासत को अपने स्टाइल में आगे बढ़ाने में काबिल हैं. फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर लगभग ₹90 करोड़ (ग्रॉस) का आंकड़ा पार किया और साल की सबसे सफल फिल्मों में से एक बन गई.
फादर वर्सेस सन: मजेदार बात यह है कि दोनों ही फिल्में अपने-अपने समय में ट्रेंडसेटर थीं. अमिताभ की फिल्म में इमोशनल ड्रामा और त्याग पर जोर दिया गया था. अभिषेक की फिल्म ने कॉमेडी, ग्लैमर और होमोसेक्सुअलिटी जैसे बोल्ड टॉपिक को हल्के-फुल्के अंदाज में पेश करके समाज की सोच को चुनौती दी. दोनों फिल्मों में एक बात एक जैसी थी- म्यूजिक. जहां 1980 की फिल्म के गाने इमोशनल थे, वहीं 2008 की फिल्म के गाने ‘देसी गर्ल’ और ‘शट अप एंड बाउंस’ उस साल के सबसे बड़े चार्टबस्टर थे.
बॉलीवुड के इतिहास में ऐसे बहुत कम मौके हैं जब एक ही टाइटल वाली दो फिल्में सुपरहिट हुई हों. अक्सर, पुरानी फिल्मों से तुलना करने पर नई फिल्में नीचे गिर जाती हैं, लेकिन ‘दोस्ताना’ के मामले में ब्रांड नेम काम कर गया. 1980 की फिल्म ने अमिताभ बच्चन को अपनी नंबर 1 पोजिशन बनाए रखने में मदद की. 2008 की फिल्म ने अभिषेक बच्चन के करियर को एक नया बूस्ट दिया, जिससे सोलो लीड के तौर पर उनकी जगह और मजबूत हुई.


