10वीं के एडमिट कार्ड पर वोटर-ID बनवाना चाहते थे? CJI ने अरमानों पर फेरा पानी, ये सर्टिफिकेट भी दिखाना होगा

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पश्चिम बंगाल में चल रही चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया के बीच सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण कानूनी स्पष्टीकरण जारी किया है। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्याकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने यह साफ कर दिया है कि 10वी क्‍लास का एडमिट कार्ड अपने आप में एक स्वतंत्र पहचान पत्र नहीं होगा बल्कि इसे केवल एक सहायक दस्तावेज के रूप में स्वीकार किया जाएगा। यह फैसला उन हजारों नागरिकों के लिए बड़ी राहत और स्पष्टता लेकर आया है जो अपनी पहचान साबित करने के लिए संघर्ष कर रहे थे। अदालत ने स्पष्ट किया कि एडमिट कार्ड तभी वैध माना जाएगा जब उसके साथ संबंधित पास सर्टिफिकेट भी संलग्न हो। CJI सूर्या कांत के नेतृत्व वाली बेंच ने यह आदेश वरिष्ठ अधिवक्ता डी.एस. नायडू द्वारा उठाए गए संशय के बाद दिया। इस फैसले का सीधा असर बंगाल में चल रहे सत्यापन कार्य की पारदर्शिता और प्रमाणिकता पर पड़ेगा, जिससे दस्तावेजी धोखाधड़ी की गुंजाइश कम होगी।

सुप्रीम कोर्ट का यह स्पष्टीकरण प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने वाला है। CJI सूर्या कांत के इस रुख से यह स्पष्ट है कि पहचान सत्यापन जैसे संवेदनशील मुद्दों पर अदालत किसी भी प्रकार की ढिलाई या अस्पष्टता के पक्ष में नहीं है। यह आदेश बंगाल के नागरिकों के लिए प्रक्रिया को और अधिक सटीक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्याकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पांचोली की पीठ ने स्पष्टता पर जोर दिया। मामले का उल्लेख तब हुआ जब वकील ने यह चिंता जताई कि क्या 10वीं के एडमिट कार्ड को ‘स्टैंडअलोन’ (अकेला) पहचान पत्र माना जा सकता है.

अदालत के फैसले के मुख्य प्‍वाइंट

· सप्लीमेंट्री डॉक्यूमेंट: अदालत ने दोहराया कि एडमिट कार्ड को प्राथमिक पहचान पत्र नहीं माना जा सकता. यह केवल मुख्य दस्तावेजों की पुष्टि के लिए एक सहायक कागज होगा.

· सर्टिफिकेट अनिवार्य: पहचान सत्यापन के लिए एडमिट कार्ड के साथ कक्षा 10 का ‘पास सर्टिफिकेट’ होना अनिवार्य है. बिना सर्टिफिकेट के केवल एडमिट कार्ड पेश करना पर्याप्त नहीं होगा.

· SIR प्रक्रिया में पारदर्शिता: इस आदेश का उद्देश्य पश्चिम बंगाल में चल रहे SIR अभ्यास में किसी भी प्रकार की भ्रम की स्थिति को रोकना है.

पश्चिम बंगाल SIR और पहचान का संकट
पश्चिम बंगाल में पहचान सत्यापन की प्रक्रिया लंबे समय से कानूनी और प्रशासनिक चर्चाओं में रही है. कई मामलों में पुराने एडमिट कार्ड्स को ही उम्र और पहचान का एकमात्र प्रमाण मान लिया जाता था. CJI के इस आदेश ने अब उस लीगल लूपहोल को बंद कर दिया है. यह आदेश सुनिश्चित करता है कि केवल प्रमाणित शैक्षणिक रिकॉर्ड ही सरकारी डेटाबेस का हिस्सा बनें.

सवाल-जवाब
क्या पश्चिम बंगाल SIR में केवल एडमिट कार्ड से पहचान प्रमाणित हो सकती है?
नहीं, सुप्रीम कोर्ट के नवीनतम आदेश के अनुसार, एडमिट कार्ड को केवल एक ‘सप्लीमेंट्री डॉक्यूमेंट’ माना जाएगा. इसके साथ ‘पास सर्टिफिकेट’ लगाना अनिवार्य है.

पश्चिम बंगाल SIR में यह आदेश किस बेंच ने पारित किया है?
यह आदेश भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्या कांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पांचोली की बेंच ने दिया है.

क्या अन्य राज्यों में भी यह नियम लागू होगा?
वर्तमान आदेश विशेष रूप से पश्चिम बंगाल में चल रहे SIR अभ्यास और उससे संबंधित कानूनी चिंताओं के संदर्भ में दिया गया है.



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